Weight Gain after Pregnancy, प्रेगनेंसी के बाद वेट गेन: बीते दिनों में कैटरीना के पोस्टपार्टम वेट गेन को लेकर काफी चर्चा हुई है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, ऐश्वर्या, करीना से लेकर कई आम महिलाएं इस तरह की चर्चाओं का हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में समझना जरूरी है कि, प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का शरीर कई बदलावों से गुजरता है, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद भी यह बदलाव रुकते नहीं हैं। डिलीवरी के बाद जहां मां का पूरा ध्यान अपने न्यूबॉर्न बेबी की देखभाल पर रहता है, वहीं उसके अपने शरीर को भी आराम और रिकवरी की जरूरत होती है। इस दौरान कई महिलाओं को पहले से ज्यादा भूख लगती है, नींद पूरी नहीं हो पाती और वजन घटाने में भी समय लगता है।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - लेबर पेन से पहले शरीर देता है ये संकेत, डॉक्टर से जानें असली और नकली Labour Pain का फर्क
ऐसे में वजन बढ़ने को लेकर नई मां को ताने देने या जल्द से जल्द फिट होने का दबाव बनाने के बजाय उसकी स्थिति को समझना जरूरी है। डॉ. पाल ने बताया कि डिलीवरी के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव और रोजमर्रा की चुनौतियां वजन को प्रभावित कर सकती हैं। आइए समझते हैं कि डिलीवरी के बाद वजन बढ़ने के पीछे कौन-कौन से कारण हो सकते हैं।
प्रेग्नेंसी के बाद वजन बढ़ने के पीछे कारण
हार्मोनल बदलाव
प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। बच्चे के जन्म के बाद हार्मोन का स्तर बदलता है और शरीर को गर्भावस्था से पहले की स्थिति में लौटने में समय लगता है। डॉक्टर के मुताबिक, डिलीवरी के बाद होने वाले हार्मोनल बदलावों को समझना जरूरी है। हालांकि, वजन बढ़ने का कारण केवल हार्मोन नहीं होते। खानपान, शारीरिक गतिविधि, नींद और शरीर की रिकवरी भी इसमें भूमिका निभाते हैं।
ज्यादा भूख लगना
एक्सपर्ट्स के मुताबिक डिलीवरी के बाद घ्रेलिन और लेप्टिन जैसे हार्मोन का असर हर महिला के शरीर पर अलग होता है। घ्रेलिन को भूख बढ़ाने वाले हार्मोन के रूप में जाना जाता है, जबकि लेप्टिन शरीर को पेट भरा होने का संकेत देने में मदद करता है। इस दौरान भूख बढ़ना सामान्य हो सकता है। इसलिए नई मां को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन देना जरूरी है, न कि वजन घटाने के नाम पर उसकी डाइट सीमित करना।
नींद की कमी और तनाव
नवजात बच्चे की देखभाल के कारण मां की नींद बार-बार टूट सकती है। रात में जागना, दिनभर बच्चे को संभालना और खुद के लिए समय न निकाल पाना थकान बढ़ा सकता है। नींद की कमी तनाव और भूख को प्रभावित कर सकती है, जिससे वेट लॉस करना मुश्किल हो सकता है।
स्तनपान
डॉ. पाल स्तनपान से जुड़े प्रोलैक्टिन हार्मोन का भी उल्लेख करते हैं। यह हार्मोन दूध बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि प्रोलैक्टिन हर महिला में पेट भरे होने का एहसास कम करके वजन बढ़ाता है। स्तनपान के दौरान कुछ महिलाओं का वजन घटता है, जबकि कुछ का वजन लंबे समय तक बना रह सकता है। हर महिला का अनुभव अलग होता है।
प्रसव के बाद वजन कम होने में कुछ सप्ताह से लेकर कई महीने या उससे अधिक समय भी लग सकता है। हर महिला की रिकवरी अलग होती है। इसलिए जल्दबाजी में डाइटिंग या कठिन एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे सक्रिय होना बेहतर है।
