Hemoglobin Deficiency in Pregnancy: गर्भावस्था हर महिला के जीवन का बेहद संवेदनशील और खास समय होता है। इस दौरान मां के शरीर का खून सिर्फ मां की जरूरतों को ही नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को भी संभालता है। ऐसे में हीमोग्लोबिन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यही तत्व शरीर में ऑक्सीजन को पहुंचाने का काम करता है और मां से बच्चे तक पोषण पहुंचाने में मदद करता है। अगर इस समय खून की कमी यानी एनीमिया हो जाए, तो इसका असर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं इसके साइड इफेक्ट और कैसे होगी पूर्ति?
गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन की कमी!
हीमोग्लोबिन की कमी के संकेत
शरीर में शुरुआती दौर में हीमोग्लोबिन की कमी हल्की समस्या लग सकती है, लेकिन इसके हल्के संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। समय रहते इलाज न होने पर संक्रमण का खतरा काफी बढ़ सकता है और प्रसव के दौरान जटिलताएं भी हो सकती हैं। आपको शुरुआत में कुछ इस तरह के लक्षण दिख सकते हैं।
- लगातार थकान
- चक्कर आना
- सांस फूलना
- चेहरा पीला पड़ना
- कमजोरी महसूस होना
प्रेगनेंसी में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
गर्भावस्था में शरीर को सामान्य से अधिक आयरन की जरूरत होती है। इस दौरान बढ़ते हुए भ्रूण, प्लेसेंटा और मां के शरीर में बढ़ते रक्त की मात्रा के लिए आयरन आवश्यक है। अगर यह जरूरत पूरी नहीं होती, तो गर्भ में पल रहे शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है और समय से पहले प्रसव या कम वजन की समस्या सामने आ सकती है।
हीमोग्लोबिन बढ़ाने के घरेलू उपाय
हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए संतुलित और आयरन युक्त भोजन बेहद जरूरी है। इसके अलावा आपको डाइट में विटामिन-सी युक्त फूड्स को भी शामिल करना चाहिए। जो शरीर मे आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाते हैं। आपको अपनी डाइट में नीचे बताए गए फूड्स में से कुछ चीजें जरूर शामिल कर लेनी चाहिए।
- हरी पत्तेदार सब्जियां
- चुकंदर और अनार
- सूखे मेवे
- गुड़ और काले तिल
- आंवला, नींबू, संतरा आदि।
डिस्क्लेमर- गर्भावस्था के दौरान किसी भी घरेलू उपाय या आहार में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। सही समय पर जागरूकता और देखभाल ही मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले एक्सपर्ट की राय लेना बेहद जरूरी है।
