कौन सा मास्क सबसे बेहतर है (IStock)
Common FAQs Related To Face Mask: सुबह का वक्त है, खिड़की के बाहर धुंध इतनी घनी है कि सूरज की किरणें भी कमजोर पड़ गई हैं और हवा में एक धुएं, धूल और जलते कचरे की अजीब सी गंध है। दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों के लिए यह नजारा अब आम हो चुका है। स्कूल जाते बच्चे, ऑफिस भागते लोग, हर किसी के चेहरे पर मास्क जरूर है, लेकिन सवाल वही कि 'क्या ये मास्क सच में हमें बचा रहे हैं?'
बढ़ते प्रदूषण के बीच हम रोज अपने बच्चों से कहते हैं बेटा, बिना मास्क घर से बाहर मत निकलना। वहीं बच्चे भी अक्सर जवाब में पूछते हैं कि आखिर कौन सा मास्क पहनें? सिर्फ बच्चे ही नहीं यही सवाल आज लाखों लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कौन सा मास्क सही है, क्या कपड़े वाला मास्क काम करता है, और ये FFP मास्क आखिर है क्या? इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने फेफड़ों के एक्सपर्ट डॉक्टर्स के साथ बातचीत की। आइए समझते हैं डॉक्टरों की नजर से, ताकि आपकी हर सांस सुरक्षित रह सके।
फेफड़े और सांस संबंधी बीमारियों के एक्सपर्ट (पल्मोनोलॉजिस्ट) डॉक्टर विकास मित्तल बताते हैं कि दिल्ली-NCR में इस समय हवा में मौजूद सूक्ष्म कण PM2.5 और PM10 इतने बारीक हैं कि सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में अगर बाहर जाना जरूरी है तो N95 या N99 मास्क सबसे बेहतर विकल्प हैं। ये मास्क हवा में मौजूद 95% से 99% तक सूक्ष्म कणों को रोकते हैं। यानी, अगर आप रोज ऑफिस या बाहर जाते हैं, तो ये मास्क आपके लिए ढाल की तरह काम करते हैं।
एक अन्य पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर शारदा जोशी की मानें तो कॉटन या फैब्रिक मास्क सिर्फ बड़े कणों को रोक पाते हैं। लेकिन सूक्ष्म कण (PM2.5) इनके आर-पार चले जाते हैं। कॉटन मास्क एक तरह से सिर्फ दिखावे के लिए हैं, सुरक्षा के लिए नहीं। अगर आप उसे पहनना चाहते हैं, तो N95 के ऊपर एक अतिरिक्त परत की तरह पहनें, ताकि बाहर की धूल कम लगे।
जी हां, बच्चों के लिए खास आकार वाले “Kid-size N95” अब आसानी से मिल जाते हैं। ये हल्के होते हैं और सांस लेने में परेशानी भी नहीं बनते हैं। एक साल से छोटे बच्चों को मास्क नहीं पहनाना चाहिए उनके लिए हवा की सफाई और सीमित एक्सपोजर ही सबसे अच्छा बचाव है।
एक्सपर्ट्स की मानें तो सर्जिकल मास्क लोगों को वायरस से बचाने के लिए बना है, जबकि N95/N99 हवा के प्रदूषकों को रोकने के लिए हैं। बता दें कि प्रदूषण के समय सर्जिकल मास्क पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता। इसलिए इसे सिर्फ संक्रमण नियंत्रण के लिए रखें, न कि स्मॉग के लिए।
आजकल प्रदूषण से बचाव के लिए FFP मास्क भी काफी चर्चा में है। असल में FFP का मतलब है - Filtering Facepiece Particulate, जो यूरोपियन स्टैंडर्ड के मास्क हैं। इनके तीन प्रकार होते हैं FFP1, FFP2 और FFP3।
डॉ. शारदा कहती हैं कि भारत में N95 सबसे आम और भरोसेमंद विकल्प है, लेकिन अगर आपको यूरोपीय ब्रांड का FFP2 या FFP3 मास्क मिले, तो वह भी उतना ही प्रभावी है। यानी N95 और FFP2 लगभग समान हैं, फर्क सिर्फ मानक (स्टैंडर्ड) का है। इन सभी में सही फिटिंग और सही पहनने का तरीका सबसे अहम है, वरना कोई भी मास्क काम नहीं करेगा।
नहीं, अगर मास्क साफ है और सही फिट बैठता है, तो रोज पहनने में कोई दिक्कत नहीं। हालांकि, गंदा या नम मास्क जरूर बैक्टीरिया का घर बन सकता है, इसलिए उसे बदलना या धोना जरूरी है। आपको यह समझना चाहिए कि मास्क आपके फेफड़ों के लिए एक तरह का कवच है, न कि कोई रुकावट।
जी हां, डॉक्टर कहते हैं कि मास्क को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। N95 मास्क की बात करें तो इसे पांच दिन तक पहना जा सकता है। उसके बाद उसका फिल्टर कमजोर हो जाता है। वहीं. कॉटन मास्क को धोकर इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते वह पूरी तरह सूखा और साफ हो।
एक्सपर्ट्स की मानें तो N95 दोनों परिस्थितियों में प्रभावी है ये वायरस और प्रदूषक दोनों को रोकता है। इसलिए अगर आपके पास एक अच्छा N95 है, तो अलग मास्क खरीदने की जरूरत नहीं।
नहीं, यह सिर्फ एक एक मिथक है। N95 या FFP2 मास्क इस तरह बनाए जाते हैं कि सांस सामान्य रूप से चलती रहे। जो लोग पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें हल्की असहजता हो सकती है, पर ऑक्सीजन लेवल पर कोई असर नहीं होता।
यह एक बहुत ही आम समस्या है। इसके पीछे की एक वजह मास्क की फिटिंग ठीक न होना है। मास्क ढीला होने पर सांस की गर्म हवा ऊपर जाती है और चश्मे पर धुंध जमा हो जाती है। इससे बचने के लिए नाक के ऊपर मास्क को कसकर पहनें या ऊपरी किनारे पर टिश्यू रखें, इससे धुंध नहीं बनेगी।
हां, अगर आप लंबे समय तक मास्क पहने रहते हैं, तो इससे कुछ मामलों में त्वचा संबंधी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इससे त्वचा पर जलन या पिंपल्स हो सकते हैं। इसे रोकने के लिए हमेशा अपना चेहरा साफ रखें, हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं और हवा पार होने वाला मास्क चुनें।
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों के लिए मास्क का साइज अलग होना चाहिए। क्योंकि ढीला मास्क हवा के लिए जगह छोड़ देता है और सुरक्षा घट जाती है। ऐसे में आप संक्रमण या गंभीर प्रदूषण के कणों के संपर्क में आ सकते हैं।
एक्सपर्ट्स सुझाव देते हैं कि अगर आपका मास्क गीला हो जाए, धूल लग जाए, या सांस लेने में दिक्कत हो तो ऐसे में मास्क को तुरंत बदल लेना चाहिए। वहीं, N95 या FFP2 मास्क को 4-5 दिन से ज्यादा नहीं पहनना चाहिए।
नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मास्क आपकी इम्यूनिटी को कमजोर नहीं करता है, बल्कि यह तो शरीर को हवा में मौजूद प्रदूषकों और संक्रमण से बचाकर मजबूत रखता है। मास्क पहनना इम्यूनिटी के लिए खतरा नहीं, बल्कि खुद को प्रदूषण से बचाने का सबसे समझदारी भरा कदम है।
डॉक्टर की राय में अगर इनडोर जगह साफ-सुथरी है, तो मास्क की जरूरत नहीं। लेकिन अगर खिड़की खुली हो, आसपास स्मॉग या धूल हो, या किसी को खांसी-जुकाम हो तो मास्क पहनना ही बेहतर है।
अब मास्क पहनना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि अपने और अपने परिवार की सेहत की सुरक्षा है। जैसा कि एक्सपर्ट डॉक्टर्स का कहना है - मास्क सिर्फ आपके चेहरे पर नहीं, बल्कि आपके फेफड़ों की सुरक्षा दीवार है। इसलिए चाहे N95 हो, FFP2 या N99 - सही मास्क चुनना बहुत जरूरी है। मास्क हमेशा सही तरह से पहनें और अपनी सांसों को सुरक्षित रखें।