Cancer in Children: बचपन... वो उम्र जब जिंदगी सपनों से भरी होती है, लेकिन सोचिए अगर उसी उम्र में कोई बच्चा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो जाए तो? हर साल दुनियाभर में करीब 4 लाख बच्चे और किशोर कैंसर का शिकार होते हैं, जिनमें से लगभग 76,000 बच्चे भारत से होते हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि चेतावनी भी देता है कि हमें अब इस बीमारी को लेकर और अधिक जागरूक होने की जरूरत है।
बच्चों में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामले (Pic: iStock)
सितंबर माह को चाइल्डहुड कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है, इसी कड़ी में AIIMS, नई दिल्ली के पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें बचपन के कैंसर से जुड़ी चुनौतियों, समाधान और भविष्य की दिशा पर गहन चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि करीब 90% बच्चे जो कैंसर से जूझ रहे हैं, वे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं, जहां समय पर सही जांच और इलाज मिल पाना मुश्किल होता है। भारत जैसे देश में जहां बड़ी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है, वहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते यह चुनौती और भी बड़ी हो जाती है।
भारत में कैंसर पीड़ित बच्चों की सबसे बड़ी चुनौतियां:
- कुपोषण और कमजोर इम्युनिटी
- समय पर सही जांच और इलाज की कमी
- आर्थिक तंगी के कारण इलाज अधूरा रह जाना
- परिजनों में बीमारी को लेकर जानकारी की कमी
AIIMS द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बताया गया कि अब पहले से ज्यादा बच्चे इलाज पूरा कर पा रहे हैं। इसका कारण है,बेहतर डायग्नोस्टिक्स, नई दवाइयां और सहायक उपचार पद्धतियों का विकास। लेकिन इसके साथ यह भी ज़रूरी है कि इलाज के बाद भी बच्चों की नियमित जांच हो और उनका दीर्घकालिक फॉलो-अप किया जाए। क्योंकि कैंसर से उबर चुके बच्चों में कई तरह के लेट इफेक्ट्स देखे जाते हैं जैसे
- दिल की बीमारी
- स्मृति या सीखने में समस्या
- प्रजनन क्षमता में कमी
- मानसिक तनाव
- दोबारा कैंसर होने का खतरा
AIIMS के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते पहचान हो जाए, तो बचपन का कैंसर पूरी तरह से ठीक भी किया जा सकता है। इसके लिए समाज, सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।
