Monsoon Humidity Effects: बारिश की पहली फुहार पड़ते ही ज्यादातर लोगों को लगता है कि अब गर्मी से राहत मिल जाएगी। लेकिन अक्सर होता इसका उल्टा है। बाहर निकलते ही शरीर पसीने से तर हो जाता है, कपड़े चिपकने लगते हैं, सांस भारी-भारी लगती है और कुछ ही देर में थकान महसूस होने लगती है।
उमस का शरीर पर असर, कैसे गर्मी से भी खतरनाक
क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? कई बार तापमान 35 डिग्री सेल्सियस होता है, लेकिन शरीर को 42 डिग्री जैसी गर्मी महसूस होती है। इसकी सबसे वजह उमस (Humidity) होती है। डॉक्टर बताते हैं कि मानसून के दौरान लोग लू से तो बचने की सोचते हैं, लेकिन उमस को हल्के में ले लेते हैं। जबकि इसी मौसम में हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और हीट एक्सहॉशन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
उमस कैसे शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं और कैसे इससे बचा जाए, इसके लिए हमने डॉ. अमित प्रकाश सिंह, कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली से विस्तार से बात की। पढ़ें उन्होंने इस बारे में क्या बताया।
उमस क्या होती है
सरल भाषा में समझें तो हवा में जितनी ज्यादा नमी होती है, उतनी ही ज्यादा उमस महसूस होती है। हमारा शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीना निकालता है। लेकिन राहत तब मिलती है, जब यह पसीना त्वचा से उड़कर (Evaporate होकर) शरीर की गर्मी साथ ले जाए।
समस्या तब शुरू होती है जब हवा पहले से ही नमी से भरी हो। ऐसे में पसीना सूख नहीं पाता। वह शरीर पर ही चिपका रहता है और शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। यही वजह है कि उमस में इंसान को बेचैनी, चिपचिपाहट और घुटन ज्यादा महसूस होती है।
आपने मौसम की खबरों में कई बार Feels Like Temperature या Heat Index सुना होगा। मान लीजिए बाहर का तापमान 34°C है और हवा में नमी 85% है। ऐसे में शरीर को यह तापमान 43–44°C जैसा महसूस हो सकता है। यानी थर्मामीटर कुछ और बता रहा होता है और आपका शरीर कुछ और महसूस कर रहा होता है।
उमस शरीर पर क्या असर डालती है
1. शरीर को ठंडा रखने की क्षमता कम हो जाती है
जब पसीना सूख नहीं पाता तो शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर नहीं निकलती। ऐसे में व्यक्ति को लगातार गर्मी लगती रहती है, चेहरा लाल हो सकता है, बेचैनी बढ़ जाती है और थोड़ी-सी मेहनत में भी कमजोरी महसूस होने लगती है।
2. दिल पर जोर पड़ता है
शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए दिल को ज्यादा तेजी से खून पंप करना पड़ता है। इसी वजह से कुछ लोगों को धड़कन तेज महसूस हो सकती है। जिन लोगों को पहले से दिल से जुड़ी बीमारी है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
3. बिना एहसास के डिहाइड्रेशन हो सकता है
बारिश के मौसम में अक्सर लोगों को प्यास कम लगती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत नहीं है। उमस में लगातार पसीना निकलता रहता है। इसके साथ सिर्फ पानी ही नहीं बल्कि सोडियम, पोटैशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी शरीर से बाहर निकलते रहते हैं। अगर समय पर इनकी पूर्ति न हो तो कमजोरी, चक्कर और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
4. सांस लेना भी मुश्किल लग सकता है
क्या आपने महसूस किया है कि उमस वाले दिन सांस कुछ भारी-सी लगती है? ऐसा इसलिए क्योंकि नमी वाली हवा में सांस लेना कई लोगों के लिए ज्यादा कठिन हो सकता है। खासकर अस्थमा, COPD, एलर्जी या फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले मरीजों में यह परेशानी अधिक देखी जाती है।
5. त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं
लगातार पसीना और नमी त्वचा के लिए भी परेशानी बन जाती है। ऐसे मौसम में घमौरियां, फंगल इंफेक्शन, दाद, खुजली और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए त्वचा को जितना हो सके साफ और सूखा रखना जरूरी है।
किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है
वैसे तो उमस किसी को भी परेशान कर सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।
- 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग
- छोटे बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- डायबिटीज के मरीज
- हृदय रोगी
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- मोटापे से ग्रस्त लोग
- किडनी रोगी
- ट्रैफिक पुलिस, डिलीवरी कर्मचारी और बाहर काम करने वाले लोग
- खिलाड़ी और लंबे समय तक एक्सरसाइज करने वाले लोग
इन सभी को उमस वाले मौसम में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का खतरा अधिक रहता है।
Heat Exhaustion और Heat Stroke में क्या फर्क है
उमस के कारण सबसे पहले Heat Exhaustion हो सकता है। इसके लक्षण हैं-
- बहुत ज्यादा पसीना आना
- चक्कर आना
- सिरदर्द
- कमजोरी
- मतली
- पैरों या हाथों में ऐंठन
अगर इस स्थिति को नजरअंदाज किया जाए तो यह Heat Stroke में बदल सकती है, जो जानलेवा भी हो सकती है।
इसके संकेत हैं-
- शरीर का तापमान 40°C या उससे ज्यादा होना
- भ्रम या उलझन
- ठीक से बोल न पाना
- बेहोश होना
- दौरे पड़ना
- त्वचा का बहुत गर्म महसूस होना
ऐसे लक्षण दिखें तो समय बर्बाद न करें। मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
क्या उमस में सिर्फ ज्यादा पानी पी लेना ही काफी है
अगर आप लंबे समय तक बाहर काम कर रहे हैं या बहुत ज्यादा पसीना निकल रहा है, तो सिर्फ पानी हर बार पर्याप्त नहीं होता। कई बार शरीर को इलेक्ट्रोलाइट्स की भी जरूरत होती है।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार ORS या इलेक्ट्रोलाइट घोल लिया जा सकता है। हालांकि जिन लोगों को किडनी की बीमारी, हार्ट फेलियर या फ्लूइड लिमिट रखने की सलाह दी गई है, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसे ड्रिंक नहीं लेने चाहिए।
AC से बाहर आते-जाते समय किन बातों का रखें ध्यान
आजकल ज्यादातर लोग दिनभर AC में रहते हैं और बार-बार बाहर भी निकलते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बहुत ठंडे कमरे से सीधे उमस भरे वातावरण में आने-जाने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
कुछ आसान सावधानियां अपनाएं
- AC का तापमान 24–26°C के बीच रखें।
- बाहर निकलने से कुछ मिनट पहले तापमान थोड़ा बढ़ा दें।
- पसीने वाले कपड़ों में ज्यादा देर न रहें।
- बाहर से आने के तुरंत बाद बर्फ जैसा ठंडा पानी पीने से बचें। पहले शरीर को सामान्य होने दें।
उमस से बचने के लिए मानसून में क्या पहनें
उमस के मौसम में कपड़ों का चुनाव भी काफी मायने रखता है। बेहतर होगा कि आप -
- हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
- ढीले और आरामदायक कपड़े चुनें।
- सिंथेटिक कपड़ों से बचें।
- अगर कपड़े भीग जाएं तो उन्हें जल्द बदल लें।
उमस के मौसम में खाने-पीने में क्या बदलाव करें
उमस के मौसम में बहुत भारी खाना खाने से भी शरीर ज्यादा थका हुआ महसूस कर सकता है।
इस दौरान कोशिश करें कि आप इन चीजों का सेवन करें -
- मौसमी फल
- छाछ
- दही (अगर डॉक्टर ने मना न किया हो)
- नारियल पानी (यदि डॉक्टर अनुमति दें)
- सलाद
- हल्का और ताजा भोजन
और इन चीजों का सेवन कम कर दें -
- तला-भुना खाना
- बहुत मसालेदार भोजन
- मीठे सॉफ्ट ड्रिंक्स
- बहुत ज्यादा चाय और कॉफी
- शराब
कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए
अगर उमस के दौरान ये लक्षण दिखें तो इन्हें नजरअंदाज न करें-
- बार-बार चक्कर आना
- बेहोशी
- सांस लेने में ज्यादा तकलीफ
- सीने में दर्द
- लगातार उल्टी
- शरीर बहुत गर्म होना
- भ्रम या असामान्य व्यवहार
- चलने में कठिनाई या अत्यधिक कमजोरी
ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर की सबसे अहम सलाह
मानसून की सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि लोग सोचते हैं कि अब तो बारिश शुरू हो गई है, गर्मी का खतरा खत्म। जबकि असलियत यह है कि अगर हवा में नमी बहुत ज्यादा है, तो शरीर के लिए खुद को ठंडा रखना उतना ही मुश्किल हो सकता है जितना तेज गर्मी में। इसलिए मानसून में भी पानी की पर्याप्त मात्रा, समय-समय पर आराम, हल्के कपड़े और शरीर के शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
मेडिकल नोट
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि आपको पहले से हृदय रोग, किडनी की बीमारी, अस्थमा, COPD, डायबिटीज, गर्भावस्था या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, या डॉक्टर ने आपको तरल पदार्थ या नमक की मात्रा सीमित रखने की सलाह दी है, तो अपनी व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का पालन करें। यदि उमस या गर्मी के दौरान बेहोशी, तेज बुखार, सांस लेने में गंभीर तकलीफ, भ्रम या सीने में दर्द जैसे लक्षण हों, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत अस्पताल या आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें।
