Monsoon Health Tips 2026: तेज गर्मी के बाद मानसून के साथ बारिश की फुहारें तन और मन को सुकून देती हैं। लेकिन यही मौसम कई तरह की बीमारियों का भी पसंदीदा समय माना जाता है। वायरल फीवर, डेंगू, मलेरिया, पेट का संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, स्किन इंफेक्शन जैसी तमाम स्वास्थ्य समस्याएं इसदौरान तेजी से बढ़ती हैं।
मानसून में रखें सेहत का ध्यान, इन बातों पर करें गौर
मानसून में स्वस्थ रहने के लिए अपनी रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतों को सुधारना चाहिए। इसके लिए किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। बस थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या आपको कई परेशानियों से बचा सकती है।
मानसून में क्यों बढ़ता है संक्रमण
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। यही नमी बैक्टीरिया, वायरस और फंगस को तेजी से बढ़ने का मौका देती है। दूसरी ओर, कई जगहों पर पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। मच्छरों के काटने से ही कई तरह की स्वास्थ्य परेशानियां होती हैं। वहीं खाना जल्दी खराब होने लगता है और दूषित पानी से पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
यही वजह है कि डॉक्टर मानसून के दौरान खानपान और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं।
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स्ट्रीट फूड से बचना बेहतर
बारिश शुरू होते ही भुट्टा, गोलगप्पे, चाट, पकौड़े जैसे स्ट्रीट फूड की तरफ मन ललचाता है। लेकिन इन चीजों से इंफेक्शन भी हो जाता है।
अगर बाहर खाना ही है तो ऐसी जगह चुनें जहां साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता हो। लंबे समय से खुला रखा खाना या कटी हुई फल-सब्जियां खाने से बचें। घर का ताजा और गर्म भोजन इस मौसम में सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
सिर्फ प्यास लगने पर ही पानी न पिएं
कई लोगों को लगता है कि बारिश में गर्मी कम हो जाती है, इसलिए शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। जबकि
शरीर को हर मौसम में पर्याप्त पानी चाहिए होता है। अगर पानी सुरक्षित नहीं है तो उसे उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं। बाहर निकलते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें।
हरी पत्तेदार सब्जियां ध्यान से खाएं
मानसून में पत्तेदार सब्जियों पर मिट्टी, कीड़े या सूक्ष्म जीव आसानी से चिपक सकते हैं। इसलिए इन्हें अच्छी तरह धोकर और पूरी तरह पकाकर ही खाएं।
वैसे बारिश के मौसम में पत्तेदार सब्जियों की बजाय लौकी, तोरी, टिंडा, परवल, कद्दू जैसी मौसमी सब्जियां बेहतर विकल्प रहती हैं। इसके अलावा, मौसमी फल जरूर खाएं। लेकिन अच्छी तरह धोने के बाद ही।
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इम्यूनिटी मजबूत रखें
हर बार दवा ही समाधान नहीं होती। कई बार शरीर की मजबूत प्रतिरोधक क्षमता ही संक्रमण से बचाने का काम करती है।
अपने भोजन में दालें, मौसमी फल, ताजी सब्जियां, दही (अगर डॉक्टर ने मना न किया हो), सूखे मेवे और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें। पूरी नींद लें और रोजाना हल्की शारीरिक गतिविधि जरूर करें। तनाव भी इम्यूनिटी को प्रभावित करता है, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें।
गीले कपड़ों में ज्यादा देर रहना सही नहीं
कई लोग बारिश में भीगने के बाद घंटों उसी कपड़े में रहते हैं। यही आदत स्किन इंफेक्शन और फंगल इंफेक्शन की वजह बन सकती है।
घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें। पैरों को अच्छी तरह धोकर सुखाएं। अगर जूते पूरी तरह भीग गए हैं तो उन्हें सूखने दें। लगातार गीले जूते पहनने से पैरों में फंगल संक्रमण हो सकता है।
मच्छरों को न बढ़ने दें
डेंगू और मलेरिया से बचाव का सबसे आसान तरीका है कि मच्छरों को पनपने ही न दिया जाए। घर के आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, बाल्टी और छत पर रखे बर्तनों की नियमित सफाई करें। शाम के समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं।
बारिश में भी व्यायाम बंद करने की जरूरत नहीं
अगर बाहर टहलना संभव नहीं है तो घर के अंदर ही 20 से 30 मिनट की हल्की एक्सरसाइज, योग या स्ट्रेचिंग की जा सकती है। नियमित गतिविधि शरीर को एक्टिव रखती है और इम्यूनिटी को भी बेहतर बनाती है।
डॉक्टर से कब मिलें
बरसात के मौसम में कुछ लक्षणों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। अगर तेज बुखार, लगातार उल्टी, दस्त, सांस लेने में परेशानी, तेज पेट दर्द, शरीर पर चकत्ते, बार-बार चक्कर आना या कमजोरी महसूस तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खुद से एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं शुरू करना नुकसान पहुंचा सकता है।
छोटी-छोटी आदतें, बड़ा बचाव
मानसून का मौसम डरने का नहीं, बल्कि थोड़ा सतर्क रहने का मौसम है। अगर आप साफ पानी पीते हैं, ताजा खाना खाते हैं, हाथों की सफाई का ध्यान रखते हैं, भीगने के बाद कपड़े बदलते हैं और मच्छरों से बचाव करते हैं, तो अधिकांश मौसमी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
