Low fibre diet side effects in hindi: हम में से ज्यादातर लोग फाइबर को सिर्फ कब्ज से जोड़कर देखते हैं। लगता है कि पेट साफ रहेगा तो सब ठीक है। लेकिन हाल ही में एक अमेरिकी डॉक्टर ने बताया कि कम फाइबर वाली डाइट का असर सिर्फ पाचन तक सीमित नहीं है। फाइबर हमारे दिल, ब्लड शुगर, वजन और यहां तक कि आंतों में रहने वाले अच्छे बैक्टीरिया पर भी असर डालता है। अगर आपकी रोज की थाली में सलाद, फल, साबुत अनाज और दालें कम हैं, तो इसका असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर दिख सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि फाइबर क्यों इतना जरूरी है।
कम फाइबर वाली डाइट क्यों है नुकसानदायक
सिर्फ कब्ज नहीं पूरे पाचन तंत्र का साथी
डॉक्टर्स के अनुसार फाइबर हमारे पाचन तंत्र को सुचारु रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाता है। जब हम कम फाइबर खाते हैं, तो कब्ज, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। फाइबर मल को नरम और भारी बनाता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकलता है। यही वजह है कि लंबे समय तक लो-फाइबर डाइट आंतों की सेहत को कमजोर कर सकती है।
दिल की सेहत पर भी पड़ता है असर
बहुत से लोग यह नहीं जानते कि फाइबर का सीधा संबंध दिल की सेहत से भी है। घुलनशील फाइबर (soluble fibre) शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अगर डाइट में फाइबर कम होगा तो कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है, जो आगे चलकर हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ाता है। इसलिए सिर्फ ऑयली खाना कम करना ही काफी नहीं, बल्कि फाइबर बढ़ाना भी जरूरी है।
ब्लड शुगर कंट्रोल में अहम भूमिका
फाइबर खाने के बाद शुगर के अवशोषण को धीमा करता है। इससे ब्लड शुगर अचानक तेजी से नहीं बढ़ता। कम फाइबर वाली डाइट लेने पर ब्लड शुगर लेवल में तेजी से उतार-चढ़ाव हो सकता है, जो डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकता है। खासतौर पर प्रोसेस्ड फूड ज्यादा और साबुत अनाज कम खाने वाले लोगों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए।
वजन बढ़ने की भी बन सकती है वजह
अगर आपको बार-बार भूख लगती है तो हो सकता है आपकी डाइट में फाइबर कम हो। फाइबर पेट को देर तक भरा हुआ महसूस कराता है। इससे ओवरईटिंग कम होती है। लो-फाइबर डाइट में लोग जल्दी भूखे हो जाते हैं और ज्यादा कैलोरी ले लेते हैं, जिससे वजन बढ़ सकता है।
आंतों के अच्छे बैक्टीरिया पर असर
हमारी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं, जो इम्यूनिटी और पाचन के लिए जरूरी हैं। फाइबर इन बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। जब हम पर्याप्त फाइबर नहीं लेते, तो ये अच्छे बैक्टीरिया कमजोर हो सकते हैं। इसका असर धीरे-धीरे इम्यून सिस्टम पर भी पड़ सकता है।
अंत में यही समझिए कि फाइबर सिर्फ एक न्यूट्रिएंट नहीं, बल्कि पूरी सेहत की नींव है। रोज की थाली में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करना एक छोटी आदत है, लेकिन इसका फायदा लंबे समय तक मिलता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
