kidney stone se kaise bache: किडनी स्टोन का दर्द जिसने एक बार सहा है, वह इसे दोबारा नहीं झेलना चाहता। कमर या पेट के एक तरफ अचानक उठने वाला तेज दर्द, बेचैनी, उल्टी और पेशाब में जलन मरीज को परेशान कर सकती है। मुश्किल यह है कि पथरी निकल जाने के बाद भी उसके दोबारा बनने का खतरा बना रहता है।
किडनी में पथरी की समस्या से कैसे हो सकता है बचाव, डॉ. हंसा जी ने बताए काम के उपाय
द योग इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ. हंसा जी योगेंद्र ने अपने वीडियो में किडनी स्टोन से बचाव के लिए पानी, नमक, कैल्शियम और प्रोटीन से जुड़ी कुछ आसान आदतों पर ध्यान देने की सलाह दी है। हालांकि हर किडनी स्टोन एक जैसा नहीं होता। इसलिए केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय पथरी के प्रकार और उसके कारण को समझना भी जरूरी है।
किडनी स्टोन क्यों बनता है
जब पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड जैसे तत्व अधिक जमा होने लगते हैं तो वे छोटे क्रिस्टल बना सकते हैं। धीरे-धीरे यही क्रिस्टल पथरी का रूप ले सकते हैं। कम पानी पीना इसका बड़ा कारण माना जाता है, लेकिन अधिक नमक, खानपान, मोटापा, पारिवारिक इतिहास और कुछ बीमारियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
किडनी स्टोन कई प्रकार के होते हैं। इनमें कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन सबसे आम है। इसके अलावा यूरिक एसिड, कैल्शियम फॉस्फेट, स्ट्रुवाइट और सिस्टीन स्टोन भी हो सकते हैं। यही वजह है कि एक व्यक्ति के लिए उपयोगी डाइट दूसरे के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं।
किडनी स्टोन से कैसे बचें
1. पूरे दिन पर्याप्त पानी पिएं
किडनी स्टोन से बचाव की शुरुआत हाइड्रेशन से होती है। पर्याप्त तरल लेने से पेशाब पतला रहता है और उसमें मौजूद मिनरल्स के क्रिस्टल बनने की आशंका कम हो सकती है।
पानी की जरूरत मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार बदलती है। गर्मी में बाहर काम करने वाले या अधिक पसीना बहाने वाले लोगों को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ सकती है। पानी एक साथ बहुत अधिक पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेना बेहतर रहता है।
पेशाब का रंग बहुत गहरा होना शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। हल्का पीला रंग आमतौर पर बेहतर हाइड्रेशन की ओर इशारा करता है। हालांकि, किडनी या हृदय रोग में यदि डॉक्टर ने तरल सीमित करने को कहा है तो अपनी मर्जी से पानी की मात्रा न बढ़ाएं।
2. खाने में छिपे नमक को पहचानें
सिर्फ दाल-सब्जी में ऊपर से नमक डालना ही समस्या नहीं है। पैकेट वाले नमकीन, चिप्स, अचार, पापड़, इंस्टेंट नूडल्स, सॉस, रेडी-टू-ईट फूड और बेकरी उत्पादों में भी काफी सोडियम हो सकता है।
अधिक सोडियम लेने से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है। इससे कुछ लोगों में कैल्शियम स्टोन बनने का जोखिम बढ़ जाता है। नमक कम करने के लिए भोजन का स्वाद नींबू, धनिया, जीरा, काली मिर्च और दूसरी जड़ी-बूटियों से बढ़ाया जा सकता है।
3. कैल्शियम से पूरी तरह दूरी न बनाएं
नाम में 'कैल्शियम स्टोन' सुनकर बहुत से लोग दूध, दही और कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थ छोड़ देते हैं। यह फैसला उल्टा असर डाल सकता है। भोजन से मिलने वाला कैल्शियम आंत में ऑक्सलेट से जुड़कर उसके अवशोषण को कम करने में मदद कर सकता है।
इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कैल्शियम वाली पूरी डाइट बंद न करें। दूध, दही और पनीर जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित मात्रा में लिए जा सकते हैं। कैल्शियम सप्लीमेंट की जरूरत और सही मात्रा डॉक्टर से पूछकर तय करें। भोजन से कैल्शियम लेना और बिना सलाह सप्लीमेंट खाना एक जैसी बात नहीं है।
4. प्रोटीन लें, लेकिन संतुलन के साथ
अधिक मात्रा में रेड मीट, ऑर्गन मीट और दूसरे एनिमल प्रोटीन लेने से कुछ लोगों में यूरिक एसिड बढ़ सकता है। इसका संबंध यूरिक एसिड स्टोन के बढ़े हुए जोखिम से हो सकता है।
इसका मतलब यह नहीं कि प्रोटीन छोड़ दिया जाए। मात्रा और स्रोत पर ध्यान देना जरूरी है। दाल, चना, राजमा और दूसरे प्लांट प्रोटीन भी विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, पहले से पथरी होने पर कौन-सा प्रोटीन और कितनी मात्रा सही रहेगी, यह स्टोन के प्रकार तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होना चाहिए।
5. बिना जांच हर ऑक्सलेट फूड बंद न करें
पालक, चुकंदर, नट्स और कुछ दूसरे खाद्य पदार्थों में ऑक्सलेट पाया जाता है। लेकिन हर व्यक्ति को इन सभी चीजों से पूरी तरह दूरी बनाने की जरूरत नहीं होती। जरूरत से ज्यादा सख्त डाइट शरीर को जरूरी पोषक तत्वों से वंचित कर सकती है।
बार-बार कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन बनता है तो डॉक्टर 24 घंटे की यूरिन जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे पता चलता है कि पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड और साइट्रेट की मात्रा कैसी है। उसी आधार पर व्यक्तिगत डाइट प्लान बनाया जा सकता है।
| आदत | क्या बदलाव करें |
|---|---|
| कम पानी पीना | पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी लें |
| अधिक नमक | पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड सीमित करें |
| कैल्शियम छोड़ देना | डॉक्टर की सलाह से पर्याप्त डाइटरी कैल्शियम लें |
| जरूरत से ज्यादा प्रोटीन | मात्रा और प्रोटीन के स्रोत में संतुलन रखें |
| मनमानी डाइट | स्टोन की जांच के अनुसार बदलाव करें |
क्या नींबू पानी किडनी स्टोन रोक सकता है
नींबू में साइट्रेट पाया जाता है, जो कुछ प्रकार की पथरी बनने की प्रक्रिया में रुकावट डाल सकता है। बिना अधिक चीनी वाला नींबू पानी तरल का सेवन बढ़ाने का एक तरीका हो सकता है। लेकिन इसे पथरी गलाने वाला इलाज समझना सही नहीं है। हर स्टोन पर इसका असर एक जैसा नहीं होता और यह डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा या इलाज की जगह नहीं ले सकता।
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
किडनी स्टोन के साथ निम्न स्थितियां दिखें तो इलाज में देरी न करें:
- तेज दर्द के साथ बुखार या ठंड लगना
- पेशाब बहुत कम आना या बंद हो जाना
- पेशाब में दिखाई देने वाला खून
- लगातार उल्टी और पानी न पी पाना
- गर्भावस्था, एक ही किडनी या पहले से किडनी की बीमारी
- दर्द का दवा लेने के बाद भी नियंत्रित न होना
किडनी स्टोन से बचने के लिए किसी चमत्कारी ड्रिंक से ज्यादा जरूरी रोज की छोटी आदतें हैं। पर्याप्त पानी, कम नमक, संतुलित प्रोटीन और सही मात्रा में कैल्शियम उपयोगी हो सकते हैं। यदि पथरी बार-बार बन रही है तो केवल इंटरनेट पर मिले डाइट चार्ट को अपनाने के बजाय स्टोन एनालिसिस और 24 घंटे की यूरिन जांच पर डॉक्टर से बात करें। खानपान संबंधी सलाह स्टोन के प्रकार के अनुसार बदल सकती है।
