Joe Biden Diagnosed With Prostate Cancer: हाल ही में अमेरिका की राजनीति में एक हैरान कर देने वाला बयान सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी और राजनीतिक कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने दावा किया है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन को प्रोस्टेट कैंसर है, और ये बीमारी अब हड्डियों तक फैल चुकी है। लॉरा का ये भी कहना है कि बाइडेन की हालत इतनी नाजुक है कि वो दो महीने से ज्यादा जीवित नहीं रह पाएंगे। हालांकि इस दावे की पुष्टि व्हाइट हाउस ने नहीं की है, लेकिन यह बात प्रोस्टेट कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को लेकर एक बड़ी चेतावनी जरूर देती है। इस लेख में हम कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर की मदद से समझेंगे कि प्रोस्टेट कैंसर क्या होता है, इसके लक्षण क्या होते हैं और इसका इलाज कितना मुमकिन है।
Joe Biden Diagnosed With Prostate Cancer:
बिना शोर के शरीर में पनपता है ये कैंसर
अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में यूरोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी के प्रमुख डॉ. मानव सूर्यवंशी, बताते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर को अक्सर एक ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती समय में बेहद हल्के होते हैं और आदमी इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देता है। जब तक कैंसर की असली पहचान होती है, तब तक यह शरीर में काफी फैल चुका होता है। डॉक्टरों के मुताबिक, जो बाइडेन के बारे में कहा जा रहा है कि उनका कैंसर हड्डियों तक फैल चुका है, वह प्रोस्टेट कैंसर के अंतिम और सबसे गंभीर चरण का संकेत है।
हड्डियों तक फैलना क्यों है खतरनाक
डॉ. सूर्यवंशी की मानें तो जब प्रोस्टेट कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों, खासकर हड्डियों तक पहुंच जाता है, तब यह इलाज के लिहाज से काफी मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में मेटास्टैटिक स्टेज कहा जाता है। मरीज को लगातार हड्डियों में दर्द, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं होती हैं। जो बाइडेन के मामले में लॉरा लूमर ने यही दावा किया है कि उनका कैंसर अब इस स्टेज में पहुंच चुका है।
पहचानने में देरी से बढ़ जाता है खतरा
डॉ. बताते हैं कि भारत में भी प्रोस्टेट कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन लोग इसके लक्षणों को पहचानने में देर कर देते हैं। बार-बार पेशाब आना, धार कमजोर होना, रात में उठकर पेशाब जाना या पेशाब में खून आना, ये सभी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। लेकिन पुरुष अक्सर इन बातों को अनदेखा कर देते हैं, जो बाद में बड़ी परेशानी का कारण बनती है।
जांच क्यों है जरूरी
डॉ. सूर्यवंशी का कहना है कि 50 साल के बाद हर पुरुष को हर साल प्रोस्टेट की जांच करानी चाहिए। PSA टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जाम जैसी जांचें बेहद आसान हैं और शुरुआती चरण में ही कैंसर की पहचान कर सकती हैं। अगर किसी की फैमिली हिस्ट्री में ये बीमारी रही हो, तो 45 की उम्र से ही जांच शुरू कर देनी चाहिए।
क्या है इलाज
डॉ. सूर्यवंशी बताते हैं कि आज के समय में प्रोस्टेट कैंसर का इलाज पहले के मुकाबले बहुत आसान और सटीक हो गया है। खासकर रोबोटिक सर्जरी की मदद से कैंसर ग्रंथि को बिना ज्यादा खून बहाए, कम दर्द और तेज रिकवरी के साथ निकाला जा सकता है। इस तकनीक से नसों और आसपास के अंगों को कम नुकसान होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होता है। यही वजह है कि प्रोस्टेट कैंसर से डरने की जरूरत नहीं, बस समय पर पहचान और सही इलाज जरूरी है।
सेहत को नजरअंदाज न करें
जो बाइडेन का मामला भले ही अमेरिका से जुड़ा हो, लेकिन यह हम सबके लिए एक अलार्म जैसा है। प्रोस्टेट कैंसर खामोशी से शरीर में फैलता है, लेकिन सही समय पर जांच और इलाज हो तो यह पूरी तरह ठीक भी हो सकता है। इसलिए पुरुषों को अपनी सेहत को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए और छोटी-छोटी दिक्कतों को भी गंभीरता से लेना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, प्रोस्टेट कैंसर का इलाज अब मुमकिन है, बस लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
