Zika Virus: आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक एन. के. गांगुली ने कहा कि जीका वायरस को लेकर डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश के वैज्ञानिक इससे बचाव के लिए वैक्सीन बना चुके है, अगर देश में जीका को लेकर बड़ा आउटब्रेक होता है तो बाजार में वकसीन आ जायेगी लेकिन अभी देश में मामले बढ़ नही रहे।
जीका वायरस के केस मिलने के बाद लोगों के दिमाग में इसको लेकर डर बैठ गया है हर कोई इस संक्रमण के बारे में जानना चाहता है । एनके गांगुली ने बताया की प्रेगनेंट महिला के लिए ये बहुत खतरनाक है, सतर्कता बहुत ज्यादा जरूरी है।
गर्भवती महिलाएं जीका वायरस से रहें सावधान..
एक्सपर्ट्स का मानना है की गर्भवती महिलाओं को इससे बेहद सावधान रहने की जरूरत है। वायरस से प्रभावित होने पर गर्भ में पल रहे बच्चे का सिर छोटा हो जाता है। उसे दूसरी दिमागी बीमारियां भी हो सकती हैं। इस वायरस के प्रभाव से नवजात बच्चों को ग्लूकोमा हो सकता है। इसके अलावा बच्चों की आंखें भी कमज़ोर हो सकती ह। ऐसे में महिलाओं को प्रेगनेंसी से बचना चाहिए।
आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक एनके गांगुली ने कहा कि जीका फ्लेविवाइरिडे फैमिली का एक वायरस है। यह डेंगू, यलो फीवर, दिमागी बुखार और वेस्ट नाइल वायरस फैलाने वाले एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। यह वायरस नया नहीं है।पहले जीका वायरस के केस केरल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में पाए गए थे, लेकिन कर्नाटक में यह पहला है।
मौजूदा समय में जीका वायरस का कोई इलाज नहीं है. जीका वायरस से संक्रमित मरीज को आराम करने की सलाह दी जाती है और बचाव के लिए मच्छरों से बचाव करना जरूरी है और प्रेगनेंट महिलाओं से बचना बहुत जरूरी है।
