Monsoon Heart Health: बारिश के बाद मौसम कुछ ठंडा जरूर महसूस होता है, लेकिन हवा में बढ़ी नमी शरीर के लिए अलग तरह की चुनौती खड़ी कर सकती है। चिपचिपी गर्मी, लगातार पसीना और घुटन केवल बेचैनी ही नहीं बढ़ाते, बल्कि दिल पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट फेल्योर की समस्या है, उन्हें मानसून के उमस भरे दिनों में अधिक सावधान रहने की जरूरत है।
मानसून में दिल का ध्यान, कैसे रखें आप
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, तेज गर्मी और अधिक नमी में शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। डिहाइड्रेशन इस दबाव को और बढ़ा सकता है। ऐसे में शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को केवल मौसम का असर मानकर टालना ठीक नहीं है।
उमस में दिल पर क्यों जोर पड़ता है
सामान्य तौर पर पसीना शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। पसीना त्वचा से भाप बनकर उड़ता है तो शरीर ठंडा होता है। अधिक नमी वाले मौसम में हवा पहले से जलवाष्प से भरी होती है, इसलिए पसीना आसानी से सूख नहीं पाता। इसका परिणाम यह होता है कि पसीना आने के बावजूद शरीर को पर्याप्त ठंडक नहीं मिलती।
सीके बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अंशुल कुमार जैन बताते हैं कि जब शरीर का तापमान बढ़ता है तो गर्मी बाहर निकालने के लिए हृदय को त्वचा की ओर ज्यादा रक्त भेजना पड़ता है। इसके लिए दिल सामान्य से तेज और अधिक मेहनत से पंप करता है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेल्योर या अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों में यह अतिरिक्त कार्यभार परेशानी बढ़ा सकता है।
तेज गर्मी और पसीने के कारण शरीर से पानी तथा सोडियम की कमी हो सकती है। इससे ब्लड प्रेशर गिरने, चक्कर आने और हृदय गति बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दूसरी ओर, हार्ट फेल्योर के मरीज बिना चिकित्सकीय सलाह के बहुत ज्यादा पानी पी लें तो शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने का खतरा भी हो सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों के लिए पानी की सही मात्रा हर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय होनी चाहिए।
किन लोगों के लिए खतरा अधिक है
मानसून की उमस हर व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, लेकिन कुछ लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इनमें बुजुर्ग, मोटापे से जूझ रहे लोग और हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, अनियमित धड़कन या हार्ट फेल्योर के मरीज शामिल हैं।
पंचकूला के पारस हेल्थ केयर में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. नवीन अग्रवाल कहते हैं - अधिक नमी के कारण पसीने के जरिए शरीर का ठंडा होना मुश्किल हो जाता है। इससे हृदय पर काम का बोझ बढ़ता है। उम्रदराज लोगों और हाइपरटेंशन, डायबिटीज, मोटापा या पहले से मौजूद हृदय रोग वाले मरीजों में इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
कुछ हृदय और ब्लड प्रेशर की दवाएं भी गर्मी के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। सीडीसी के अनुसार, डाइयूरेटिक्स समेत कुछ दवाओं के कारण डिहाइड्रेशन या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि दवाओं में किसी भी तरह का बदलाव केवल डॉक्टर की सलाह पर किया जाना चाहिए।
अलर्ट करने वाले होते हैं ये लक्षण
उमस में पसीना और थकान सामान्य लग सकते हैं, लेकिन इनके साथ कुछ दूसरे लक्षण दिखाई दें तो सतर्क हो जाएं:
- सीने में भारीपन, दबाव, जकड़न या दर्द
- सांस लेने में परेशानी या अचानक सांस फूलना
- दिल की धड़कन तेज होना या सीने में फड़फड़ाहट महसूस होना
- चक्कर आना, सिर हल्का लगना या बेहोशी
- बहुत ज्यादा पसीना आना, लेकिन पसीने का न सूखना
- गर्म मौसम में भी त्वचा का ठंडा और चिपचिपा होना
- अचानक अत्यधिक थकान या असामान्य कमजोरी
- मतली या उल्टी
- भ्रम, व्यवहार में बदलाव या होश की स्थिति प्रभावित होना
डॉ. नवीन अग्रवाल के मुताबिक, ‘सीने में दर्द या जकड़न, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना, चक्कर, तेज धड़कन और असामान्य थकान को नजरअंदाज करने से इलाज में देरी हो सकती है। लगातार बने रहने या बढ़ने वाले लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।’
अचानक भ्रम, बेहोशी, सीने में तेज दर्द या गंभीर सांस की तकलीफ को मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए। ऐसे में मरीज को स्वयं वाहन चलाकर अस्पताल जाने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता दिलाएं।
उमस में दिल को सुरक्षित रखने के आसान तरीके
सबसे गर्म और उमस वाले समय, आमतौर पर दोपहर में, बाहर निकलने या मेहनत वाला व्यायाम करने से बचें। जरूरी काम सुबह या शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में करें। हल्के, ढीले और हवा पास होने देने वाले कपड़े पहनें। कमरे को हवादार रखें और संभव हो तो पंखे, कूलर या एयर कंडीशनिंग का इस्तेमाल करें।
पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं, लेकिन हार्ट फेल्योर या किडनी की बीमारी के कारण यदि डॉक्टर ने लिक्विड डाइट को सीमित करने को कहा है तो अपनी निर्धारित मात्रा से बाहर न जाएं। शराब और बहुत अधिक कैफीन वाले पेय डिहाइड्रेशन को बढ़ा सकते हैं। बाहर से लौटते ही एक साथ बहुत अधिक पानी पीने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तरल लेना बेहतर हो सकता है।
डॉ. अंशुल कुमार जैन सलाह देते हैं, ‘हृदय रोगी अपनी निर्धारित दवाएं नियमित लेते रहें। अत्यधिक गर्मी में कुछ मरीजों की ब्लड प्रेशर की दवाओं में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन किसी भी दवा को अपने स्तर पर बंद करना या उसकी खुराक बदलना सुरक्षित नहीं है।’
कम EF वाले हार्ट फेल्योर मरीज रखें विशेष ध्यान
जिन हार्ट फेल्योर मरीजों का इजेक्शन फ्रैक्शन यानी EF 30 से 35 प्रतिशत से कम है, उनके लिए उमस ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अत्यधिक पसीने से पानी और सोडियम की कमी हो सकती है, लेकिन इन मरीजों को अक्सर नमक और तरल सीमित रखने की सलाह भी दी जाती है।
डॉ. जैन के अनुसार, ऐसे मरीजों को लंबे समय तक गर्मी और उमस रहने पर अपने कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर मरीज के ब्लड प्रेशर, दवाओं, सूजन, पेशाब की मात्रा और अन्य लक्षणों को देखते हुए पानी या सोडियम की मात्रा में अस्थायी बदलाव बता सकते हैं। नमक या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक की मात्रा स्वयं बढ़ाना नुकसानदेह हो सकता है।
मानसून में दिल की देखभाल का अर्थ केवल बारिश से बचना नहीं है। शरीर को ठंडा रखना, पानी और दवाओं का संतुलन बनाए रखना तथा चेतावनी वाले संकेत समय पर पहचानना भी उतना ही जरूरी है। खासतौर पर हृदय रोगियों के लिए सीने में भारीपन, सांस फूलना या असामान्य थकान मौसम की सामान्य परेशानी नहीं, बल्कि मदद मांगने का संकेत हो सकता है।
