Hair Transplant, हेयर ट्रांसप्लांट: सिर पर कम होते बाल और पीछे जाती हेयरलाइन कई लोगों के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है। यही वजह है कि आज हेयर ट्रांसप्लांट सिर्फ फिल्मी सितारों या सेलिब्रिटीज तक सीमित नहीं रह गया है। बोनी कपूर से लेकर टीवी के मशहूर शो CID में दया का किरदार निभाने वाले अभिनेता तक हेयर ट्रांसप्लांट को लेकर चर्चा में रहे हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर आम लोगों के मन में आज भी कई सवाल और डर हैं।
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क्या हेयर ट्रांसप्लांट कराने से कैंसर हो सकता है? क्या इससे दिमाग को नुकसान पहुंचता है या आंखों की रोशनी प्रभावित होती है? क्या जिंदगीभर दवाइयां खानी पड़ती हैं? इन सवालों के जवाब जानना जरूरी है, क्योंकि अधूरी जानकारी के कारण कई लोग सही इलाज का फैसला नहीं ले पाते। दिल्ली के मशहूर कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट और हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन, डॉ. बी एल जांगिड, ने अपने वीडियो में ऐसे ही पांच बड़े मिथकों की सच्चाई बताई है। यहां जानिए आखिर हेयर ट्रांसप्लांट की सही उम्र क्या होती है और इसके साइड इफेक्ट्स, मिथकों से जुड़ी जानकारी।
हेयर ट्रांसप्लांट की सही उम्र क्या है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हेयर ट्रांसप्लांट कराने की कोई एक उम्र सभी लोगों के लिए सही नहीं होती। यह व्यक्ति के बाल झड़ने की स्थिति, हेयर लॉस के पैटर्न, डोनर एरिया में मौजूद बालों और भविष्य में बाल झड़ने की संभावना पर निर्भर करता है। हालांकि डॉ. जांगिड के मुताबिक ट्रांसप्लांट के लिए आपकी उम्र कम से कम 24-25 होनी चाहिए। वहीं अगर आप स्वस्थ्य हैं तो आप 60-70 किसी भी उम्र में हेयर ट्रांसप्लांट करवा सकते हैं।
हेयर ट्रांसप्लांट से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई
1. मिथक: क्या हेयर ट्रांसप्लांट से कैंसर हो सकता है?
डॉ. जांगिड के अनुसार, हेयर ट्रांसप्लांट और कैंसर के बीच कोई स्थापित सीधा संबंध नहीं है। यह एक मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें सिर के पिछले हिस्से से बालों की जड़ें निकालकर उन जगहों पर लगाई जाती हैं, जहां बाल कम हो चुके हैं। इसलिए कैंसर होने का डर पालना सही नहीं है।
2. मिथक: क्या इससे ब्रेन डैमेज या मूड स्विंग्स हो सकते हैं?
कई लोगों को लगता है कि सिर की त्वचा पर सर्जरी होने से दिमाग पर असर पड़ सकता है। डॉ. जांगिड बताते हैं कि स्कैल्प और ब्रेन के बीच कई सुरक्षात्मक परतें होती हैं। हेयर ट्रांसप्लांट का सीधे दिमाग से संबंध नहीं होता। इससे ब्रेन डैमेज या ब्रेन टीबी होने की आशंका को लेकर भी कोई प्रमाणित संबंध नहीं है।
3. मिथक: क्या आंखों की रोशनी पर असर पड़ता है?
यह भी एक आम डर है। लेकिन हेयर ट्रांसप्लांट का आंखों की रोशनी से कोई सीधा संबंध नहीं है। इस प्रक्रिया में सिर की त्वचा पर काम किया जाता है, न कि आंखों पर।
4. मिथक: क्या जिंदगीभर दवाइयां और खास देखभाल करनी पड़ती है?
डॉ. जांगिड के मुताबिक, ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य स्कैल्प केयर जरूरी होती है। कुछ मरीजों को मौजूदा बालों और ट्रांसप्लांट किए गए बालों की स्थिति के अनुसार दवाइयां दी जा सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति को एक जैसा इलाज या दवाइयां जरूरी नहीं होतीं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार देखभाल करनी चाहिए।
5. मिथक: क्या बार-बार डॉक्टर के पास जाना पड़ता है?
हेयर ट्रांसप्लांट के बाद शुरुआती दिनों में हल्की सूजन, दर्द या स्कैल्प में सुन्नपन महसूस हो सकता है। डॉ. जांगिड के अनुसार, ये लक्षण सामान्यतः 7 से 10 दिनों में कम होने लगते हैं, हालांकि कुछ लोगों को दो सप्ताह तक समय लग सकता है। नियमित फॉलोअप से रिकवरी पर नजर रखी जा सकती है।
हेयर ट्रांसप्लांट कोई ऐसा फैसला नहीं है जिसे देखकर या किसी सेलिब्रिटी से प्रभावित होकर ले लिया जाए। इसके लिए अनुभवी हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन से सलाह लेना जरूरी है। अपनी उम्र, बाल झड़ने की वजह, मेडिकल हिस्ट्री और डोनर एरिया की स्थिति के बारे में डॉक्टर को पूरी जानकारी दें।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डॉक्टर और यूट्यूबर बी एल जांगिड के वीडियो में बताए गए टिप्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी संबंधित क्रिएटर के व्यक्तिगत विचार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत इन टिप्स या दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।)
