Ebola Virus: इबोला वायरस का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में गिना जाता है। यह वायरस इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी संक्रमित कर सकता है और कई मामलों में मरीज की जान तक चली जाती है। इबोला तेजी से शरीर को कमजोर करता है और गंभीर स्थिति में अंदरूनी व बाहरी ब्लीडिंग की वजह बन सकता है। हालांकि यह बीमारी आमतौर पर अफ्रीकी देशों में ज्यादा देखी गई है, लेकिन इसके बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। सही समय पर पहचान और इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
इबोला वायरस कितना हो सकता है जानलेवा
क्या है इबोला वायरस
इबोला वायरस एक बेहद गंभीर और जानलेवा संक्रमण है। यह बीमारी इंसानों और कुछ जंगली जानवरों दोनों को प्रभावित कर सकती है। इबोला होने पर मरीज को तेज बुखार, कमजोरी और शरीर से खून बहने जैसी खतरनाक समस्याएं हो सकती हैं। कई बार यह संक्रमण इतना गंभीर हो जाता है कि शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं।
कब और कहां मिला था इबोला वायरस
इबोला वायरस (ebola infection) पहली बार साल 1976 में अफ्रीका में पाया गया था। इस बीमारी का नाम 'Ebola River' के नाम पर रखा गया, जो अफ्रीका के Democratic Republic of Congo (DRC) इलाके में स्थित है। इसके बाद अफ्रीका के कई देशों में इबोला के बड़े प्रकोप देखे गए।
कैसे फैलता है इबोला वायरस
इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के फ्लूइड्स के संपर्क में आने से फैलता है। इसमें शामिल हैं:
- खून
- पसीना
- लार
- उल्टी
- पेशाब
- शरीर के अन्य फ्लूइड्स
अगर कोई व्यक्ति संक्रमित मरीज के बहुत करीब आता है या उसके इस्तेमाल की चीजों को छूता है, तो संक्रमण फैल सकता है। इसके अलावा चमगादड़ और कुछ जंगली जानवरों से भी यह वायरस इंसानों तक पहुंच सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला को हवा से फैलने वाली बीमारी नहीं माना जाता।
इबोला वायरस के मुख्य लक्षण
इबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे हालत गंभीर हो सकती है। इसके प्रमुख लक्षण हैं:
- तेज बुखार
- अत्यधिक कमजोरी
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- गले में खराश
- उल्टी और दस्त
- पेट दर्द
- शरीर से खून बहना
गंभीर मामलों में मरीज के लिवर, किडनी और दूसरे अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।
कितना खतरनाक है यह वायरस
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार इबोला वायरस की मृत्यु दर काफी ज्यादा हो सकती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। यही वजह है कि इबोला को दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में गिना जाता है।
इबोला का इलाज और बचाव
फिलहाल इबोला का इलाज मुख्य रूप से मरीज की स्थिति संभालने पर आधारित होता है। इसमें शामिल हैं:
- मरीज को आइसोलेट करना
- शरीर में पानी की कमी पूरी करना
- ऑक्सीजन सपोर्ट देना
- इन्टेंसिल केयर में निगरानी रखना
इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचना, साफ-सफाई रखना और सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी माना जाता है।
