हम अपने घर को साफ-सुथरा और सेहतमंद बनाए रखने के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट्स और गैजेट्स का इस्तेमाल करते हैं। वैसे क्या आप जानते हैं कि हमारे रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली कुछ चीजें असल में हमारे स्वास्थ्य को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही होती हैं? मैसाचुसेट्स (अमेरिका) के जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरव सेठी ने सोशल मीडिया पर ऐसी 8 आम घरेलू चीजों की लिस्ट शेयर की है, जिन्हें वे खुद अपने घर में कभी नहीं रखते। डॉ.सेठी के मुताबिक, ये चीजें आपकी सेहत, आंतों और हार्मोनल संतुलन पर बुरा असर डाल सकती हैं:
डेली यूज ये 8 चीजें आपको बुरी तरह से कर सकती है बीमार (Photo: iStock)
प्लग-इन एयर फ्रेशनर
घर को खुशबूदार बनाने वाले प्लग-इन एयर फ्रेशनर्स और सेंटेड कैंडल्स में थैलेट्स और वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स जैसे हानिकारक केमिकल्स होते हैं। डॉ. सेठी के अनुसार, ये हवा में घुलकर हमारे फेफड़ों में जाते हैं और हार्मोनल डिसबैलेंस और सांस संबंधी समस्याओं का कारण बनते हैं।
प्लास्टिक कटिंग बोर्ड
सब्जियां या फल काटते समय प्लास्टिक कटिंग बोर्ड से चाकू के घर्षण के कारण माइक्रोप्लास्टिक के बेहद बारीक कण खाने में मिल जाते हैं। ये माइक्रोप्लास्टिक्स हमारे पाचन तंत्र में जाकर आंतों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी जगह लकड़ी या बांस के बोर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए।
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नॉन-स्टिक कुकवेयर
नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना पकाना बेहद आसान लगता है, लेकिन जब इनकी टेफ्लॉन कोटिंग स्क्रैच हो जाती है या तेज आंच पर गर्म होती है, तो इनसे टॉक्सिक केमिकल्स निकलने लगते हैं। ये टॉक्सिन्स आंतों के गुड बैक्टीरिया को खत्म कर सकते हैं। इसके विकल्प के रूप में स्टेनलेस स्टील या कास्ट आयरन के बर्तन बेहतर हैं।
सिंथेटिक क्लीनिंग प्रोडक्ट्स
फर्श या टॉयलेट साफ करने वाले तेज केमिकल्स वाले क्लीनर आपकी त्वचा और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ये केमिकल शरीर के इम्यून सिस्टम और गट माइक्रोबायोम को कमजोर करते हैं।
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प्लास्टिक वॉटर बॉटल्स
प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीना या खाना स्टोर करना सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है। खासकर जब इन बोतलों में गर्म पानी रखा जाता है या ये धूप के संपर्क में आती हैं, तो इनसे बीपीए जैसे हानिकारक तत्व पानी में घुल जाते हैं, जो शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को बिगाड़ सकते हैं। कांच या स्टेनलेस स्टील की बोतलें इसके लिए सुरक्षित विकल्प हैं।
आर्टिफिशियल स्वीटनर्स
चीनी से बचने के लिए लोग डाइट सोडा या पैकेट बंद चीजों में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल करते हैं। डॉ. सेठी का कहना है कि सुक्रालोज और एस्पार्टेम जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर्स आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ते हैं और मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर डालते हैं।
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स
डिब्बाबंद खाना, रेडी-टू-ईट स्नैक्स और प्रिजर्वेटिव्स युक्त खाना शरीर में क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन (सूजन) को बढ़ाता है। ये पचने में भारी होते हैं और पाचन तंत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।
पुराने या खराब मेट्रिस और तकिए
सालों से इस्तेमाल हो रहे गद्दे और तकियों में डस्ट माइट्स, फंगस और एलर्जेंस जमा हो जाते हैं। ये न केवल त्वचा संबंधी बीमारियां देते हैं, बल्कि नींद की गुणवत्ता को भी खराब करते हैं, जो हमारी समग्र इम्युनिटी पर असर डालती है।
डॉ. सौरव सेठी की यह सलाह हमें अपनी जीवनशैली और घर के माहौल पर दोबारा से सोचने के लिए प्रेरित करती है। अपने घर से इन टॉक्सिक चीजों को हटाकर और उनकी जगह सुरक्षित व प्राकृतिक विकल्प अपनाकर आप अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
