Dengue fever: वर्तमान में कई राज्यों में डेंगू बुखार तेजी से बढ़ रहा है। बदले मौसम के कारण डेंगू के मरीज सामने आने लगे हैं। डेंगू मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इसमें रोगी को सिर दर्द, तेज बुखार के साथ-साथ मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है। इसके साथ ही डेंगू बुखार में शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा भी कम होने लगती है। अगर प्लेटलेट काउंट बहुत ज्यादा गिर जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है। ऐसे में डेंगू बुखार की जरा सी लापरवाही आपको महंगी पड़ सकती है।
Dengue Fever: डेंगू बुखार क्यों और कैसे होता है?
डेंगू बुखार के लक्षण - Symptoms of Dengue Fever
मच्छर के काटने के तीन से चार दिन बाद डेंगू के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। संक्रमण के बाद रोगी में इसके लक्षण तीन दिन से चौदह दिनों तक बने रहते हैं। डेंगू बुखार के साथ ठंड लगना, तेज बुखार और गले में खराश, सिर और जोड़ों में दर्द होता है। इससे रोगी कमजोर भी महसूस करता है और कुछ भी खाने का मन नहीं करता। डेंगू के मरीज के शरीर पर कई जगहों पर गुलाबी रंग के दाने भी हो जाते हैं। इन सबके अलावा शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है।
अगर प्लेटलेट्स बहुत ज्यादा कम हो जाएं तो इससे मौत भी हो सकती है।डेंगू बुखार में मरीजों के प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं, जो जानलेवा हो सकता है। एक स्वस्थ शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होती हैं। अगर यह 1 लाख से कम हो तो अस्पताल में तुरंत भर्ती कराया जाना चाहिए। प्लेटलेट्स काउंट 20 हजार से कम होने पर डॉक्टर प्लेटलेट्स भी देते हैं।
डेंगू बुखार के लिए घरेलू उपचार - Home Remedies for Dengue Fever
- खूब नारियल पानी पिएं।
- तुलसी के पत्तों को पानी में उबालकर इस पानी को पी लें।
- मेथी के पत्ते की चाय बनाकर पिएं।
- बकरी का दूध पिएं। ये औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, जिससे डेंगू का बुखार जल्दी ठीक हो जाता है।
- पपीते के पत्तों को पीसकर या पानी में उबालकर पिएं। इससे शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान दूर होगी।
- एक गिलास गाजर के रस में 3 से 4 चम्मच चुकंदर का रस मिलाकर पिएं। इसलिए रक्त कोशिकाओं की संख्या तेजी से बढ़ती है।
डेंगू से बचाव कैसे करें - How to Prevent Dengue
डेंगू बुखार मच्छरों के काटने से फैलता है, इसलिए आप मच्छरों से जितना दूर रहेंगे, आपके लिए उतना ही अच्छा रहेगा। साथ ही अपने आसपास पानी जमा न होने दें। अगर उसके आसपास पानी जमा हो जाए तो उसे मिट्टी से भर देना चाहिए। अगर ऐसा करना संभव न हो तो इसमें मिट्टी के तेल की बूंदे मिला लें। मानसून के दौरान खुला पानी न पिएं। पानी को हमेशा ढक कर रखें। रोजाना रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
