Cough Syrup Ban In India: इन दिनों Coldrif नाम के एक कफ सिरप को लेकर बहुत चर्चा है। कई राज्यों में बच्चों की मौतों के बाद इसे बैन किया गया है। यह सिरप आम तौर पर छोटे बच्चों को खांसी और जुकाम होने पर दिया जाता था। लेकिन जांच में इसमें एक जहरीला रसायन जिसे डायइथाइलीन ग्लाइकॉल (diethylene glycol) कहते हैं, पाया गया है। जानकारी के बताती है कि यह रसायन बच्चों के गुर्दे और स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। फिलहाल इस मामले में जांच चल रही है।
कफ सिरप बने मौत का घूंट (फोटो: Istock)
कहां से उठा बवाल
पिछले कुछ दिनों में इस कफ सिरप की वजह से कई बच्चों की मौत की खबरें आई हैं। बताया जा रहा है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में मिलाकर इस सिरप की वजह से 17 बच्चों की जान गई है। इसके बाद से खांसी के सिरप Coldrif पर बैन लगाया गया है। जांच में पाया गया कि इसमें एक जहरीला रसायन 'डायइथाइलीन ग्लाइकॉल (diethylene glycol)' मिला है। DEG एक औद्योगिक रसायन है, जो पेंट और ब्रेक फ्लुइड में इस्तेमाल होता है। यह बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है और उनकी कि़डनी को नुकसान पहुंचा सकता है। जब यह सिरप बच्चों को दी गई तो यह कई मासूम जिंदगियों को लील गई।
DEG क्या होता है, क्यों कंपनियां इसे यूज करती हैं
शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं 'DEG एक औद्योगिक रसायन है, जो असल में एंटीफ्रीज, पेंट, और प्लास्टिक निर्माण में इस्तेमाल होता है। इसे गलती से या सस्ते विकल्प के रूप में ग्लिसरीन या प्रोपाइलीन ग्लाइकोल (जो दवाओं में सुरक्षित होते हैं) की जगह मिलाया जाता है। जब ये बच्चों को दिया जाता है तो उनका शरीर छोटा और नाजुक होने की वजह से इसकी थोड़ी-सी मात्रा भी उनके लिए घातक साबित हो सकती है।'
DEG बच्चों के लिए कैसे नुकसानदेह है
- DEG के सेवन से किडनी फेल हो सकती है। इससे बच्चों में पेशाब बंद हो सकता है या बहुत कम आने लगता है।
- इससे बच्चों के नर्वस सिस्टम पर भी असर होता है। बच्चे सुस्त, बेहोश या भ्रमित हो सकते हैं।
- झटके और कोमा जैसी स्थिति भी देखने में आती है।
- DEG के प्रभाव के चलते लिवर एंजाइम बढ़ जाते हैं और लिवर फेलियर तक हो सकता है।
- वहीं शरीर में टॉक्सिन बढ़ने से सांस फूलना, हांफना या ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।
- DEG के असर के चलते पाचन बुरी तरह प्रभावित होता है। उल्टी, पेट दर्द, दस्त या मतली आम शुरुआती लक्षण हैं।
- DEG की वजह से मृत्यु तक का खतरा होता है।
इंटरनेशनल स्तर भी उठा था खतरा
भारत से पहले भी कई देशों में DEG-युक्त सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। 2022 में गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में ऐसे ही मामले सामने आ चुके हैं। दिसंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच में उज्बेकिस्तान में मिलावटी कफ सिरप पीने की वजह से 20 बच्चों की मौत हुई थी। इंडोनेशिया, कंबोडिया आदि देशो में WHO के मुताबिक 300 बच्चों की मौत हुई थी या वे गंभीर बीमारी का शिकार हुए थे।
कहां रहें सावधान
नोएडा स्थित बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टर निखिल मेहरोत्रा इस मामले में पेरेंट्स को बेहद अलर्ट रहने की सलाह देते हैं। उन्होंने कुछ पॉइंट्स बताए हैं जो बच्चों की नाजुक सेहत से खिलवाड़ नहीं होने देगा -
- बच्चों को केवल भरोसेमंद ब्रांड की दवाएं या सिरप ही दें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई सिरप या टॉनिक न दें।
- दवा की बोतल पर निर्माण कंपनी और बैच नंबर जांचें।
- किसी भी दवा से बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर या अस्पताल जाएं।
- दवा को भी भरोसेमंद दुकान से खरीदें।
बच्चों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। हमें सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध दवा के प्रयोग से बचना चाहिए। अगर आपको लगता है कि किसी दवा में कुछ गड़बड़ है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। साथ ही, दवा की रसीद और पैकेजिंग संभाल कर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर आप उसे दिखा सकें। बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न दें और हमेशा सुरक्षित दवाओं का ही सेवन करें।'
