जिन लोगों को एचआईवी (HIV) की बीमारी है, उन्हें अपनी सेहत का बहुत खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। क्योंकि एचआईवी रोगियों को आए दिन तरह-तरह की समस्याएं परेशान करती हैं। यह वायरस उनकी इम्यूनिटी को पूरी तरह से नष्ट कर देता है। वे किसी भी तरह के संक्रमण, वायरल फ्लू और मौसमी संक्रमण आदि की चपेट में बहुत जल्दी आ जाते हैं और बीमार पड़ जाते हैं। इसके अलावा, HIV रोगियों में हृदय रोगों से जुड़ी समस्याएं भी काफी अधिक देखने को मिलती हैं।
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आपको बता दें कि एचआईवी के मरीजों में 50 से 100 प्रतिशत तक हृदय रोगों का खतरा भी देखने को मिल सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, एचआईवी मरीजों के लिए कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं बहुत लाभकारी हो सकती हैं। इनकी मदद से हृदय रोगों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। हाल ही में हुए एक नई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है। इस लेख में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं....
दिल की बीमारियों का खतरा कैसे कम करती हैं कोलेस्ट्रॉल की दवा
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि स्टैटिन (कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा) का नियमित सेवन करने से प्रमुख हृदय संबंधी समस्याओं और हृदय रोगों के कारण मृत्यु के खतरे को कम किया जा सकता है। साथ ही, इन्हें रोकने में भी मदद मिल सकती है।
एचआईवी से पीड़ित हर 5 में से एक व्यक्ति में दिल की बीमारियों को रोका जा सकता है। नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के निदेशक गैरी एच. गिबन्स का कहना है कि शोध में यह बताया गया है कि स्टैटिन एचआईवी से पीड़ित लोगों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकती है। यह हृदय रोगों के खतरे को कम करने के लिए काफी सस्ता तरीका है।
स्टैनिन दवाएं कैसे काम करती हैं
इन दवाओं का सेवन कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को करने की सलाह दी जाती है। ये ऐसी दवाएं होती हैं, कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकती हैं। इन दवाओं का सेवन करने से उन पदार्थों कों ब्लॉक को कम करने में भी मदद मिलती है, जो कोलेस्ट्रॉल के निर्माण में योगदान देते हैं। यह नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करती हैं। सिर्फ इतना नहीं, इन दवाओं की मदद से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, ब्लॉकेज आदि के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
