शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने पर थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। ऐसे में खानपान पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। आचार्य बालकृष्ण ने अपने वीडियो में कम हीमोग्लोबिन और एनीमिया के संदर्भ में गेहूं के ज्वारे, गिलोय और लौकी के रस का पारंपरिक प्रयोग बताया है। उनके अनुसार, अगर गेहूं का ज्वारा या गिलोय उपलब्ध न हो तो लौकी और सेब से भी रस तैयार किया जा सकता है।
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लौकी आसानी से घरों में मिल जाने वाली सब्जी है, इसलिए आचार्य बालकृष्ण का ये घरेलू नुस्खा कम हिमोग्लोबिन वाले लोगों के लिए काम का हो सकता है। हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है। एनीमिया सिर्फ आयरन की कमी से नहीं होता, इसके पीछे विटामिन बी12 की कमी, लंबे समय से चली आ रही बीमारी या अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए कम हीमोग्लोबिन की वजह जानना सबसे पहले जरूरी है।
पंतजलि वाले आचार्य बालकृष्ण ने बताया
पंतजलि से जुड़े आचार्य बालकृष्ण के बताए पारंपरिक प्रयोग में गेहूं का ज्वारा, गिलोय और लौकी मुख्य सामग्री हैं। उनके अनुसार इन तीनों का रस बनाकर सेवन किया जा सकता है।
लौकी और सेब वाला आसान विकल्प
अगर गेहूं का ज्वारा या गिलोय उपलब्ध नहीं है, तो आचार्य बालकृष्ण ने लौकी और सेब का रस लेने की बात भी कही है। दोनों को साफ करके टुकड़ों में काटें, पानी के साथ पीसें और ताजा रस तैयार करें। स्वाद के लिए थोड़ी मात्रा में नींबू भी मिलाया जा सकता है।
गेहूं के ज्वारे
गेहूं के ज्वारे में क्लोरोफिल, विटामिन, खनिज और दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। कुछ छोटे अध्ययनों में इसके रस के सेवन के बाद हीमोग्लोबिन में बदलाव देखा गया है, लेकिन उपलब्ध शोध अभी इतना मजबूत नहीं है कि इसे एनीमिया का प्रमाणित इलाज माना जाए।गर्भावस्था में एनीमिया
आचार्य बालकृष्ण ने गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से जुड़ी स्थिति में लौकी के पारंपरिक इस्तेमाल का भी उल्लेख किया है। उन्होंने इसे गर्भावस्था में जी मिचलाने और उल्टी जैसा महसूस होने में उपयोगी बताया है। लेकिन गर्भावस्था में एनीमिया को केवल घरेलू नुस्खे से संभालना उचित नहीं है। भारत की चिकित्सकीय गाइडलाइन गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की जांच और जरूरत पड़ने पर आयरन उपचार की सलाह देती है।
थैलेसीमिया में भी जरूरी सावधानी
वीडियो में माइनर थैलेसीमिया के संदर्भ में भी इस प्रयोग की चर्चा की गई है, लेकिन थैलेसीमिया एक अलग प्रकार की रक्त संबंधी स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी जूस या घरेलू उपाय को डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए।
एनीमिया होने पर पहले हीमोग्लोबिन की जांच और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। केवल लौकी, सेब या गेहूं के ज्वारे का रस पीने से हर प्रकार के एनीमिया का इलाज होने की गारंटी नहीं है। खासकर गर्भवती महिलाओं और लगातार कम हीमोग्लोबिन वाले लोगों को उचित जांच और उपचार जरूर लेना चाहिए।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आचार्य बालकृष्ण के वीडियो में बताए गए टिप्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी संबंधित क्रिएटर के व्यक्तिगत विचार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत इन टिप्स या दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।)
