54% Babies in Private Hospitals Are Born Through C-Section: बच्चे का जन्म किसी भी परिवार के लिए सबसे खुशी का पल होता है। हर मां चाहती है कि उसकी डिलीवरी सुरक्षित हो और बच्चा स्वस्थ पैदा हो। पिछले कुछ सालों में भारत में अस्पताल में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है, जो अच्छी बात मानी जाती है। लेकिन इसी बीच राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की रिपोर्ट में एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्राइवेट अस्पतालों में होने वाली 54 फीसदी से ज्यादा डिलीवरी ऑपरेशन यानी सी-सेक्शन (C-Section) से हो रही हैं। आसान भाषा में कहें तो निजी अस्पतालों में पैदा होने वाले हर दो बच्चों में से एक बच्चा ऑपरेशन के जरिए जन्म ले रहा है। यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में यह प्रतिशत काफी कम है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर भारत में ऑपरेशन से डिलीवरी के मामले इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं।
अब नॉर्मल से ज्यादा ऑपरेशन से पैदा क्यों हो रहे बच्चे?
क्या कहती है NFHS-6 रिपोर्ट
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6 Report) के अनुसार, देश में ऑपरेशन से होने वाली डिलीवरी का प्रतिशत पहले के मुकाबले बढ़ा है। रिपोर्ट बताती है कि 2019-21 में जहां 21.5 फीसदी प्रसव ऑपरेशन से हुए थे, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 27.2 फीसदी हो गया। यानी अब पहले से ज्यादा महिलाएं ऑपरेशन के जरिए बच्चे को जन्म दे रही हैं।
प्राइवेट अस्पतालों में सबसे ज्यादा ऑपरेशन
रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा निजी अस्पतालों को लेकर है। आंकड़ों के मुताबिक, प्राइवेट अस्पतालों में 54.1 फीसदी डिलीवरी ऑपरेशन से हुईं। यानी हर दूसरी डिलीवरी में सर्जरी की जरूरत पड़ी। वहीं सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 16.9 फीसदी रहा। दोनों के बीच का यह अंतर लोगों को सोचने पर मजबूर करता है।
शहरों में ज्यादा दिखा यह ट्रेंड
रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में ऑपरेशन से डिलीवरी के मामले गांवों के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। शहरी इलाकों में करीब 40.5 फीसदी डिलीवरी ऑपरेशन से हुईं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 22.8 फीसदी रहा। इसका मतलब है कि शहरों में रहने वाली महिलाओं में C-Section डिलीवरी का चलन ज्यादा देखने को मिल रहा है।
कुछ राज्यों के आंकड़े और भी चौंकाने वाले
NFHS-6 के आंकड़ों में कुछ राज्यों की स्थिति काफी अलग दिखाई देती है। पश्चिम बंगाल के प्राइवेट अस्पतालों में 87.7 फीसदी डिलीवरी ऑपरेशन से हुईं। तेलंगाना में यह आंकड़ा 84 फीसदी और आंध्र प्रदेश में 66 फीसदी दर्ज किया गया। यानी इन राज्यों के कई निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव के मुकाबले ऑपरेशन से डिलीवरी ज्यादा हो रही है।
क्या ऑपरेशन से डिलीवरी हमेशा गलत होती है
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार मां या बच्चे की जान बचाने के लिए डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। अगर गर्भ में बच्चे की स्थिति ठीक नहीं हो, प्रसव के दौरान कोई दिक्कत आ जाए या मां की सेहत को खतरा हो, तो ऑपरेशन जरूरी हो सकता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि जहां सामान्य प्रसव सुरक्षित तरीके से संभव हो, वहां बिना जरूरत ऑपरेशन से बचना चाहिए। इसलिए हर गर्भवती महिला को अपनी स्थिति के बारे में डॉक्टर से खुलकर बात करनी चाहिए।
अस्पताल में डिलीवरी बढ़ना अच्छा मगर बैलेंस जरूरी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश में अस्पतालों में होने वाले डिलीवरी 88.6 फीसदी से बढ़कर 90.6 फीसदी हो गए हैं। इसका मतलब है कि पहले के मुकाबले ज्यादा महिलाएं सुरक्षित माहौल में बच्चे को जन्म दे रही हैं। यह मां और नवजात दोनों के लिए अच्छी खबर है। हालांकि ऑपरेशन से होने वाली डिलीवरी के बढ़ते आंकड़े यह भी बताते हैं कि इस विषय पर लगातार नजर रखने और सही जानकारी लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।
