Ajit Pawar Plan for Maharashtra Election: भारतीय जनता पार्टी और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ये दरार उस वक्त से और बढ़ती नजर आ रही है, जब आएसएसएस से जुड़े एक वीकली न्यूज पेपर ने ऐसा लोकसभा चुनाव में अजित पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से गठबंधन के चलते भाजपा का प्रदर्शन खराब हुआ। अब अजित पवार के हाव भाव ये बयां कर रहे हैं कि दाल में कुछ काला जरूर है।
BJP और NCP के रिश्तों में पड़ रही दरार?
अजित पवार ने खुद दिए NDA में दरार के संकेत
महाराष्ट्र की सियासत में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि सत्तारूढ़ महायुति का भविष्य कैसा होगा... क्या भाजपा, एनसीपी और शिवसेना का साथ बरकरार रहेगा या ये गठबंधन चुनाव से पहले ही बिखर जाएगा? दरअसल, अजित पवार ने कहा है कि महायुति के घटक दल स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। यहां ये समझने कि जरूरत है कि आखिर उन्हें ऐसा क्यों कहना पड़ गया? आपको समझाते हैं उनके बयान के मायने और इसकी वजह क्या हो सकती है।
महाराष्ट्र में क्या होगा?
विधानसभा चुनाव से पहले इस ऐलान का असर?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को कहा कि उनके नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) सहित महायुति के घटक दल स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। जाहिर है कि उनके इस बयान से महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन की एकता पर सवाल उठेंगे। अजित पवार ने पिंपरी चिंचवाड़ शहर में राकांपा के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्र चुनाव लड़ने से कार्यकर्ताओं को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, 'भले ही हम लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ते हैं, लेकिन महायुति के सदस्य स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं।' हालांकि विधानसभा चुनाव में भी भाजपा और एनसीपी का साथ बरकरार रहेगा, इस पर संशय बरकरार है।
महाराष्ट्र की सियासत का सिकंदर कौन?
स्थानीय निकाय चुनाव के तहत नगर पालिका परिषदों, नगर पंचायतों और जिला परिषदों के चुनाव कराए जाते हैं, हालांकि अभी तक चुनाव की तारीख तय नहीं की गई है। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा शामिल हैं।
क्या विधानसभा चुनाव से पहले टूट जाएगा गठबंधन?
महाराष्ट्र की सियासत कब किस ओर करवट लेगी, इसकी भविष्यवाणी कर पाना बड़े से बड़े सियासी दिग्गजों के वश की बात नहीं है। यही वजह है कि अब ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या अजित पवार की पार्टी का नाता एनडीए से टूट जाएगा? ऐसा लंबे समय से कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र की 48 सीटों पर हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन के पीछे खुद बीजेपी की गलती है। ऐसा कहा जाता रहा है कि अजित पवार की राकांपा से गठबंधन करने के चलते भाजपा को हार झेलनी पड़ी है, खुद आरएसएस के साप्ताहिक समाचार पत्र ने भी ऐसा दावा ही किया। तो क्या आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा 'एकला चलो रे...' के सिद्धांत पर आगे बढ़ेगी? ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
