ईरान में एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी 28 और 29 दिसंबर को सड़कों पर उतर आए। खुद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को अपनी सरकार से अपील करनी पड़ी। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों की वैध मांगों को सुनने की अपील की । पूरे ईरान में फैले इन विरोध प्रदर्शनों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। इस उथल-पुथल के बीच, ईरान के केंद्रीय बैंक के प्रमुख ने कथित तौर पर इस्तीफा भी दे दिया है, जिसने संकट को और गहरा दिया। आखिर क्या है वजह है जिसने ईरान में फिर विरोध प्रदर्शन की आग फिर से भड़का दी है। प्रदर्शनकारियों की क्या मांगें हैं और किस तरह ईरान इस नए संकट से निपटने की कोशिश में है, विस्तार से जानते हैं।
ईरान में क्यों भड़क उठे विरोध प्रदर्शन?
रविवार को तेहरान के जोम्हूरी इलाके में दो प्रमुख मोबाइल फोन शॉपिंग सेंटरों के पास व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। राजधानी के मुख्य ग्रैंड बाजार के आसपास भी विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। सोमवार को भी विरोध प्रदर्शन हुए। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, व्यापारियों और दुकानदारों ने तेहरान के डाउनटाउन में सादी स्ट्रीट और राजधानी के मुख्य ग्रैंड बाज़ार के पास शुश इलाके में मार्च किया। ये प्रदर्शन ईरान की मुद्रा के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने और देश के केंद्रीय बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजन के कथित तौर पर इस्तीफे के बाद हुए। प्रदर्शनकारियों को शांत करने के प्रयास में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मंगलवार को कहा कि लोगों की आजीविका उनकी रोजमर्रा की चिंता है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों को वैध बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ईरान के गृह मंत्री को प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के जरिए उनकी वैध मांगों को सुनने का निर्देश दिया है, ताकि सरकार समस्याओं को हल करने और जिम्मेदारी से जवाब देने के लिए पूरी ताकत से काम कर सके।
खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू गईं
ईरान के कई शहरों में सोमवार को विरोध प्रदर्शन हुए, हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरानी सरकारी मीडिया का हवाला देते हुए बताया कि रविवार और सोमवार दोनों दिन विरोध प्रदर्शन हुए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण ईरानी अर्थव्यवस्था को लगे झटके से विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। खुले बाजार दरों की निगरानी करने वाली वेबसाइटों के अनुसार, देश की मुद्रा, रियाल सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 1,390,000 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। इसी ने लोगों को बुरी तरह भड़का दिया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 9 करोड़ लोगों की आबादी वाले ईरान में रियाल की गिरती दर के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू गईं। ईरान की खराब आर्थिक स्थिति के बीच जब लोग सड़कों पर उतरे, तो ऑनलाइन सामने आए कई फुटेज में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प दिखाई दे रही थी। स्थानीय मीडिया ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कई गिरफ्तारियां हुईं।
ईरान में विरोध-प्रदर्शन का नया दौर
ईरान में आर्थिक संकट क्यों?
ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब देश भीषण मुद्रास्फीति और राष्ट्रीय मुद्रा के पतन से जूझ रहा है। अमेरिकी और पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए प्रतिबंध लंबे समय से असर दिखा रहे थे, लेकिन अब हालात पूरी तरह बिगड़ गए हैं। राज्य सांख्यिकी केंद्र के अनुसार, दिसंबर में मुद्रास्फीति 42.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो नवंबर से 1.8 प्रतिशत अंक अधिक है। खाद्य पदार्थों की कीमतें 72 प्रतिशत बढ़ीं, और स्वास्थ्य व चिकित्सा सामग्री की कीमतों में पिछले साल दिसंबर की तुलना में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। ईरान की आर्थिक परेशानियां तब और बढ़ गईं जब पिछले सप्ताहांत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उसकी मुद्रा रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रविवार को अनौपचारिक बाजार में अमेरिकी डॉलर लगभग 1.42 मिलियन रियाल पर कारोबार कर रहा था, जबकि एक साल पहले यह 820,000 रियाल था। सोमवार को ईरान का रियाल 1.38 मिलियन रियाल प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था। ईरान की प्रमुख सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, मोबाइल फोन विक्रेता नाराज थे क्योंकि रियाल के भीषण अवमूल्यन के कारण उनका कारोबार खतरे में था।
ईरान सरकार क्या कर रही है?
ईरान सरकार ने आर्थिक संकट से निपटने का वादा किया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा, लोगों की आजीविका मेरी दैनिक चिंता है। सरकार ने मौद्रिक और बैंकिंग प्रणाली में सुधार करने और लोगों की क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं। पेजेश्कियन ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के जरिए उनकी जायज़ मांगों को सुनने का भी अनुरोध किया है। अपनी सरकार के विवादास्पद बजट विधेयक का बचाव करते हुए, जिसमें वेतन में 20 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव है जबकि मुद्रास्फीति लगभग 50 प्रतिशत है, ईरान के राष्ट्रपति ने मुद्रास्फीति और महंगाई से लड़ने का संकल्प लिया। हालांकि इस महंगाई और गिरती मुद्रा को काबू करने का संभावना दूर-दूर तक नहीं दिख रही है।
