Marco Rubio’s Kolkata Visit: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। उनका यह दौरा 23 से 26 मई तक है। खास बात यह है कि ट्रंप प्रशासन में यह अहम जिम्मेदारी संभालने के बाद रूबियो की यह पहली भारत यात्रा है। अपनी इस दौरे में वह कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली की यात्रा करेंगे। रूबियो के इस दौरे के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थॉमस पिगॉट ने कहा कि अपनी भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे और उनके साथ ऊर्जा सुरक्षा, कारोबार और रक्षा सहयोग पर चर्चा करेंगे। साथ ही रूबियो की प्रस्तावित कोलकाता यात्रा ने लोगों का ध्यान खींचा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बीते एक दशक में कोलकाता की यात्रा पर जाने वाले वह अमेरिका के पहले विदेश मंत्री होंगे।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो
इसलिए खास है रूबियो की कोलकाता यात्रा
रूबियो की कोलकाता यात्रा अमेरिका के लिए काफी अहमियत रखती है क्योंकि यह शहर अमेरिकी कूटनीति में विशेष स्थान रखता है। दरअसल, अमेरिका के जितने भी पुराने महावाणिज्य दूतावास हैं, उनमें से एक कोलकाता में है। कोलकाता में यह अमेरिका का सबसे पुराना महावाणिज्य दूतावास भी है। अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने बेंजामिन जॉय को 19 नवंबर 1792 को कोलकाता स्थित अपने इस महावाणिज्य दूतावास का पहला राजदूत नियुक्त किया लेकिन जॉय अपनी नियुक्ति के तुरंत बाद कोलकाता नहीं आ पाए। बाद में अप्रैल 1794 में जॉय कोलकाता पहुंचे। खास बात यह है कि भारत जो उस समय इस्ट इंडिया कंपनी के अधीन था, उसने कभी जॉय को आधिकारिक मान्यता नहीं दी। हालांकि, जॉय की इस नियुक्ति ने कोलकाता और भारत के साथ संपर्क का एक आधिकारिक चैनल शुरू किया।
भारत के 11 राज्यों पर नजर रखता है
कोलकाता के हो ची मिह्न स्ट्रीट पर स्थित यह महावाणिज्य दूतावास भारत के 11 राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में अमेरिकी हितों की सुरक्षा एवं निगरानी करता है। रूबियो मई 2012 के बाद कोलकाता का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी विदेश मंत्री होंगे। इससे पहले मई 2012 में हिलेरी क्लिंटन ने शहर का दौरा किया था और उस समय पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी।
अपने समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है कोलकाता
जुलाई 2016 में अमेरिका के तत्कालीन अंडर-सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पॉलिटिकल अफेयर्स थॉमस ए शैनन जूनियर भी कोलकाता आए थे और उन्होंने ममता बनर्जी के साथ बातचीत की थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शैनन ने कोलकाता को चुनने की वजह बताते हुए कहा था कि यह शहर अपने समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है और भारत में अमेरिका के सबसे पुराने वाणिज्य दूतावासों में से एक यहां स्थित है। उन्होंने कहा था, 'कोलकाता में हमारी सबसे पुरानी मौजूदगी रही है। भारत ने अपनी सामाजिक जटिलताओं और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वह अद्भुत हैं। भारत एक महान और विशाल लोकतंत्र है। हम भारत के साथ विभिन्न मुद्दों पर अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं और यहां के अनुभवों से सीखना भी चाहते हैं।'
क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में होंगे शामिल
अपने चार दिवसीय भारत दौरे के दौरान मार्को रूबियो के क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने की संभावना है। भारत अगले सप्ताह क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर सकता है। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के अनुसार, रूबियो अपने 'भारत के पहले दौरे', क्वाड मंत्रीस्तरीय बैठकों और उच्चस्तरीय वार्ताओं में भाग लेंगे। साथ ही वे अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के समारोह में भी शामिल हो सकते हैं। 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली संभावित बैठक में ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेन्नी वांग और जापान के विदेश मंत्री तोशीमित्सू मोटेगी के शामिल होने की संभावना है। बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे।
वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा हो सकती है
बैठक में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के प्रभाव समेत कई वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा हो सकती है। रूबियो के दौरे का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि यदि आने वाले दिनों में ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे तेल की कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ा है। रूबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वॉशिंगटन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी साझेदारियों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्वाड जैसे मंचों के जरिए क्षेत्रीय समन्वय पर भी चर्चा कर सकते हैं।
व्यापार वार्ता पर भी हो सकती है बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता भी इस दौरे का अहम मुद्दा हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर पहले पैदा हुए मतभेदों के बाद हाल के महीनों में बातचीत में फिर तेजी आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग साझेदारी, टेक्नोलॉजी सहयोग और निवेश के अवसरों समेत कई अहम विषयों पर चर्चा कर सकते हैं।
