महाराष्ट्र में 'सामान्य' बारिश के बावजूद सूखा घोषित क्यों? जानें कहां बिगड़ा मानसून का मिजाज

महाराष्ट्र में 18% बारिश की कमी के बावजूद IMD मानक के अनुसार मानसून को ‘सामान्य’ माना गया है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 74% क्षेत्रों में सूखा घोषित किया है। आइए जानते हैं कि इस विरोधाभास के पीछे की वजह आखिर क्या है?

महाराष्ट्र में इस बार मानसून की बारिश का कुल आंकड़ा भले ही ‘सामान्य’ श्रेणी में आता हो, लेकिन राज्य के बड़े हिस्से में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। यानी करीब 74 फीसदी प्रशासनिक क्षेत्र अब सूखा राहत उपायों के दायरे में हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बारिश को सामान्य माना जा रहा है तो महाराष्ट्र में सूखा घोषित करने की क्यों जरूरत पड़ी?

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महाराष्ट्र में 74 फीसदी क्षेत्रों में सूखा (सांकेतिक फोटो)

पहले समझिए ‘सामान्य’ बारिश का गणित

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) बारिश को उसके दीर्घकालिक औसत के मुकाबले मापता है। -19 फीसदी से +19 फीसदी के बीच बारिश होने पर यह ‘सामान्य’ श्रेणी में आती है। महाराष्ट्र में 1 जून से 25 सितंबर के बीच बारिश सामान्य से 18% कम रही। इसलिए पूरे राज्य में बारिश का आंकड़ा IMD के पैमाने पर अभी भी ‘सामान्य’ माना गया। लेकिन यही आंकड़ा पूरे राज्य की जमीनी हालत नहीं बताता। महाराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा और कई इलाकों में लंबे समय तक बारिश पर ब्रेक लगा रहा।

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