ईरान पर हमले से क्यों बार-बार पीछे हट रहे ट्रंप, रूस-चीन ने कैसे बदल दिया पश्चिम एशिया में टकराव का पूरा खेल?

ट्रंप की धमकियों के बीच दिलचस्प बात यह है कि आठ अप्रैल के बाद करीब 41 दिनों में 26 बार ईरान को धमकाने वाले ट्रंप अब तक निर्णायक हमला नहीं कर पाए हैं। अमेरिका कई बार हमले की तैयारी की बात करता है, लेकिन आखिरी समय में पीछे हट जाता है। दरअसल, पर्दे के पीछे रहकर चीन और रूस ने ईरान के लिए ऐसी ढाल तैयार की है, जिसे भेद पाने में ट्रंप हाल-फिलहाल असमर्थ से दिखते हैं।

28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले से पश्चिम एशिया में शुरू हुई जंग की आग अभी तक बुझी नहीं है। इस हमले के बाद मध्य पूर्व वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर उसने परमाणु कार्यक्रम नहीं रोका,तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि ट्रंप की धमकियों के बीच दिलचस्प बात यह है कि आठ अप्रैल के बाद करीब 41 दिनों में 26 बार ईरान को धमकाने वाले ट्रंप अब तक निर्णायक हमला नहीं कर पाए हैं। अमेरिका कई बार हमले की तैयारी की बात करता है, लेकिन आखिरी समय में पीछे हट जाता है।

ईरान पर हमले से पीछे क्यों हट रहे ट्रंप?

ईरान पर हमले से पीछे क्यों हट रहे ट्रंप?

पहली नजर में इसकी वजह कूटनीति,खाड़ी देशों का दबाव या तेल बाजार की चिंता लग सकती है,लेकिन इसकी असली तस्वीर कुछ और ही कहती है। दरअसल, पर्दे के पीछे रहकर चीन और रूस ने ईरान के लिए ऐसी ढाल तैयार की है, जिसे भेद पाने में ट्रंप हाल-फिलहाल असमर्थ से दिखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में ईरान ने रूस और चीन की मदद से अपनी सैन्य क्षमता को उस स्तर तक मजबूत कर लिया है,जहां अमेरिका को भी संभावित युद्ध की कीमत भारी दिखाई देने लगी है।

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