बांग्लादेश डिपोर्ट की गई 'गर्भवती महिला' को अब भारत लौटने की इजाजत क्यों मिली? क्या कहता है भारत का 'निर्वासन कानून'
सुप्रीम कोर्ट ने एक गर्भवती महिला को बांग्लादेश से भारत लौटने की इजाजत दे दी है। सुनाली खातून को उनके 8 साल के बेटे के साथ अवैध इमिग्रेंट होने के शक में बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया गया था। जानें क्या है यह पूरा मामला...
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- Updated Dec 4, 2025, 02:40 PM IST
भारत में एक अलग तरह का मामला सामने आया है। 3 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर बांग्लादेश भेजी गई गर्भवती महिला और उसके बच्चे को वापस लाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह नौ महीने की गर्भवती सुनाली खातून और उसके 8 साल के बच्चे को बांग्लादेश से वापस लाए। कोर्ट ने कहा कि कानून को कभी-कभी इंसानियत के आगे झुकना होता है।वहीं केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह बांग्लादेश डिपोर्ट की गई गर्भवती महिला सोनाली खातून को उसके 8 साल के बेटे के साथ वापस भारत लाएगा और उन्हें सर्विलांस में रखते हुए मेडिकल हेल्प दी जाएगी। सॉलिसिटर जनरल कहा कि यह पूरी तरह से इंसानियत के आधार पर किया जा रहा है। वह महिला बांग्लादेशी है लेकिन भारत मे वह बीरभूम में रह रही थी।
यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए परिवार को वापस भारत लाने की मांग की गई थी। वहीं सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कोर्ट से आग्रह किया कि सोनाली के पति सहित अन्य लोग भी बांग्लादेश में हैं और उन्हें भारत वापस लाने की जरूरत है।
जान लें क्या है सुनाली खातून से जुड़ा यह मामला
सुनाली खातून और उसका परिवार, जो पश्चिम बंगाल से आए प्रवासी मजदूर हैं, करीब 20 सालों से दिल्ली में कूड़ा बीनने का काम कर रहे थे, जब जून 2025 में दिल्ली पुलिस ने उन्हें कथित अवैध कामों के खिलाफ कार्रवाई के तहत उठाया था। दिल्ली में हिरासत में लिया गया, असम ले जाया गया, बॉर्डर पर एक रात बिताने के बाद बांग्लादेश भेज दिया गया। लौटने की कोशिश करते हुए उसे पकड़ा गया, और बांग्लादेश की चपैनवाबगंज में जेल में डाल दिया गया। वहीं सुनाली के पिता का दावा था कि परिवार पिछले करीब बीस साल से पश्चिम बंगाल और दिल्ली में रह रहा है और सभी भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने इसी के आधार पर कलकत्ता हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर कर दी थी।
सुनाली खातून की इच्छा- 'अपने बच्चे को भारत में जन्म देना'
सुनाली और उसका परिवार, जो पश्चिम बंगाल से आए प्रवासी मजदूर हैं, और काफी समय से दिल्ली में कूड़ा बीनने का काम कर रहे थे। करीब
25 साल की सुनाली खातून के लिए बीते 5 महीने जिंदगी से भी लंबे रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिकर खातून, जो अब नौ महीने की प्रेग्नेंट हैं और अभी भी बांग्लादेश में फंसी हुई हैं, ने कहा कि वह बस एक ही चीज चाहती हैं कि 'अपने बच्चे को भारत में जन्म देना...'। अब सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर बांग्लादेश भेजी गई गर्भवती महिला और उसके बच्चे को वापस लाने का निर्देश दिया है।
इन कानूनों के तहत निर्वासित किया जाता है
भारत में अवैध प्रवासियों को विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939, पासपोर्ट अधिनियम, 1967, और नागरिकता अधिनियम, 1955 जैसे कानूनों के तहत निर्वासित किया जाता है। यह प्रक्रिया आम तौर पर संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र सरकार द्वारा संचालित होती है, जिसमें आव्रजन ब्यूरो जैसे निकाय अवैध प्रवासियों की पहचान करते हैं और उन्हें हिरासत में लेने और वापस भेजने की कार्रवाई करते हैं।
कानूनी आधार-विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939: यह अधिनियम विदेशियों के पंजीकरण और उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।
पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और नागरिकता अधिनियम, 1955: ये अधिनियम देश में अवैध प्रवेश और निवास से संबंधित प्रावधानों को नियंत्रित करते हैं और उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान करते हैं।
इस तरह से होती है निर्वासित करने की प्रक्रिया (Deportation Procedures)
पहचान और निगरानी:- आव्रजन ब्यूरो और अन्य सरकारी एजेंसियां अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए होटलों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे स्थानों की निगरानी करती हैं।
हिरासत:- एक बार जब किसी व्यक्ति की अवैध प्रवासी के रूप में पहचान हो जाती है, तो उसे निर्वासित करने की प्रक्रिया के तहत एक हिरासत केंद्र (Detention Centre) में रखा जाता है।
आखिर में निर्वासन:- प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संबंधित देश के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें वापस भेज दिया जाता है।
Immigration And Foreigner Act 2025 1 सितंबर से लागू
बता दें कि इमिग्रेशन एंड फारेनर एक्ट 2025 के नियम 1 सितंबर से लागू हो गए हैं। अप्रैल 2025 में यह बिल संसद में पारित हुआ था। इस बिल के तहत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को विदेशी नागरिकों की भारत में स्क्रूटनी और उन पर कार्रवाई के कानूनी अधिकार दिए गए हैं। अवैध तरीके से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों पर लगाम कसने का नियम लागू हो गया है। गृह मंत्रालय ने एक सितंबर को नोटिफिकेशन जारी करते हुए ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को इन नियमों से और सशक्त बनाया है। इमिग्रेशन एंड फारेनर एक्ट 2025 के नियम 1 सितंबर से लागू हो गए हैं। अप्रैल 2025 में यह बिल संसद में पारित हुआ था। इस बिल के तहत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को विदेशी नागरिकों की भारत में स्क्रूटनी और उन पर कार्रवाई के कानूनी अधिकार दिए गए हैं।
विदेशी नागरिकों को तुरंत डिपोर्ट करने का अधिकार
इस बिल के तहत नियमों का उल्लंघन कर भारत में आए विदेशी नागरिकों को तुरंत डिपोर्ट करने के लिए ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के पास संवैधानिक अधिकार होगा और वह संबंधित राज्यों से कोआर्डिनेट करेगा। यही नहीं इन नियमों के तहत अवैध तरीके से जिस संस्थान में चाहे वह होटल हो शिक्षण संस्थान हो या फिर और कुछ भी, वहां विदेशी नागरिकों की आवाजाही हो तत्काल प्रभाव से उसका रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जाएगा।
