Who is Nila Vikhe Patil: भारतीय मूल की 41 वर्षीय नीला विखे पाटिल (Nila Vikhe Patil) ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत और महाराष्ट्र का परचम लहराया है। हाल ही में हुए स्वीडन के आम चुनावों में नीला विखे पाटिल स्वीडन की संसद (रिक्सडाग - Riksdag) के लिए सांसद (MP) चुनी गई हैं। उन्होंने राजधानी स्टॉकहोम सिटी (Stockholm City) निर्वाचन क्षेत्र से ग्रीन पार्टी (Green Party) के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की है। 13 सितंबर को हुए मतदान के बाद स्वीडिश चुनाव प्राधिकरण द्वारा घोषित परिणामों में 349 सीटों वाली संसद में विपक्षी गठबंधन (वामपंथी और ग्रीन पार्टी ब्लॉक) को 176 सीटों के साथ मामूली बहुमत हासिल हुआ है, जिससे नीला विखे पाटिल की जीत का रास्ता साफ हुआ।
नीला विखे पाटिल की कामयाबी का सफर
किस भारतीय सियासी घराने से जुड़ी हैं नीला?
नीला विखे पाटिल का संबंध महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली, सम्मानित और ऐतिहासिक राजनीतिक व सहकारिता घराने से है। परदादा विठ्ठलराव विखे पाटिल पद्म श्री सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने एशिया की पहली सफल सहकारी चीनी मिल की स्थापना कर महाराष्ट्र में सहकारिता आंदोलन की नींव रखी थी। दादाजी स्व. बालासाहेब विखे पाटिल भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री और कद्दावर कांग्रेस/शिवसेना नेता रहे, जिन्होंने कई दशकों तक क्षेत्र की राजनीति पर अपनी छाप छोड़ी। पिता अशोक विखे पाटिल महाराष्ट्र के प्रमुख शिक्षाविद और 'विखे पाटिल फाउंडेशन' के अध्यक्ष हैं, जो राज्य भर में स्कूलों और कॉलेजों की श्रृंखला संचालित करते हैं। चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री हैं।
- नीला का जन्म स्वीडन में हुआ था, लेकिन उनका बचपन महाराष्ट्र के अहमदनगर (अहिल्यानगर) में बीता
- वे महाराष्ट्र के प्रसिद्ध विखे पाटिल परिवार से ताल्लुक रखती हैं
- उनके परदादा विट्ठलराव विखे पाटिल थे, जिन्होंने एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी
- उनके दादा बालासाहेब विखे पाटिल पूर्व केंद्रीय मंत्री थे
- उनके पिता अशोक विखे पाटिल विखे पाटिल फाउंडेशन के अध्यक्ष और शिक्षाविद हैं
- महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल उनके चाचा हैं
स्वीडन पीएमओ में रह चुकी हैं सलाहकार
हालांकि नीला का जन्म स्वीडन में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने जीवन का शुरुआती दौर महाराष्ट्र के अहमदनगर (प्रवरानगर) में बिताया और अपनी भारतीय जड़ों से उनका गहरा जुड़ाव रहा। स्वीडिश राजनीति में नीला पिछले लगभग 25 वर्षों से सक्रिय हैं और उन्होंने एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने स्वीडन की 'गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस' से इकोनॉमिक्स व लॉ में स्नातक और एमबीए किया है। इसके अलावा उन्होंने स्पेन की 'यूनिवर्सिटी डी कॉम्प्लूटेंस' (माड्रिड) से भी पढ़ाई की है।
PMO में राजनीतिक सलाहकार
वे स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री स्टेफन लोफवेन (Stefan Löfven) के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राजनीतिक सलाहकार रह चुकी हैं। वहां उन्होंने वित्त, कराधान, आवास और जेंडर पॉलिसी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की नीतियां बनाने में योगदान दिया। वे स्टॉकहोम सिटी काउंसिल की सदस्य होने के साथ-साथ ग्रीन पार्टी की युवा विंग और राज्य समिति में कई प्रमुख पदों पर कार्य कर चुकी हैं। वे पैसे से एक अधिकृत पब्लिक अकाउंटेंट भी हैं और 'PwC' जैसी वैश्विक फर्म में कार्यरत रही हैं।
दादा को भावुक होकर याद किया
संसद में चुने जाने के बाद मीडिया से बात करते हुए नीला ने अपने दादाजी स्व. बालासाहेब विखे पाटिल को भावुक होकर याद किया। उन्होंने कहा, जब मैं महज 15 साल की थी, तब मेरे दादाजी मुझसे महाराष्ट्र का राज्य बजट पढ़वाया करते थे और उस पर चर्चा करते थे। उन्होंने ही मुझमें जनसेवा और राजनीति की समझ विकसित की। मुझे उम्मीद है कि संसद में रहकर मैं उनका नाम रोशन कर पाऊंगी। नीला ने यह भी बताया कि वे स्वीडन में रहने के बावजूद भारत को दिल से प्यार करती हैं और उनकी भारतीय संस्कृतियों और दोस्तों से गहरी आत्मीयता बनी हुई है।
संसद में प्राथमिकताएं: बच्चे और पर्यावरण
349 सदस्यीय रिक्सडाग में अपनी नई भूमिका पर बोलते हुए नीला विखे पाटिल ने कहा कि वे मुख्य रूप से बच्चों के कल्याण, सामाजिक समानता और जलवायु परिवर्तन/पर्यावरण संरक्षण पर काम करेंगी। उन्होंने कहा कि मैं उन लोगों की आवाज बनना चाहती हूं जो वोट नहीं दे सकते (बच्चे और वंचित वर्ग)। मेरा लक्ष्य एक ऐसा समाज बनाना है जहां हर बच्चे को बेहतर भविष्य और स्वच्छ पर्यावरण मिले।
