India-Bangladesh Relation : भारत और बांग्लादेश के रिश्ते शेख हसीना सरकार की तख्तापलट के बाद से ही तल्ख हो गए। बीच-बीच में बांग्लादेश के नेता अपने भारत विरोधी बयानों से द्विपक्षीय संबंधों को पटरी से उतारते आए हैं। इस कड़ी में अब ताजा नाम हसनत अब्दुल्ला का जुड़ गया है। हसनत बांग्लादेश के नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता हैं। पूर्वोत्तर भारत पर उनके भड़काऊ एवं आपत्तिजनक बयान पर भारत में प्रतिक्रिया हो रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने हसनत के बयान पर पलटवार और उन पर तीखा हमला किया है। इस बीच, राजधानी ढाका सहित बांग्लादेश में स्थित अपने अन्य उच्चायोगों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली ने बुधवार को बांग्लादेश के राजदूत को तलब किया और उनसे सुरक्षा चिंता जाहिर की। कहने का मतलब है कि बांग्लादेशी नेताओं के बयान से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते में कड़वाहट एक बार फिर तेज हो रही है।
हसनत ने क्या कहा
हसनत अब्दुल्ला ने बीते दिनों धमकी देते हुए कहा कि बांग्लादेश यदि अस्थिर हुआ तो वह भारत से पूर्वोत्तर (सेवेन सिस्टर्स) को अलग कर देंगे और इन सात राज्यों के अलगाववादियों को अपने यहां शरण देंगे। भारत के पूर्वोत्तर के ये सात राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, मनिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा हैं। इनमें से पांच राज्यों असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम की लंबी सीमा बांग्लादेश के साथ लगती है। रिपोर्टों के मुताबिक हसनत ने बीते सोमवार को कहा, 'बांग्लादेश यदि अस्थिर हुआ तो प्रतिरोध की आग सीमा से परे जाएगी। चूंकि आप हमें अस्थिर करने वालों को अपने यहां पाल रहे हैं तो हम भी सेवेन सिस्टर्स के अलगाववादियों को अपने यहां शरण देंगे। मैं भारत से स्पष्ट रूप से कहना चाहूंगा कि बांग्लादेश की संप्रभुता, उसके मतदान के अधिकार एवं मानवाधिकार का सम्मान नहीं करने वालों को यदि आप शरण देंगे तो बांग्लादेश प्रतिक्रिया देगा।'
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हम बांग्लादेश में प्रतिरोध रैलियां निकालेंगे-हसनत
दरअसल, हसनत ने ये भड़काऊ भाषण ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में दिया। यहां पर हसीना विरोधी मंच इंकलाब मंच ने सर्वदलीय विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। बांग्लादेश विजय दिवस के मौके पर 'कथित भारतीय दखल' के खिलाफ एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने राष्ट्रव्यापी रैली का आह्वान किया था। बांग्लादेश 1971 में अस्तित्व में आया। इससे पहले बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान था। हसनत ने आगे कहा, 'कल विजय दिवस है। इस मौके पर हम सड़कों पर जश्न नहीं मनाएंगे बल्कि ढाका और बांग्लादेश में भारत के दखल एवं साजिश करने वालों के खिलाफ प्रतिरोध रैलियां निकालेंगे।'
असम के सीएम सरमा ने बांग्लादेश को चेताया
पूर्वोत्तर राज्यों पर हसनत के इस भड़काऊ बयान पर भारत से प्रतिक्रिया आनी ही थी। हसनत पर हमला बोलने वालों में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा सबसे आगे रहे। ढाका और हसनत को चेतावनी देने में सरमा ने देरी नहीं की। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश के नेता यदि पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की धमकी देने यदि जारी रखे तो नई दिल्ली चुप नहीं रहेगी। पत्रकारों के साथ बातचीत में सरमा ने कहा कि 'बीते एक साल से यह देखने में आ रहा है कि बांग्लादेश के नेता भारत को लेकर ऊल-जुलूल बयान दे रहे हैं। ये पूर्वोत्तर को बांग्लादेश के साथ मिलाने की बात कह रहे हैं। बांग्लादेश के लिए ऐसा सोचना भी गलत है।' भारत की विशालता, परमाणु ताकत एवं दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि 'बांग्लादेश के लोगों की मानसिकता ठीक नहीं है। हमें इस देश की मदद नहीं करनी चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि भारत के खिलाफ यदि इस तरह की बयानबाजी चलती रही तो हम चुप नहीं रहेंगे।'
बांग्लादेश के दूत को तलब किया गया
विदेश मंत्रालय (MEA) ने ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच बांग्लादेश के भारत में उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह को तलब किया। यह कदम ढाका में भारतीय मिशन के बाहर पिछले कुछ दिनों से हो रहे प्रदर्शनों के बाद उठाया गया।
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MEA ने एक बयान में कहा, 'बांग्लादेश के भारत में उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को आज विदेश मंत्रालय द्वारा तलब किया गया और उन्हें बांग्लादेश में बिगड़ते सुरक्षा माहौल को लेकर भारत की गहरी चिंताओं से अवगत कराया गया। विशेष रूप से, उनका ध्यान कुछ चरमपंथी तत्वों की गतिविधियों की ओर दिलाया गया है, जिन्होंने ढाका में भारतीय मिशन के आसपास सुरक्षा स्थिति पैदा करने की योजनाओं की घोषणा की है।'
भारत ने बांग्लादेश के झूठे नरेटिव को खारिज किया
MEA ने आगे कहा, 'भारत बांग्लादेश में हाल की कुछ घटनाओं को लेकर चरमपंथी तत्वों द्वारा गढ़े जा रहे झूठे नैरेटिव को पूरी तरह खारिज करता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंतरिम सरकार ने न तो इन घटनाओं की गहन जांच की है और न ही भारत के साथ कोई ठोस सबूत साझा किए हैं।' दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव उस समय बढ़ गया जब पिछले सप्ताह ढाका में आगामी संसदीय चुनावों के एक उम्मीदवार शरीफ उस्मान हादी पर हत्या का प्रयास किया गया। इसके बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया और नई दिल्ली से आग्रह किया कि यदि संदिग्ध भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हों तो उन्हें गिरफ्तार कर बांग्लादेश को सौंपा जाए। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया। MEA ने कहा कि वह इस दावे को 'स्पष्ट रूप से खारिज करता है' कि भारतीय क्षेत्र का इस्तेमाल बांग्लादेश के हितों के खिलाफ गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि नई दिल्ली ने कभी ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी है।
बांग्लादेश में छिपते रहे हैं अलगाववादी समूह
अब्दुल्ला के भड़काऊ बयानों ने भारत के पूर्वोत्तर में विद्रोह से जुड़े मामलों में ढाका की पिछली भूमिका की यादें ताजा कर दी हैं। भारत को लंबे समय से संदेह रहा है कि पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी और अलगाववादी समूहों ने बांग्लादेश को सुरक्षित पनाहगाह, आवागमन मार्ग और लॉजिस्टिक आधार के रूप में इस्तेमाल किया, खासकर 1990 के दशक के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों में। रिपोर्टों के अनुसार, उग्रवादी अक्सर भारतीय सुरक्षा बलों से बचने के लिए सीमा पार करते थे, बांग्लादेश में फिर से संगठित होते थे और बाद में भारत में हमले करने के लिए लौट आते थे। त्रिपुरा में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (ATTF) जैसे अलगाववादी समूहों को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश में स्थित शिविरों और हैंडलरों से जोड़ा था।
