क्या था रुबैया सईद अपहरण कांड? (PTI)
साल 1989 में तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण कांड ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं। ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अपहरण कांड का प्रमुख आरोपी शफात अहमद शांगलू 35 साल बाद सीबीआई की गिरफ्त में आया है। तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का 1989 में उनके घर से मुश्किल से आधा किलोमीटर दूर अपहरण कर लिया गया था। इस अपहरण कांड ने देश में खूब सुर्खियां बटोरी थी और तत्कालीन वीपी सिंह सरकार भी बेबस नजर आने लगी थी। पांच दिन बाद केंद्र की तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने पांच आतंकवादियों को रिहा कर दिया, और उसके बाद ही आतंकवादियों ने रुबैया को रिहा किया था। आखिर कैसे हुआ शांगलू गिरफ्तार और क्या था रुबैया सईद अपहरण कांड, विस्तार से जानते हैं।
इस घटना के 35 साल बाद, सोमवार को, अपहरण मामले में भगोड़ा घोषित शफात अहमद शांगलू को सीबीआई ने श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया। शांगलू पर जेकेएलएफ की साजिश का हिस्सा होने का आरोप है। शांगलू को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक का करीबी माना जाता है। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम भी था। शफात अहमद शांगलू ने यासीन मलिक और अन्य के साथ मिलकर अपहरण की घटना को अंजाम दिया था। सीबीआई ने एक बयान में कहा कि शांगलू को जम्मू की टाडा अदालत में पेश किया जाएगा। शांगलू जेकेएलएफ का एक पदाधिकारी था। वह संगठन के वित्तीय मामलों का प्रबंधन संभालता था। सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के सहयोग से कानूनी प्रक्रिया के बाद शांगलू को श्रीनगर के निशात इलाके में उसके घर से गिरफ्तार किया।
इस हाई-प्रोफाइल अपहरण का मास्टरमाइंड जेकेएलएफ नेता अशफाक मजीद वानी था। वह पहले जम्मू-कश्मीर का एक एथलीट था। अशफाक के अनुसार, वो कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे सरकार हिल जाए, और जैसे ही मुफ्ती गृह मंत्री बने, उसे यह मौका मिल गया। सबसे पहले, उसने मुफ्ती और उनके परिवार की टोह ली। मुफ्ती की बेटी रुबैया श्रीनगर के लाल देद अस्पताल में डॉक्टर थी और बिना सुरक्षा के मिनी बस से घर आती-जाती थी। 8 दिसंबर, 1989 को मुफ्ती सईद की बेटी रुबैया को जेकेएलएफ (जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) ने अगवा कर लिया और एक पुलिस अधिकारी के घर पर रखा। इसके बाद जावेद मीर ने एक अखबार को फोन करके बताया कि जेकेएलएफ ने मुफ्ती की बेटी का अपहरण कर लिया है। रुबैया की रिहाई के लिए जेकेएलएफ ने जेल में बंद अपने सात साथियों शेख हामिद, शेर खान, नूर मोहम्मद कलवाल, जावेद जगरार, अल्ताफ बट, मकबूल बट के भाई गुलाम नबी बट और अहद वजा की रिहाई की शर्त रखी थी। हालांकि, इनमें से सिर्फ पांच को ही रिहा किया गया।
गृह मंत्री की बेटी के अपहरण की खबर से दिल्ली समेत पूरे देश में हड़कंप मच गया। कई वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली से श्रीनगर के लिए रवाना हुए। एक मध्यस्थ के माध्यम से आतंकवादियों से बातचीत शुरू हुई। जेकेएलएफ पांच आतंकवादियों की रिहाई पर सहमत हो गया। सुरक्षा एजेंसियाँ घाटी के चप्पे-चप्पे पर रुबैया की तलाश कर रही थीं। उसे सोपोर भेज दिया गया था, और सिर्फ पांच लोगों को ही इसकी जानकारी थी। सरकार को झुकना पड़ा और पांच आतंकवादियों को रिहा कर दिया गया। 13 दिसंबर की शाम को रुबैया सुरक्षित रूप से सोनवार स्थित जस्टिस भट के घर पहुंच गईं। इस घटना के मास्टरमाइंड अशफाक वानी को सुरक्षा बलों ने 31 मार्च 1990 को एक मुठभेड़ में मार गिराया था।
वहीं, अलगाववादी नेता हिलाल वार ने अपनी पुस्तक 'ग्रेट डिस्क्लोजर: सीक्रेट अनमास्क्ड' में कहा है कि कश्मीर को अस्थिर करने की पटकथा बहुत पहले लिखी जा चुकी थी। इसका असली काम 13 दिसंबर, 1989 को शुरू हुआ। 90 के दशक में कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर कश्मीर में हालात आमतौर पर ठीक थे। हिलाल वार के अनुसार, रुबैया सईद अपहरण की घटना, जिसने आतंकवाद की शुरुआत को चिह्नित किया था दरअसल एक नाटक थी। इसके बाद कश्मीर में हालात लगातार बिगड़ते गए। आईसी 814 विमान का अपहरण, संसद पर हमला और घाटी में बड़ी आतंकवादी घटनाएं, सभी इस अपहरण कांड के बाद शुरू हुईं। आतंकवादियों की रिहाई से पहले भारत सरकार ने शर्त रखी थी कि उनकी रिहाई के बाद कोई जुलूस नहीं निकाला जाएगा। लेकिन जब वे जेल से रिहा हुए, तो लोग सड़कों पर उतर आए। हर जगह 'आजादी-आजादी' के नारे लग रहे थे। उस दिन कश्मीर में पूरी रात जश्न मनाया जाता रहा। रुबैया के अपहरण की सफलता के बाद कश्मीर घाटी में अपहरण और हत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया।
रुबैया सईद अब तमिलनाडु में रहती हैं। वह सीबीआई की अभियोजन पक्ष की गवाह हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने 1990 के दशक की शुरुआत में इस मामले को अपने हाथ में लिया था। अपहरण मामले में मुख्य आरोपी यासीन मलिक (56) मई 2023 में एक विशेष एनआईए अदालत द्वारा आतंकी-वित्तपोषण मामले में सजा सुनाए जाने के बाद तिहाड़ जेल में बंद है।
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