What is Photonic Radar : स्टील्थ फीचर वाले हथियार जिस देश के पास ज्यादा होते है, युद्ध के समय उसकी ताकत उतनी ही ज्यादा होती है। वह इन हथियारों से खुद को ज्यादा सुरक्षित रखते हुए दुश्मन को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। स्टील्थ फीचर वाले हथियारों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि ये आसानी से रडार की पकड़ में नहीं आते। पारंपरिक रडार या कहिए कि एयर डिफेंस सिस्टम को इन्हें पकड़ना (डिटेक्ट) करना असंभव सा होता है, ये हथियार रडार को चकमा दे देते हैं। पकड़ में न आने की सबसे बड़ी वजह रडार में इनका इलेक्ट्रानिक सिग्नेचर का बेहद कम बनना है। स्टील्थ फीचर वाले फाइटर जेट्स या मिसाइल की आकृति रडार में गोल्फ की बाल या छोटी चिड़िया की तरह बनती है, इससे ये पता कर पाना और भी मुश्किल होता है कि आने वाली चीज कोई पक्षी है या एयरक्राफ्ट या मिसाइल।
फोटोनिक रडार से बच नहीं पाएंगे स्टील्थ फीचर वाले हथियार। तस्वीर-टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
कुछ ही देशों के पास है स्टील्थ टेक्नॉलजी
स्टील्थ की इसी खासियत से लैस एयरक्राफ्ट और मिसाइलें अपने दुश्मन को आसानी से निशाना बना लेते हैं। स्टील्थ टेक्नॉलजी अमेरिका, रूस और चीन के पास है। भारत भी स्टील्थ टेक्नॉलजी विकसित करने पर काम कर रहा है। भारत स्टील्थ फीचर वाला अपना 5वीं एवं छठवीं पीढ़ी का फाइटर प्लेन एडवांस्ट मीडियम कॉम्बैट एयरक्रॉफ्ट (AMCA) तो बना ही रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत फोटोनिक रडार विकसित कर रहा है। यह रडार परंपरागत रडार एक्टिव इलेक्ट्रानिकली स्कैंड अरे (AESA) से अलग है। यह फोटोनिक रडार बनकर तैयार हो गया है और अब यह गहन परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।
DRDO ने बनाया फोटोनिक रडार!
इस रडार को रक्षा विकास एवं अनुसंधान संगठन (DRDO) की लैब इलेक्ट्रानिक्स एंड रडार डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (LRDE) ने बनाने में सफलता प्राप्त की है। डीआरडीओ की यह लैब पहले ही अरुधा, अश्लेशा और उत्तम AESA जैसे रडार बना चुकी है। लेकिन फोटोनिक रडार बनाकर उसने गजब का कीर्तमान बनाया है। परीक्षणों में यह रडार यदि खरा उतर जाता है तो यह नायाब, अनूठा और अद्वितीय होगा। ऐसा रडार अमेरिका रूस या चीन किसी के पास भी नहीं है। इस फोटोनिक रडार की सबसे बड़ी खासियत होगी कि इससे स्टील्थ फीचर वाले फाइटर जेट्स, मिसाइल और ड्रोन बच नहीं पाएंगे। ये इन्हें बेहद आसानी और स्पष्टता के साथ डिटेक्ट कर लेगा। पारंपरिक रडार और भारत के इस फोटोनिक रडार में यही सबसे बड़ा अंतर है। फोटोनिक रडार के एक्टिव हो जाने के बाद भारत को पांचवीं पीढ़ी वाले स्टील्थ फाइटर जेट्स, मिसाइलों, ड्रोन से डरने और घबराने की जरूरत नहीं होगी। यह रडार इन्हें डिटेक्ट कर इनकी जानकारी कमांड सेंटर को भेजेगा और वहां से उस हवाई खतरे को मार गिराने के लिए मिसाइलें निकल जाएंगी।
क्या होता है फोटोनिक रडार
फोटोनिक रडार परंपरागत रडार से अलग है। परंपरागत रडार इलेक्ट्रानिक रेडियो फ्रिक्वेंसी (RF) सर्किट पर काम करते हैं जबकि फोटोनिक रडार में हवाई खतरों का डिटेक्शन करने के लिए लेजर और ऑप्टिकल फाइबर जैसे प्रकाश (लाइट) आधारित तकनीकी का इस्तेमाल होता है। इनके जरिए यह रडार सिग्नल प्राप्त करता है और उन्हें भेजता है। साधारण भाषा में कहें तो यह रडार फाइटर प्लेन, मिसाइल और ड्रोन पर लगे अब्जॉर्बमेंट मैटेरियल को पकड़ लेता है। फोटोनिक रडार का स्पेक्ट्रम ऑफ फ्रिक्वेंसी बहुत ज्यादा होती है, वे ऑब्जर्ब नहीं होते। ऑब्जर्ब नहीं होने पर स्टील्थ फाइटर प्लेन, मिसाइल और ड्रोन का रेफलेक्शन ज्यादा होगा औ जब ज्यादा होगा तो रडार उन्हें आसानी से पकड़ लेगा। यही नहीं फोटोनिक रडार के साथ फोटोनिक कंप्यूटर आ रहे हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग की तरह यह भी एक तरह की कंप्यूटिंग है। फोटोनिक कंप्यूटर की स्पीड और इनका रीयल टाइम इनगेंजमेंट बहुत ही ज्यादा है। फोटोनिक रडार और फोटोनिक कंप्यूटर दोनों को अगर मिला दिया जाए तो कोई चीज शायद ही स्टील्थ रह पाएगी। इसलिए हथियारों की दुनिया में भारत के इस फोटोनिक रडार को एक 'गेमचेंजर' माना जा रहा है।
परंपरागत AESA रडार से ज्यादा रेंज
फोटोनिक रडार की रेंज परंपरागत AESA रडार से ज्यादा है और इनके द्वारा ली गई तस्वीरों ज्यादा स्पष्ट होंगी। यह रडार हाई रिजोल्यूशन 3डी में टारगेट को मैप कर लेगा। इसकी एक्यूरेसी, सटीकता भी कहां ज्यादा होगी। सबसे खास बात ये है कि दुश्मन के लिए इसे जैम करना या धोखा दे पाना बेहद मुश्किल होगा। चूंकि ये लाइट पर काम करेगा इसलिए इससे गर्मी कम पैदा होदी और यह ज्यादा लंबे समय तक काम करेगा। अपने अल्ट्रा वाइड बैंडविथ, सिग्नल के कम शोर और अत्यंत सटीकता की वजह से फोटोनिक रडार खतरों को बहुत पहले ही भांप लेगा। यह ऐसे हवाई खतरों को भी डिटेक्ट कर लेगा जिन्हें पकड़ में न आने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस रडार के आगे स्टील्थ फीचर काम नहीं करेगा
इस रडार सिस्टम से सबसे ज्यादा चुनौती चीन और पाकिस्तान को मिलने वाली है। चीन जो कि अपने लड़ाकू जहाजों के बेड़े में लगातार 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर प्लेन का इजाफा कर रहा है। रिपोर्टें यह भी हैं कि वह अपने जे-20 का कुछ स्क्वॉड्रन पाकिस्तान को देने वाला है, ऐसे में फोटोन रडार की अहमियत और भी बढ़ जाती है। क्योंकि एक बार तैनात होने के बाद यह रडार किसी हवाई खतरे को स्टील्थ नहीं रहने देगा। पाकिस्तान के लिए तो यह और भी बुरी खबर है क्योंकि उसके चीनी रडार सिस्टम पुराने हैं। भारत का यह स्वदेशी रडार सिस्टम चीन की हवाई वर्चस्वता को भी बहुत बड़ी चुनौती देगा।
सरप्राइज हमला करना बेहद मुश्किल
फोटोनिक रडार तकनीकी रूप से इतना उन्नत है कि इसका इस्तेमाल एयरबोर्न वार्निंग सिस्टम में हो सकता है। वैसे ही जैसे दुश्मन के लड़ाकू विमान, मिसाइल अथवा ड्रोन को डिटेक्ट करने के लिए वार्निंग सिस्टम की तैनाती बड़े एयरक्राफ्ट में होती है। इसके सक्रिय हो जाने के बाद दुश्मन के लिए सरप्राइज हमला करना बेहद मुश्किल होगा क्योंकि पारंपरिक रडार की तुलना में यह खतरे का पता बहुत पहले और स्पष्ट रूप से लगा लेगा। कुल मिलाकर फोटोनिक रडार के रूप में भारत को अपनी सुरक्षा के लिए एक बेहद ताकतवर, सटीक, आधुनिक उन्नत रडार मिलने जा रहा है।
'आत्मनिर्भर भारत' की उम्दा मिसाल
यह भारत के आसमान को अभेद बनाएगा और दुश्मन के स्टील्थ हथियार इसे चकमा नहीं दे पाएंगे। खास बात यह है कि यह रडार केवल एक रक्षात्मक हथियार भर नहीं है बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की एक ज्वलंत मिसाल है। इस तरह की कटिंग एज तकनीक विदेशों पर भारत की निर्भरता कम करेगी। साथ ही यह दिखाएगी कि आधुनिक युद्ध के तौर-तरीकों में अब भारत भी पीछे नहीं है। डीआरडीओ का यह फोटोनिक रडार अपने आप में बेहद खास और अनूठा है।
