क्या होता है फोटोनिक रडार, जानिए क्यों है स्टील्थ फीचर वाले हथियारों का इससे बचना मुश्किल?

फोटोनिक रडार परंपरागत रडार से अलग है। परंपरागत रडार इलेक्ट्रानिक रेडियो फ्रिक्वेंसी (RF) सर्किट पर काम करते हैं जबकि फोटोनिक रडार में हवाई खतरों का डिटेक्शन करने के लिए लेजर और ऑप्टिकल फाइबर जैसे प्रकाश (लाइट) आधारित तकनीकी का इस्तेमाल होता है। इनके जरिए यह रडार सिग्नल प्राप्त करता है और उन्हें भेजता है।

What is Photonic Radar : स्टील्थ फीचर वाले हथियार जिस देश के पास ज्यादा होते है, युद्ध के समय उसकी ताकत उतनी ही ज्यादा होती है। वह इन हथियारों से खुद को ज्यादा सुरक्षित रखते हुए दुश्मन को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। स्टील्थ फीचर वाले हथियारों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि ये आसानी से रडार की पकड़ में नहीं आते। पारंपरिक रडार या कहिए कि एयर डिफेंस सिस्टम को इन्हें पकड़ना (डिटेक्ट) करना असंभव सा होता है, ये हथियार रडार को चकमा दे देते हैं। पकड़ में न आने की सबसे बड़ी वजह रडार में इनका इलेक्ट्रानिक सिग्नेचर का बेहद कम बनना है। स्टील्थ फीचर वाले फाइटर जेट्स या मिसाइल की आकृति रडार में गोल्फ की बाल या छोटी चिड़िया की तरह बनती है, इससे ये पता कर पाना और भी मुश्किल होता है कि आने वाली चीज कोई पक्षी है या एयरक्राफ्ट या मिसाइल।

Photon Radar

फोटोनिक रडार से बच नहीं पाएंगे स्टील्थ फीचर वाले हथियार। तस्वीर-टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल

कुछ ही देशों के पास है स्टील्थ टेक्नॉलजी

स्टील्थ की इसी खासियत से लैस एयरक्राफ्ट और मिसाइलें अपने दुश्मन को आसानी से निशाना बना लेते हैं। स्टील्थ टेक्नॉलजी अमेरिका, रूस और चीन के पास है। भारत भी स्टील्थ टेक्नॉलजी विकसित करने पर काम कर रहा है। भारत स्टील्थ फीचर वाला अपना 5वीं एवं छठवीं पीढ़ी का फाइटर प्लेन एडवांस्ट मीडियम कॉम्बैट एयरक्रॉफ्ट (AMCA) तो बना ही रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत फोटोनिक रडार विकसित कर रहा है। यह रडार परंपरागत रडार एक्टिव इलेक्ट्रानिकली स्कैंड अरे (AESA) से अलग है। यह फोटोनिक रडार बनकर तैयार हो गया है और अब यह गहन परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।

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