तेहरान और वाशिंगटन की पूरी तैयारी, ओमान से खुलेंगे जंग या सुलह के रास्ते

वियना में 14 जुलाई 2015 को वाशिंगटन और तेहरान समेत ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस, और जर्मनी ने संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) पर आपसी रजामंदी ज़ाहिर की। इसके तहत तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन की रफ्तार को कम करके सेंट्रीफ्यूज की तादाद को भी घटा दिया। इसके एवज में अमेरिका समेत दूसरे देशों ने ईरान पर लगाए प्रतिबंधों में ढील दी ताकि ईरानी इक्नॉमी राहत की सांस ले सके।

साल 2013 में उस दौरान के अमेरिकी सदर बराक ओबामा के सिपहसालारों ने तेहरान के साथ बातचीत की सिलसिला शुरू किया। ये दौर दो सालों तक चला, ओबामा की रूखसती के बाद ट्रंप सरकार 1.O ने सत्ता संभाली तो इस सिलसिले को और बढ़ाया गया। इस शानदार पहल का खुलासा यूएन की ओर से भी किया गया, इन सबके के बावजूद ये दौर थम गया। ट्रंप सरकार 1.O के बाद जैसे ही अमेरिकी तख्त पर जो बिडेन तख्तनशीं हुए तो उन्होनें इस ओर ध्यान देना भी गंवारा नहीं समझा। उस कथित बातचीत का दौर इतिहास के भूले बिसरे पन्ने में सिमटकर रह गया। उस सुलह के सिलसिले को शांति पहल और तेहरान-वाशिंगटन रिश्ते की नयी ताबीर कहकर पेश किया गया था, लेकिन जैसे ही इस पर साझा सहमति की बात आयी तो मामला खटाई में पड़ गया नतीजन दोनों के तालुक्कातों में तल्खियां पहले से ज्यादा बढ़ गयी।

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ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई

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