Trump Meets Zelensky: पिछले तीन सालों से रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जंग (Russia Ukraine War) जारी है। करीब हर दिन दोनों देशों की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं। इसी बीच एक बार फिर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक होने जा रही है।
जेलेंस्की कनाडा पहुंच चुके हैं। वहां से वो अमेरिका के फ्लोरिडा के लिए रवाना होंगे। फ्लोरिडा के पाम बीच पर दोनों नेताओं की बातचीत होगी। मुद्दा बिल्कुल स्पष्ट है। कैसे पिछले चार सालों से चल रहे युद्ध को खत्म करना है।
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क्या है बैठक का उद्देश्य?
हालांकि, इस बार इस बैठक में 20 पॉइंट पीस प्लान पर बातचीत भी होगी। जेलेंस्की की मानें तो 20 सूत्री योजना यानी पीस एग्रीमेंट का काम 90% हो चुका है। दरअसल, 'यूक्रेन शांति योजना' का एक संशोधित ड्राफ्ट तैयार किया गया है। पहले के ड्राफ्ट में यह 28 सूत्रीय योजना थी, जिसके कई बिंदुओं पर यूक्रेन सहमत नहीं था।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: "हम एक दिन भी बर्बाद नहीं कर रहे हैं। हमने निकट भविष्य में राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ उच्चतम स्तर की बैठक पर सहमति जताई है। नए साल से पहले बहुत कुछ तय किया जा सकता है।" हालांकि, ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि "जब तक मैं इसे, यानी 20 सूत्री योजना को मंजूरी नहीं देता, तब तक कोई निर्णय नहीं निकलना चाहिए।"
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कई बार मिल चुके हैं दोनों नेता
बता दें कि इस साल जेलेंस्की और ट्रंप के बीच कई बार मुलाकात हो चुकी है। फरवरी में व्हाइट हाउस में हुई उनकी पहली मुलाकात तीखी बहस में बदल गई थी। अक्टूबर में व्हाइट हाउस में हुई उनकी सबसे हालिया मुलाकात कहीं अधिक सौहार्दपूर्ण रही। फ्लोरिडा में होने वाली बैठक से पहले अब सारी निगाह 20 सूत्रीय पीस प्लान पर जा टिकी है।
आखिर 20 सूत्रीय पीस प्लान है क्या?
- प्रस्तावित शांति समझौते के मुख्य बिंदु के अनुसार यूक्रेन की संप्रभुता की पुष्टि की जाएगी और उसे मजबूत सुरक्षा गारंटी दी जाएगी। रूस और यूक्रेन आक्रामकता रोकने का दीर्घकालीन समझौता करेंगे, जिसकी निगरानी अंतरिक्ष से की जाएगी।
- यूक्रेन 8 लाख सैनिकों की अपनी सेना बनाए रखेगा। वहीं, अमेरिका, नाटो और यूरोपीय देश यूक्रेन को आर्टिकल 5 जैसी सुरक्षा गारंटी देंगे, जो नाटो के सामूहिक रक्षा सिद्धांत की तरह है।
- रूस यूरोप और यूक्रेन के प्रति गैर-आक्रामक नीति को कानून और दस्तावेजों में औपचारिक रूप देगा।
- यूक्रेन एक निश्चित तारीख पर यूरोपीय संघ का सदस्य बनेगा। उसे यूरोपीय बाजार में कुछ समय के लिए विशेष तरजीही पहुंच मिलेगी।
- यूक्रेन परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के अनुरूप एक गैर-परमाणु देश बना रहेगा, मतलब वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
- नीपर नदी और काला सागर के व्यावसायिक उपयोग में रूस बाधा नहीं डालेगा. किनबर्न स्पिट (Kinburn Spit) क्षेत्र से सेना हटाई जाएगी और आने-जाने की आजादी के लिए अलग से समझौता होगा।
- शांति समझौते पर दस्तखत होने के तुरंत बाद यूक्रेन में जल्द से जल्द चुनाव कराए जाएंगे।
हालांकि दो प्रमुख मुद्दों—जपोरिज्जिया परमाणु प्लांट और डोनबास इलाके पर कंट्रोल—को लेकर अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है।
क्षेत्रीय विवाद बना युद्ध का कारण
बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध का असल जड़ तो क्षेत्रीय विवाद ही है। रूस ने डोनबास के लुहांस्क के ज्यादातर इलाके को कब्जा लिया है और डोनेत्स्क के 70 फीसदी क्षेत्र पर अधिकार कर लिया है। वह चाहता है कि यूक्रेन बाकी इलाके पर भी अपना दावा छोड़ दे।
वहीं, यूक्रेन ने हमेशा इस पर आपत्ति जाहिर की है। यूक्रेन का मानना है कि इस क्षेत्र में जनमत संग्रह हो और लोगों को ही तय करने का अधिकार दिया जाए कि वे किस देश के नागरिक बनना चाहते हैं। अमेरिका ने बीच का रास्ता निकालते हुए इस इलाके से सेनाएं हटाकर मुक्त आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव दिया है। जेलेंस्की ने कहा है कि यह क्षेत्रीय विवाद सबसे जटिल मुद्दा है।
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जपोरिज्जिया परमाणु प्लांट की क्या कहानी है?
वही, जपोरिज्जिया परमाणु प्लांट भी एक अलग मुद्दा है। बता दें कि यह यूरोप का सबसे बड़ा प्लांट है। इस पर फिलहाल रूस का कब्जा है। अमेरिका ने प्रस्ताव दिया है कि इस प्लांट को यूक्रेन, अमेरिका और रूस मिलकर चलाएं, लेकिन यूक्रेन चाहता है कि इसका संचालन अमेरिका और यूक्रेन 50-50 साझेदारी में करें। हालांकि, यूक्रेन नहीं चाहता कि वह रूस के साथ मिलकर काम करे।
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उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों नेताओं की बातचीत के बाद अमेरिका 20-सूत्रीय ड्राफ्ट रूस को सौंप देगा। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो अंतिम दस्तावेज पर यूक्रेन, अमेरिका, यूरोप और रूस के नेताओं को हस्ताक्षर करने होंगे। यूरोपीय पक्ष से संभावित समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों का फैसला अभी होना बाकी है।
हालांकि, इस ड्राफ्ट पर यूरोपीय पक्ष ने अभी तक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन अगर ड्राफ्ट समझौते पर रूस और यूक्रेन के नेता हस्ताक्षर करने के लिए राजी हो गए तो नया साल दोनों देशों के लिए एक 'नई सुबह' लेकर आ सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें फ्लोरिडा पर टिकी हैं, जहां ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात होगी।
