लक्षद्वीप के खारे पानी को 'स्वीट वॉटर' बनाएगा इजरायल, जानिए क्या होती है डिसेलिनेशन प्रक्रिया

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Jan 11, 2024, 12:51 PM IST

Israel Desalination Program: दरअसल, समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य एवं जरूरत में इस्तेमाल के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को डिसेलिनेशन कहा जाता है। इसे 'सी वाटर रिवर्स ओसमोसिस' (SWRO) भी कहते हैं। खारे पानी से नमक एवं अन्य खनिज तत्व निकाले जाते हैं।

Israel Desalination Program: भारत और मालदीव के विवाद के बीच इजरायल ने लक्षद्वीप की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए कहा कि वह इस द्वीप पर अपना डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट शुरू करेगा। उसकी टीम पिछले साल यहां गई थी। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में लक्षद्वीप गए थे। उन्होंने वहां की तस्वीरें X पर पोस्ट कर पर्यटकों से यहां की सुंदरता देखने एवं एडवेंचर पर्यटन का लुत्फ उठाने की अपील की। पीएम मोदी की यह बात मालदीव को बुरी लगी। मालदीव सरकार के कुछ मंत्रियों ने पीएम मोदी और भारत के खिलाफ अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणी की। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया। गत सोमवार को इजरायल ने कहा कि वह लक्षद्वीप में अपने डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेगा। आइए जानते हैं कि आखिर डिसेलिनेशन होता क्या है-

desalination program

लक्षद्वीप में मीठे पानी की कमी है।

क्या है इजरायल का डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट

दरअसल, समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य एवं जरूरत में इस्तेमाल के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को डिसेलिनेशन कहा जाता है। इसे 'सी वाटर रिवर्स ओसमोसिस' (SWRO) भी कहते हैं। खारे पानी से नमक एवं अन्य खनिज तत्व निकाले जाते हैं। समुद्र का पानी बहुत ज्यादा खारा होता है, उसे पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। समुद्र के पानी में नमक की सघनता 35,000 PPM (पार्ट्स पर मिलियन) होती है और डिसेलिनेशन प्रक्रिया से इसे 10 पीपीएम पर लाया जा सकता है। 10 पीपीएम वाले पानी को पीने योग्य माना जाता है। डिसेलिनेशन की प्रक्रिया अपनाकर कई देश समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाते हैं।

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