शुक्रयान मिशन में स्वीडन की एंट्री, भारत के लिए क्यों खास है यह अभियान? ISRO के लिए क्या बनाएगा यूरोप का यह देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वीनस ऑर्बिटर मिशन (वीओएम) के विकास को मंजूरी प्रदान की है, जो चंद्रमा और मंगल से परे शुक्र ग्रह के अन्वेषण और अध्ययन के सरकार के विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शुक्र, पृथ्वी का सबसे निकटतम ग्रह है

India's Shukrayaan mission : भारत के अपने शुक्रयान मिशन में यूरोप के एक देश का साथ मिला है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की इस परियोजना में स्वीडन औपचारिक रूप से शामिल हुआ है। उसने इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा दौरान की है। इसरो और स्वीडन की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के बीच शुक्र मिशन पर सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ग्रहों की खोज के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग के महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाता है।

venus mission

मार्च 2028 में शुक्र ग्रह के पास यान भेजने की है योजना।

स्वीडन की इस मिशन में भागीदारी को लेकर पहले से चर्चा चल रही थी, लेकिन इस सहयोग को उच्च स्तरीय राजनयिक बैठक के दौरान हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के जरिए औपचारिक मान्यता दी गई। मिशन के तहत, स्वीडन का स्वीडिश इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस फिजिक्स ‘वीनसियन न्यूट्रल्स एनालाइजर’ (VNA) नामक एक वैज्ञानिक उपकरण विकसित करेगा, जिसे भारत के शुक्र ग्रह ऑर्बिटर पर भेजा जाएगा। यह उपकरण सूर्य से निकलने वाले आवेशित कणों और शुक्र ग्रह के वायुमंडल के बीच होने वाली परस्पर क्रिया का अध्ययन करने के लिए तैयार किया गया है, जिसे ग्रह के सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रहस्यों में से एक माना जाता है।

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