यूक्रेन को इस समय एयर डिफेंस सिस्टम की खास जरूरत है।
जेलेंस्की ने दक्षिण कोरिया से एयर डिफेंस सिस्टम में मदद की अपील की।
Russia Ukraine War: 24 फरवरी 2022 यानी पिछले पांच साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा है। दोनों देशों के हजारों लोगों ने इस जंग में अपनी जान गंवाई है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) समेत विभिन्न खुफिया आकलनों और शोध संस्थानों के अनुमानों के मुताबिक, करीब 4 लाख से 4.5 लाख रूसी सैनिकों की मौत हो चुकी है। हालांकि, रूस की ओर से सार्वजनिक किए गए आधिकारिक आंकड़े इन स्वतंत्र अनुमानों से काफी अलग रहे हैं। वहीं, यूक्रेनी सैनिकों की मौत का आंकड़ा हजारों से लेकर एक लाख से अधिक तक बताया गया है।
युद्ध का सबसे दर्दनाक असर आम नागरिकों पर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने यूक्रेन में 16,000 से अधिक नागरिकों की मौत की पुष्टि की है। युद्ध में एक तरफ जहां पश्चिमी देश यूक्रेन की मदद कर रहे हैं, वहीं उत्तर कोरिया जैसे देशों ने रूस का साथ दिया है। भले ही चीन भी रूस के साथ खड़ा है, लेकिन ड्रैगन ने कभी भी इस युद्ध में खुलकर रूस का समर्थन नहीं किया।
इसी बीच युद्ध में दक्षिण कोरिया की भी एंट्री हो चुकी है। यूक्रेन अब दक्षिण कोरिया से एयर डिफेंस सिस्टम और दूसरी सैन्य मदद मांग रहा है। दक्षिण कोरिया ने साफ किया है कि वह यूक्रेन को मानवीय और पुनर्निर्माण सहायता जारी रखेगा, लेकिन फिलहाल घातक हथियार या एयर डिफेंस सिस्टम देने की योजना नहीं है।
पिछले पांच साल से रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है। AP
पहले समझिए पूरा मामला क्या है?
रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। उत्तर कोरिया ने रूस को बड़ी मात्रा में तोप के गोले, मिसाइल और दूसरे हथियार उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा हजारों उत्तर कोरियाई सैनिक भी रूस पहुंचे हैं। यूक्रेनी और दक्षिण कोरियाई आकलनों के मुताबिक, 2024 में करीब 14,000-15,000 उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के कुर्स्क क्षेत्र में पहुंचे थे। इनमें से करीब 9,500 सैनिक अभी भी रूस में होने की बात कही गई है।
अब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया 30,000 से 50,000 अतिरिक्त लोगों को रूस भेजने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, दक्षिण कोरिया ने इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग की तस्वीर। AP
रूस की मदद क्यों कर रहा उत्तर कोरिया ?
इसे दोनों देशों के बीच लेन-देन वाली रणनीतिक साझेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। रूस को उत्तर कोरिया से सैनिक और हथियार मिल रहे हैं। वहीं, प्योंगयांग को रूस से आर्थिक मदद, सैन्य तकनीक और सबसे महत्वपूर्ण, आधुनिक युद्ध का वास्तविक अनुभव हासिल हो रहा है। उत्तर कोरियाई सैनिकों ने ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, आर्टिलरी कोऑर्डिनेशन और आधुनिक युद्ध की दूसरी तकनीकों का अनुभव हासिल किया है। दक्षिण कोरिया के लिए यही सबसे बड़ी चिंता है।
यूक्रेन के मारियुपोल के एक बिल्डिंग में गोलीबारी के बाद विस्फोट की तस्वीर। AP
दक्षिण कोरिया क्यों चिंतित है?
दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया पहले से ही एक बेहद तनावपूर्ण सुरक्षा स्थिति में हैं। ऐसे में अगर उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के साथ युद्ध का अनुभव लेकर वापस लौटते हैं और उन्हें रूस से नई सैन्य तकनीक भी मिलती है, तो इसका असर कोरियाई प्रायद्वीप के सैन्य संतुलन पर पड़ सकता है। दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने रूस-उत्तर कोरिया के सैन्य सहयोग को सीधे अपनी सुरक्षा से जुड़ा बताया है और कहा है कि यह सहयोग संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करता है। यही वजह है कि सियोल इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद करीब से नजर रख रहा है।
दक्षिण कोरिया से क्या चाहता है यूक्रेन?
बता दें कि यूक्रेन को इस समय एयर डिफेंस सिस्टम की खास जरूरत है। रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों से यूक्रेन के शहरों और बुनियादी ढांचे पर लगातार दबाव है।
जेलेंस्की ने दक्षिण कोरिया से एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य क्षमताओं में मदद की अपील की है। उनका तर्क है कि उत्तर कोरिया रूस की मदद कर रहा है और बदले में आधुनिक युद्ध का अनुभव हासिल कर रहा है, इसलिए दक्षिण कोरिया को भी यूक्रेन के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाना चाहिए।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल और ओलेना जेलेंस्का की तस्वीर। AP
दक्षिण कोरिया हथियार देने से क्यों बच रहा है?
दक्षिण कोरिया की अपनी एक लंबे समय से चली आ रही नीति है। सियोल यूक्रेन को मानवीय सहायता, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मदद करता रहा है, लेकिन घातक हथियार सीधे देने से बचता है। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि किसी भी देश को रक्षा सामग्री की आपूर्ति घरेलू कानून के तहत की जाती है। फिलहाल सियोल ने यूक्रेन को घातक हथियार या एयर डिफेंस सिस्टम देने पर अपनी नीति नहीं बदली है।
इसके पीछे रूस के साथ सीधे टकराव का जोखिम भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अगर सियोल सीधे यूक्रेन को हथियार देता है तो रूस, उत्तर कोरिया के साथ अपनी सैन्य साझेदारी को और मजबूत कर सकता है, जो दक्षिण कोरिया की सुरक्षा के लिए उल्टा नुकसानदायक हो सकता है।
क्या इसका मतलब दक्षिण कोरिया यूक्रेन की मदद नहीं करेगा?
दरअसल, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। दक्षिण कोरिया यूक्रेन को मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण में सहयोग देता रहेगा। ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मदद जारी रखने की बात सियोल ने कही है। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया का रक्षा उद्योग बेहद मजबूत है। वह अमेरिका और यूरोप के सहयोगियों को आधुनिक हथियार और सैन्य उपकरण उपलब्ध कराता है। लेकिन यूक्रेन को सीधे घातक हथियार देने के मामले में सियोल अभी भी अपनी सीमा पार करने को तैयार नहीं दिख रहा है।
