Explained: दक्षिण में हिट, बिहार में मिस; कांग्रेस का ‘कैश ट्रांसफर’ कार्ड क्यों हुआ फ्लॉप

बिहार विधानसभा चुनाव में महिला वोटर्स ने रिकॉर्ड मतदान कर निर्णायक भूमिका निभाई ओर इस वोटबैंक को महागठबंधन अपनी ओर लाने में असफल हो गई। कांग्रेस की ‘माई बहिन मान योजना’ जैसी नकद सहायता योजनाएं कर्नाटक-तेलंगाना में तो सफल रहीं, लेकिन बिहार में महिलाओं का भरोसा नहीं जीत पाईं। आइए जानते हैं क्या रहा इसका कारण।

बिहार विधानसभा चुनाव में मतगणना शुरू होने से पहले ही यह साफ हो गया था कि इस बार महिला वोटर चुनावी नतीजों की निर्णायक शक्ति बनने वाली हैं। मतदान के बाद आए आंकड़ों से पता चला कि पुरुषों की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक मतदान करके महिलाओं ने राज्य में वोटिंग का नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों में यह ट्रेंड लगातार मजबूत हुआ है कि जिन राज्यों में महिलाएं अधिक संख्या में मतदान करती हैं, वहां सत्ता परिवर्तन या सत्ता स्थिरता, दोनों का निर्धारण काफी हद तक उन्हीं की पसंद पर निर्भर करता है।

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बिहार में महिलाओं को क्यों नहीं लुभा पाई महागठबंधन की कैश ट्रांसफर योजना

इस चुनाव में भी महिलाओं के अभूतपूर्व मतदान ने राजनीतिक दलों को साफ संकेत दिया कि उनकी नीतियां और वादे, खासकर महिला केंद्रित योजनाएं, चुनावी परिणामों को गहराई से प्रभावित करेंगी। प्रदेश के चुनाव और महिला वोटर्स की भागीदारी को भांपते हुए NDA और महागठबंधन ने भी महिला से जुड़ी योजनाओं की घोषणा की लेकिन ऐसा क्या कारण रहा कि कर्नाटक और तेलंगाना में महिलाओं को पैसे देने का मॉडल बिहार में फेल हो गया।

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