जब टूटते-टूटते बचा था कनाडा, अगर भारत ने कर दिया ये काम तो निकल जाएगी ट्रूडो की हेकड़ी

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Sep 22, 2023, 11:47 AM IST

Quebec Referendum : क्यूबेक स्वतंत्रता अभियान को क्यूबेक संप्रभुता आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। इस आंदोलन का मकसद क्यूबेक को कनाडा से आजाद कराना है। इस आंदोलन में विश्वास करने वाले लोगों का मानना है कि कनाडा का हिस्सा नहीं रहने पर उनका आर्थिक, समाजिक एवं सांस्कृतिक विकास ज्यादा अच्छा होगा।

Quebec Referendum : कहते हैं कि जब अपना घर दुरुस्त न हो तो दूसरे के आशियाने पर गलत मंशा नहीं दिखानी चाहिए। लेकिन खालिस्तान के मुद्दे पर कनाडा ने जिस तरह का रवैया अपनाया है। वही रवैया अगर भारत उसके क्यूबेक इलाके को लेकर अपना ले तो प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को एक बड़ा झटका लगेगा और वह तिलमिला जाएंगे। ऐसा नहीं है कि कनाडा की क्षेत्रीय संप्रभुता पर सवाल नहीं उठे और वहां अलगाववादी प्रदर्शन नहीं हुआ। कनाडा में क्यूबेक इलाके को एक अलग देश बनाने की मांग को लेकर दो बार जनमत संग्रह हो चुका है। अलग देश के लिए विरोध-प्रदर्शन भी होते आए हैं लेकिन कनाडा की सरकार इन विरोध-प्रदर्शनों को दबाती आई है। खालिस्तान के मुद्दे पर तो वह मुखर है लेकिन क्यूबेक मामले में उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नजर नहीं आती।

Justin Trudeau

कनाडा में दो बार हो चुके हैं जनमत संग्रह।

क्या है क्यूबेक स्वतंत्रता अभियान

क्यूबेक स्वतंत्रता अभियान को क्यूबेक संप्रभुता आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। इस आंदोलन का मकसद क्यूबेक को कनाडा से आजाद कराना है। इस आंदोलन में विश्वास करने वाले लोगों का मानना है कि कनाडा का हिस्सा नहीं रहने पर उनका आर्थिक, समाजिक एवं सांस्कृतिक विकास ज्यादा अच्छा होगा। क्यूबेक स्वतंत्रता अभियान 'क्यूबेक राष्ट्रवाद' के विचार पर आधारित है। क्यूबेक का अधिकांश इलाके पर फ्रांसीसी संस्कृति का प्रभाव ज्यादा है। क्यूबेक को कनाडा का हिस्सा रहना चाहिए या नहीं, इसे लेकर कनाडा में अब तक दो बार जनमत संग्रह हो चुके हैं।

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