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पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया के बीच नई डिफेंस डील, मक्का पैक्ट से कितना अलग, भारत के लिए क्या मायने?

इस नई डिफेंस डील पर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलेर, कतर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुल रहमान और इंडोनेशिया के उप रक्षा मंत्री यूसुफ जौहरी ने हस्ताक्षर किए।

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पाकिस्तान की नई डिफेंस डील से भारत पर कितना असर?
Authored by: अमित कुमार मंडल
Updated Oct 22, 2026, 14:46 IST
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अगस्त 2026 में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करके एक नए रक्षा गठबंधन का गठन किया। अब, दो महीने बाद, तुर्की, पाकिस्तान, कतर और इंडोनेशिया द्वारा सैन्य सहयोग को गहरा करने और अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक नए समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद एक और इस्लामी रक्षा गठबंधन के बनने की संभावना है। चारों देशों ने बुधवार (21 अक्टूबर) को दोहा में नए समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे बद्र समझौता ज्ञापन के नाम से जाना जाता है। इस पर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलेर, कतर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुल रहमान और इंडोनेशिया के उप रक्षा मंत्री यूसुफ जौहरी ने हस्ताक्षर किए। लेकिन इस समझौते में क्या शामिल है? इस पर अभी हस्ताक्षर क्यों किए गए हैं? और सबसे महत्वपूर्ण बात, भारत के लिए इसका क्या महत्व है? आइए एक नजर डालते हैं।

दोहा में रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर

वैश्विक और रणनीतिक मोर्चे पर एक बड़े घटनाक्रम के तहत तुर्की, पाकिस्तान, कतर और इंडोनेशिया ने कतर की राजधानी दोहा में एक नई और व्यापक रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बहुपक्षीय समझौते को 'बद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (Badr MoU) नाम दिया गया है। हाल ही में सामने आए 'मक्का पैक्ट' के बाद इस नई डिफेंस डील ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है।

क्या है 'बद्र समझौता' और इसका मकसद?

  • दोहा में हुए इस समझौते का मुख्य केंद्र बिंदु रक्षा औद्योगिक सहयोग और सैन्य साजो-सामान का विकास है। इसके कई मकसद हैं।
  • चारों देश मिलकर हथियारों और रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन पर काम करेंगे।
  • रक्षा तकनीक, उन्नत हथियारों के विकास और अनुसंधान में आपसी तालमेल बढ़ाना।
  • सैन्य कर्मियों के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण और संयुक्त सैन्य अभ्यासों का आयोजन करना।

क्यों रखा गया 'बद्र' नाम?

इस समझौते के तहत परियोजनाओं की पहचान के लिए एक 'एग्जीक्यूटिव बोर्ड' और उनकी समयसीमा तय कर उन्हें मंजूरी देने के लिए एक 'स्ट्रेटेजिक बोर्ड' का गठन किया गया है। इस समझौते का नाम 'बद्र' रखा गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'पूर्णिमा' है और इसका संबंध इस्लामिक इतिहास के एक प्रसिद्ध युद्ध स्थल से है। इस साझेदारी में तुर्की अपनी उन्नत रक्षा तकनीक (जैसे ड्रोन और मिसाइल सिस्टम) और रक्षा उद्योग के अनुभव का सबसे बड़ा हिस्सा लेकर आ रहा है, जबकि पाकिस्तान, कतर और इंडोनेशिया इसे वित्तीय, श्रम और कूटनीतिक समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

'मक्का पैक्ट' से यह कितना अलग है?

हाल ही में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच 'मक्का डिफेंस पैक्ट' सामने आया था, जिसे लेकर काफी चर्चा हुई थी। 'बद्र समझौता' उससे कई मायनों में अलग है। मक्का पैक्ट में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब शामिल हैं; जबकि 'बद्र समझौते' में सऊदी अरब की जगह कतर और इंडोनेशिया को शामिल किया गया है। 'मक्का पैक्ट' मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, मिसाइल/ड्रोन हमलों के खिलाफ त्वरित सैन्य तैनाती और सामूहिक रक्षा के करीब माना जाता है। वहीं, 'बद्र समझौता' कोई नाटो (NATO) जैसी सामूहिक सैन्य या कानूनी रक्षा संधि नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से रक्षा विनिर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और औद्योगिक साझेदारी पर केंद्रित है।

भारत के लिए इसके क्या मायने हैं? इस नए रक्षा ब्लॉक पर भारत की पैनी नजर है, क्योंकि इसके दीर्घकालिक रणनीतिक मायने हो सकते हैं।

तुर्की-पाकिस्तान की बढ़ती डिफेंस धुरी

तुर्की पहले से ही पाकिस्तान को ड्रोन (Bayraktar) और नौसैनिक जहाजों के निर्माण में मदद कर रहा है। इस नए समझौते से रक्षा तकनीक तक पाकिस्तान की पहुंच और सुगम हो सकती है, जो भारत की सुरक्षा के लिहाज से एक चिंता का विषय है। इंडोनेशिया का पहलू भी विचारणीय है। क्या बदर समझौता ज्ञापन के परिणामस्वरूप जकार्ता के साथ भारत का रक्षा समझौता खतरे में पड़ जाएगा? जुलाई में, भारत और इंडोनेशिया ने 630 मिलियन डॉलर के एक समझौते की घोषणा की, जिसके तहत नई दिल्ली जकार्ता को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें और एस्ट्रा वायु-से-वायु मिसाइलें मुहैया कराएगी। यह चिंता जताई जा रही है कि बदर समझौते के तहत, चारों देश भारत के हथियारों के बारे में जानकारी साझा कर सकते हैं, जिससे पाकिस्तान को फायदा मिल सकता है।

कुल मिलाकर, यह समझौता यह दर्शाता है कि तुर्की और पाकिस्तान अपने रक्षा दायरे को खाड़ी देशों से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया (इंडोनेशिया) तक फैलाने और एक नया कूटनीतिक-औद्योगिक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में भारत को बेहद सावधानी के साथ इस पर नजर रखते हुए आगे की रणनीति पर विचार करना होगा।

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