Russia India Rail Corridor: यूरेशिया के विशाल भूभाग को पार करते हुए मॉस्को से रवाना होकर सीधे भारत पहुंचने वाली मालगाड़ी जल्द ही एक वास्तविकता बन सकती है। रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने रूस से हिंद महासागर तक एक सीधे रेल संपर्क का प्रस्ताव रखा है, जिसमें भारत मुख्य गंतव्य स्थल के रूप में शामिल है।
मॉस्को से मुंबई तक ट्रेन! रूस ने भारत तक नया सीधा रेल कॉरिडोर बनाने की क्यों की वकालत? जानिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना की हर कड़ी
रूस के इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और काला सागर में तुर्की के बोस्फोरस जलडमरूमध्य जैसे भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता को कम करना है।
आखिर कैसे काम करेगा मॉस्को-टू-मुंबई रूट?
यह गलियारा केवल एक सीधी ट्रेन लाइन नहीं होगा, बल्कि यह रेल और समुद्री मार्गों का एक एकीकृत नेटवर्क है:
मॉस्को से दक्षिणी रूस: रेल मार्ग द्वारा माल परिवहन।
रूस से अजरबैजान: अजरबैजान के रास्ते सीधे रेल लिंक।
अजरबैजान से ईरान: उत्तर-दक्षिण रेल गलियारे के जरिए जुड़ाव।
ईरान से चाबहार/अब्बास बंदरगाह: ईरान के आंतरिक रेल नेटवर्क से बंदरगाहों तक परिवहन।
ईरान से भारत (मुंबई): चाबहार या बंदर अब्बास बंदरगाह से समुद्री मार्ग के जरिए सीधे भारत तक माल की डिलीवरी।
चाबहार बंदरगाह: भारत की रणनीतिक कुंजी
भारत के लिए इस पूरे नेटवर्क में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ईरान का चाबहार बंदरगाह है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प: चाबहार हिंद महासागर से सीधे जुड़ा ईरान का एकमात्र प्रमुख बंदरगाह है। यहां पहुंचने के लिए संकीर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश नहीं करना पड़ता।
मध्य एशिया का प्रवेश द्वार: भारत लंबे समय से चाबहार को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक व्यापार का प्रमुख साधन मानता आया है। ईरान वर्तमान में चाबहार-जाहेदान रेलवे लाइन का निर्माण कर रहा है, जो बंदरगाह को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी।
रूस रेल लिंक प्लान
परियोजना के सामने मुख्य चुनौतियां
-रश्त-अस्तारा रेल लिंकअजरबैजान और ईरान के बीच रश्त-अस्तारा रेलवे लाइन का न बनना इस मार्ग की सबसे बड़ी रुकावट है।
-अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध
रूस और ईरान पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण फंडिंग, बीमा और बैंकिंग लेनदेन जटिल हैं।
-तकनीकी अंतर
रूस में ब्रॉड-गेज और ईरान में स्टैंडर्ड-गेज रेल पटरी है, जिससे बोगियों या कंटेनरों को बदलना पड़ेगा।
-भौगोलिक व राजनीतिक सीमा
पाकिस्तान के रास्ते सीधा भू-मार्ग राजनीतिक रूप से असंभव होने के कारण ईरान होकर ही एकमात्र समुद्री-रेल विकल्प बचता है।
भारत-रूस रेल लिंक प्रोजेक्ट पर बातचीत कैसे शुरू हुई?
यह बातचीत 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) से गहराई से जुड़ी है। यह भारत, ईरान और रूस का एक प्रोजेक्ट है, जिस पर पहली बार 2000 में सहमति बनी थी।
INSTC एक मल्टीमॉडल कॉरिडोर है। इसमें जहाज, रेलवे और सड़कें शामिल हैं। इसका मुख्य मकसद मुंबई, ईरान के बंदरगाहों, कैस्पियन क्षेत्र और रूस को जोड़ना है, और आगे चलकर मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच बनाना है। यह नेटवर्क लगभग 7,200 किलोमीटर लंबा है और इसे विकसित करने का काम दो दशकों से ज्यादा समय से चल रहा है।
जो चीज बदली है, वह है जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) हालात। यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और ब्लैक सी (काला सागर) में लॉजिस्टिक्स में रुकावटों के बाद, रूस उन रास्तों में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है जो यूरोप के कंट्रोल वाले या संघर्ष वाले कॉरिडोर पर ज्यादा निर्भर नहीं हैं। साथ ही, पश्चिम एशिया में अस्थिरता ने 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर' (IMEC) जैसे दूसरे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की प्रगति को मुश्किल बना दिया है।
