मनरेगा बना इतिहास: वीबी जी राम जी से मिलेगी 125 दिन काम की गारंटी; और क्या क्या बदलेगा, जानें पूरी ABCD
Viksit Bharat G Ram G Act 2025: 20 साल बाद मनरेगा अब इतिहास बन गया है। केंद्र सरकार ने इसकी जगह लेने के लिए हालिया शीतकालीन सत्र में एक नया विधेयक विकसित भारत जी राम जी 2025 लेकर आई थी, जिसे लोकसभा और राज्यसभा के बाद अब राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल गई है। आइये जानते हैं इस कानून को लाने के पीछे सरकार का क्या तर्क था? इसके कानून बनने के बाद क्या क्या बदल जाएगा? नया कानून मनरेगा से कैसे अलग है...
- Authored by: शिव शुक्ला
- Updated Dec 21, 2025, 08:13 PM IST
Viksit Bharat G Ram G Act 2025: केंद्र की मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को खत्म कर दिया है, इसकी जगह एक नया कानून लाया गया है, जिसका नाम 'विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ (विकसित भारत- जी राम जी) कानून, 2025 रखा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को इसे मंजूरी दे दी। जिसके बाद यह कानून बन गया है। सरकार का कहना है कि इसका उदेश्य ग्रामीण सशक्तिकरण, समावेशी, योजनाओं का बेहतर तरीके से समन्वय करना है। इस नए कानून में 125 दिन काम की गारंटी दी गई है। सरकार इसे ग्रामीण जीवन को विकसित करने के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसका व्यापक तौर पर विरोध किया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसके जरिए महात्मा गांधी का नाम हटा कर उनका अपमान कर रही है। वहीं, विपक्ष का यह भी कहना है कि सरकार इसके जरिए राज्यों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। आइये जानते हैं इस कानून के पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है? अब जबकि यह कानून बन गया है तो क्या क्या बदल जाएगा? जी राम जी विधेयक मनरेगा से कैसे अलग है...
विकसित भारत- जी राम जी कानून का उद्देश्य क्या है?
‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) को निरस्त करने और इस संबंध में एक नया कानून बनाने के पीछे का उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना है। ताकि सशक्तीकरण एवं विकास को बढ़ावा देकर समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत का निर्माण हो सके। सरकार का कहना है कि मनरेगा में जहां आजीविका सुरक्षा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित था, वहीं नया कानून समृद्ध और लचीले ग्रामीण भारत के लिए सशक्तीकरण, विकास, तालमेल को बढ़ावा देता है। विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक पर जोर देना है।
अब क्या क्या बदल जाएगा
अब जबकि लोकसभा और फिर राज्यसभा से पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया है तो हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को हर वित्त वर्ष में 125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। इसका लक्ष्य सशक्तीकरण एवं विकास को बढ़ावा देकर समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत का निर्माण करना है। इसके अलावा, इसमें एक जो सबसे बड़ा प्रावधान किया गया है वो मजदूरी को फंड करने के पैटर्न में बदलाव करना है। दरअसल, अभी मनरेगा के तहत दी जाने वाली मजदूरी की पूरी लागत को केंद्र सरकार ही फंड करती है। इसके अलावा, मनरेगा के तहत होने वाले काम में लगने वाली सामग्री का 75 फीसदी हिस्सा भी केंद्र वहन करता है, लेकिन नए कानून में इस पैटर्न में बदलाव किया गया है। विकसित भारत- जी राम जी में योजना के खर्च में 60-40 का रेशियो रखा गया है। तात्पर्य यह कि कानून बनने के बाद 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकारों को योजना का खर्च उठाना होगा। वहीं, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 की बढ़ी राशि और बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण का प्रावधान है। इससे एक ओर जहां केंद्र पर से वित्तीय दबाव थोड़ा कम होगा वहीं, राज्य सरकारों पर यह बोझ बढ़ जाएगा।
ये होगीं नए कानून के तहत प्राथमिकताएं
नए कानून के तहत रोजगार और परिसंपत्ति निर्माण को चार प्राथमिक कार्य-क्षेत्रों में बांटा गया है, ताकि ग्रामीण विकास और आजीविका दोनों को मजबूत किया जा सके।
जल सुरक्षा
- जल संचयन (पानी रोकना, तालाब/पंड बनेना)
- भूजल स्तर सुधार
- बाढ़ जल निकासी
- पानी की उपलब्धता और प्रबंधन के काम
- इनसे पानी-संबंधी समस्याओं का समाधान और कृषि-उत्पादकता बढ़ेगी।
मुख्य ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर
- ग्रामीण सड़कों का निर्माण एवं रख-रखाव
- सड़क कनेक्टिविटी
- पुल, पगडंडी, नाला
- बाजार तक आसान पहुंच से जुड़ा बुनियादी ढांचा
- इससे गांवों में आवाजाही और बाजार तक पहुंच आसान होगी।
आजीविका से जुड़ी अवसंरचनाएं
- भंडारण सुविधाएं (गोदाम/ठोस भंडारण)
- कृषि उत्पादन से जुड़ी सुविधाएं
- मार्केट लिंक और बिक्री केंद्र
- सहकारिता और आजीविका संवर्द्धन परियोजनाएं
- इससे किसानों और ग्रामीण व्यवसायों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत बनेंगे।
जलवायु-अनुकूल कार्य
- मृदा संरक्षण और सुधार
- बाढ़ नियंत्रण उपाय
- पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अन्य कार्य
- जलवायु अनुकूलता और जोखिम प्रबंधन गतिविधियां
- इन कार्यों से स्थानीय जलवायु संतुलन और कृषि-पैदान में मजबूती आएगी।
विकसित भारत जी राम जी बना कानून।
किसानों और मजदूरों के लिए कानून का असर क्या होगा?
नए प्रावधानों के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार होगा कि वे बुवाई और कटाई के मौसम को ध्यान में रखते हुए वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत 60 दिनों के लिए काम रोक सकें। इसका सीधा फायदा यह होगा कि किसानों को पीक सीजन में खेतों में काम करने के लिए मजदूरों की कमी नहीं झेलनी पड़ेगी।
दूसरी ओर, मजदूरों को भी मनरेगा के काम के अलावा अन्य स्रोतों से अतिरिक्त मजदूरी कमाने का मौका मिलेगा। इससे उनकी आय के विकल्प बढ़ेंगे और वे अपनी जरूरतों के अनुसार काम चुन सकेंगे।जब किसानों को समय पर और पर्याप्त मजदूर मिलेंगे, तो उन्हें मजबूरी में ज्यादा मजदूरी देकर कामगार नहीं रखने पड़ेंगे।
इसके अलावा, मजदूरों के लिए काम के दिनों की सीमा 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है। इससे उन्हें सालभर में ज्यादा दिन रोजगार मिलेगा और उनकी कुल आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी।
मनरेगा में क्या था?
अब बात महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) की कर लें, इसे साल 2005 में पूरे देश में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवार के काम करने में सक्षम 18 वर्ष की आयु वाले हर उस व्यक्ति को जो बिना कौशल वाला काम करने के लिए राजी हो, उसे साल के 100 दिन काम की गारंटी देना है। 12 दिसंबर को मनरेगा का नाम बदले जाने की भी खबर आई थी, हालांकि सरकार द्वारा इस संबंध में कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं की गई। मनरेगा के तहत, सड़क निर्माण, तालाब, नहर, खेतों की मेड़, जल संरक्षण जैसे काम कराए जाते थे। मनरेगा के तहत काम देना, सरकार की कानूनी जिम्मेदारी बना दी गई थी, वहीं, कामगारों को मजदूरी सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। इतना ही नहीं, मनरेगा के तहत काम के आवेदन करने और जॉब कार्ड बन जाने के बाद अगर 15 दिन में काम नहीं मिलता, तो सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान था। वहीं, मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी का भी ध्यान रखा गया है, मनरेगा के तहत होने वाले कार्य के लिए मजदूरों की संख्या में एक तिहाई संख्या महिलाओं की होनी चाहिए। इसके तहत 220 रुपये मजदूरी दी जाती है।
नए कानून से जुड़ी कुछ और बातें भी जान लें
- अब मनरेगा को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। अब केवल विकसित भारत-जी राम जी ही लागू रहेगा।
- अब छह महीनों के भीतर राज्यों को अपनी नई योजना बनानी होगी।
- राज्यों को इस बाबत नया पंजीकरण व्यवस्था लागू करनी होगी, यह पूरी तरह डिजिटल और बायोमीट्रिक पर आधारित होगी।
- बुवाई/कटाई के पीक मौसम में सार्वजनिक कार्यों में ठहराव रखा जा सकता है ताकि मजदूर खेतों में काम कर सकें।
- सभी बनाए गए संसाधनों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड और मॉनिटर किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और योजना-निर्माण में सुधार होगा।
- ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाएं तैयार होंगी, जो राष्ट्रीय विकास ढांचे (जैसे PM Gati-Shakti) से जुड़ी होंगी।
- यदि 15 दिनों में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी है।
