First Indian Village- उत्तराखंड का माणा गांव अब देश का पहला गांव बन गया है। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने सोमवार को चीन से लगते गांव माणा की दहलीज पर एक साइनबोर्ड लगाया, जिस पर लिखा है 'भारत का पहला गांव'। उत्तराखंड के चमोली में भारत-चीन सीमा पर स्थित माणा को पहले अंतिम भारतीय गांव के रूप में जाना जाता था। अब इसे 'पहले भारतीय गांव' के रूप में जाना जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अक्टूबर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस टिप्पणी का समर्थन किया था कि माणा देश का पहला गांव है और हर सीमावर्ती गांव पहला गांव होना चाहिए। आइए जानते हैं क्या है माणा गांव का इतिहास और यहां कैसे पहुंचा जा सकता है।
माणा गांव अब देश का पहला गांव
भारत-चीन सीमा से लगभग 24 किलोमीटर दूर
भारत-चीन सीमा से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उत्तराखंड का माणा गांव समुद्र तल से 3,219 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अब तक यहां पर्यटकों को 'इंडियाज लास्ट टी कॉर्नर' और 'इंडियाज लास्ट कॉफी एंड टॉफी कॉर्नर' जैसे साइनबोर्ड नजर आते थे। लेकिन अब ये लास्ट, पहला बन चुका है यानि फर्स्ट कॉफी कॉर्नर या पहला टी कॉर्नर। पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाने यहां पहुंचते हैं।
गर्मी का मौसम यात्रा के लिए सबसे अच्छा
माणा गांव की यात्रा केवल गर्मियों और मानसून के मौसम में ही किया जा सकता है, जब बद्रीनाथ यात्रा शुरू होती है। यह गांव काफी दूर है और सर्दियों के दौरान यहां भारी बर्फ पड़ती है। माणा गांव मई से नवंबर की शुरुआत तक घूमने के लिए सबसे अच्छा रहता है। नवंबर से अप्रैल तक यह क्षेत्र भारी बर्फबारी के कारण दुर्गम बना रहता है। बारिश के दौरान जाने से बचें क्योंकि रास्ता फिसलन भरा होता है। सर्दियों के दौरान यहां के निवासी निचले स्थानों पर चले जाते हैं, क्योंकि पूरा इलाका बर्फ से ढक जाता है।
माणा गांव कैसे पहुंचे
सड़क मार्ग : हरिद्वार से शुरू होकर इस गांव तक पहुंचा जा सकता है, फिर एनएच-58 से आप जोशीमठ पहुंच सकते हैं। जोशीमठ से 20 किमी दूर गोविंदघाट और फिर गोविंदघाट से 25 किमी दूरी तय करके बद्रीनाथ पहुंच सकते हैं। बद्रीनाथ से माणा गांव की दूरी महज 4 किलोमीटर है। किसी निजी टैक्सी में बैठकर यहां पहुंचा जा सकता है।
हवाई जहाज: माणा गांव का निकटतम हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है। देहरादून से माणा गांव की दूरी करीब 341 किमी है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी से यात्रा कर सकते हैं, या बस भी पकड़ सकते हैं। जबकि दिल्ली से इसकी दूरी 537 किमी. है।
रेलवे मार्ग: माणा गांव से 275 किमी दूर निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार में है। आपको बसें या टैक्सी मिलेंगी जो आपको माणा गांव तक ले जाएंगी।
क्यों है प्रसिद्ध
माणा गांव अपनी कई चीजों के लिए प्रसिद्ध है जैसे ऊनी वस्त्र और इससे जुड़े सामान (ज्यादातर भेड़ की ऊन)। यहां बेहतरीन शॉल, टोपी, मफलर, आसन, पंखी (भेड़ की ऊन से बना एक पतला कंबल), कालीन मिलते हैं। माणा गांव में होटल और रिसॉर्ट के अलावा होमस्टे भी रहने का एक विकल्प है।
कोई भी यहां पूरा दिन बिता सकता है। सुंदर नक्काशीदार देहाती कॉटेज और वाटरफॉल दिल जीत लेते हैं। पर्यटक उस जगह पहुंच जा हैं जहां सरस्वती नदी का उद्गम होता है और इसे अलकनंदा नदी में प्रवाहित होते हुए देख सकते हैं जो इसे केशव प्रयाग बनाता है। यहां एक पत्थर का पुल भी है जिसे 'भीम पुल' कहा जाता है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसे पांच पांडवों में से एक भीम ने बनवाया था। किंवदंती है कि जब पांडव स्वर्ग की अपनी अंतिम यात्रा पर थे, तो उन्होंने माणा गांव की यात्रा की थी।
