Gen Z Dialogue: महाराष्ट्र की राजनीति में अब एक नया सियासी ट्रेंड साफ दिखाई देने लगा है और वो है Gen Z के साथ सीधा संवाद। जिस युवा पीढ़ी को अब तक राजनीतिक दल मुख्यतः सोशल मीडिया, चुनावी अभियानों और वोट बैंक के नजरिए से देखते रहे हैं, वही Gen Z अब नेताओं से सीधे सवाल पूछ रही है और राजनीतिक एजेंडे को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
युवाओं से संवाद की मची होड़
मुंबई में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के Gen Z के साथ संवाद के बाद भाजपा ने देशभर में इसी तरह के संवाद कार्यक्रमों का अभियान शुरू किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पुणे में छात्रों के साथ कार्यक्रम किया और अब शिवसेना ने मुंबई में Gen Z के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। अंधेरी में शिवसेना के संसदीय दल के नेता और सांसद श्रीकांत शिंदे ने Gen Z के साथ संवाद किया।
कार्यक्रम में युवाओं ने नेताओं को सिर्फ सुनने के बजाय सीधे बेबाक और मुद्दे आधारित सवाल किए। शिक्षा से लेकर रोजगार, AI से लेकर स्टार्टअप और ऑनलाइन क्लास की महंगी फीस से लेकर कलाकारों के लिए रोजगार के अवसरों तक सवालों की फेहरिस्त ने यह साफ कर दिया कि नई पीढ़ी के मुद्दे पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से कहीं आगे निकल चुके हैं।
ऑनलाइन क्लास से AI तक पूछे गए सवाल
कार्यक्रम में युवाओं ने ऑनलाइन क्लास की बढ़ती फीस को लेकर सवाल उठाए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग पर होने वाला खर्च भी चर्चा में आया। युवाओं ने पूछा कि जब शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी लगातार महंगी होती जा रही है, तो आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए सरकार क्या कर रही है।
स्टार्टअप और AI भी युवाओं के सवालों में प्रमुख मुद्दे रहे। नई तकनीक के दौर में रोजगार के बदलते स्वरूप और युवाओं के लिए नए अवसरों को लेकर भी सवाल पूछे गए। कलाकारों के लिए रोजगार और अपनी प्रतिभा को पेशे में बदलने के अवसरों पर भी युवाओं ने सरकार का ध्यान खींचा। यानी Gen Z की चिंता केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है। वह नई अर्थव्यवस्था, नई तकनीक, डिजिटल शिक्षा और क्रिएटिव इंडस्ट्री में अपने भविष्य को लेकर भी जवाब चाहती है।
श्रीकांत शिंदे ने युवाओं से किया संवाद (फोटो साभार: @DrSEShinde)
'लाड़ले Gen Z योजना' का सवाल भी उठा
संवाद के दौरान एक युवा ने महाराष्ट्र की 'लाडली बहना' योजना का संदर्भ लेते हुए पूछा कि क्या सरकार Gen Z युवाओं के लिए भी 'लाडले Gen Z योजना' लेकर आएगी।
सवाल भले ही राजनीतिक अंदाज में पूछा गया हो, लेकिन इसका संदेश काफी गहरा है। युवा यह समझना चाहता है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में उसके लिए क्या है। महिलाओं, किसानों और अन्य सामाजिक वर्गों के लिए योजनाओं की घोषणा के बीच युवा वर्ग अपने लिए भी ठोस सरकारी पहल की उम्मीद कर रहा है।
क्या जेन जी हो रहे गुमराह?
कार्यक्रम में युवाओं को कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा गुमराह किए जाने से जुड़ा सवाल भी उठा। इस पर श्रीकांत शिंदे ने इसे 'चर्चा का विषय' बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गलत जानकारी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन Gen Z समझदार हैं। शिंदे ने युवाओं से अपील की कि वे किसी की बात पर आंख बंद करके विश्वास न करें, बल्कि खुद जानकारी हासिल करें और तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाएं।
उन्होंने युवाओं से खास तौर पर कहा कि उन्हें यह सवाल करना चाहिए कि 2014 से पहले का कार्यकाल कैसा था और 2014 के बाद का कार्यकाल कैसा रहा। दोनों कार्यकालों की तुलना करने के बाद युवाओं को खुद समझ में आ जाएगा कि सही क्या है और गलत क्या।
शिंदे का यह बयान सीधे तौर पर राजनीतिक तुलना की तरफ इशारा करता है और Gen Z के बीच सरकार के कामकाज को लेकर अपनी राजनीतिक नैरेटिव रखने की कोशिश भी माना जा रहा है।
'Gen Z को अब इग्नोर नहीं किया जा सकता'
टाइम्स नाउ नवभारत से खास बातचीत में श्रीकांत शिंदे ने कहा कि Gen Z को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं की समस्याओं और सुझावों को सीधे सुनना है।
शिंदे के मुताबिक, आने वाले दिनों में सरकार के मंत्रियों के साथ भी Gen Z के सीधे संवाद कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। यानी शिवसेना इस पहल को एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय इसे लगातार संवाद की शक्ल देने की तैयारी में है। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक मुरजी पटेल, सांसद रवीन्द्र वायकर और उद्योग मंत्री उदय सामंत भी मौजूद रहे।
राहुल गांधी के 'डायलॉग' पर शिंदे का हमला
Gen Z के बीच संवाद को लेकर शुरू हुई इस राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में विपक्ष पर हमला करना भी शिवसेना की रणनीति का हिस्सा रहा। श्रीकांत शिंदे ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल, खासकर कांग्रेस और राहुल गांधी, संवाद के बजाय इवेंट करते हैं। उनका कहना था कि उनकी पार्टी Gen Z को दूसरी पार्टियों की तरह सिर्फ वोट बैंक के लिए टारगेट नहीं कर रही।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि Gen Z तक पहुंचने की राजनीतिक होड़ अब महाराष्ट्र में खुलकर दिखाई देने लगी है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का संवाद, भाजपा का देशव्यापी अभियान, राहुल गांधी का पुणे में छात्रों से संवाद और अब शिवसेना का मुंबई में Gen Z के बीच पहुंचना यह सिर्फ संयोग नहीं है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (फाइल फोटो)
Gen Z अब सिर्फ वोटर नहीं, पॉलिटिकल ऑडियंस
दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में Gen Z की अहमियत आने वाले चुनावों के साथ और बढ़ने वाली है, लेकिन इस पीढ़ी को पुराने राजनीतिक नारों और परंपरागत भाषणों से प्रभावित करना आसान नहीं होगा।
AI, स्टार्टअप, डिजिटल शिक्षा, महंगी ऑनलाइन कोचिंग, रोजगार, कलाकारों के अवसर और भविष्य की अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे बताते हैं कि युवाओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। वे सरकार से सिर्फ योजना नहीं, अवसर चाहते हैं; सिर्फ भाषण नहीं, जवाब चाहते हैं; और सिर्फ वादे नहीं, परिणाम चाहते हैं।
यही वजह है कि Gen Z से संवाद की मौजूदा राजनीतिक कवायद को सिर्फ युवा आउटरीच कहना शायद पर्याप्त नहीं होगा। यह आने वाली राजनीति के नैरेटिव पर कब्जे की शुरुआती लड़ाई भी है।
भाजपा ने संवाद शुरू किया, राहुल गांधी ने छात्रों के बीच पहुंच बनाई और अब शिवसेना भी मैदान में उतर गई है। सवाल यह नहीं कि कौन Gen Z से बात कर रहा है। असली सवाल यह है कि Gen Z किसकी बात सुन रही है और चुनाव के वक्त किसकी बात पर भरोसा करेगी।
