Pahalgam Terrorist Attack : पहलगाम आतंकवादी हमले ने एक बार देश का सीना छलनी कर दिया है। आतंकवादी जो कि पाकिस्तान से आए थे, इन्होंने 'मिनी स्विटजरलैंड' कहे जाने वाले बैसारण घाटी में मंगलवार को आतंक का 'खूनी खेल' खेला और छुट्टियां मनाने आए 26 लोगों की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस कायराना हमले के बाद देश भर में भारी आक्रोश और गुस्सा है। लोग सड़कों पर हैं और इस हत्याकांड के गुनहगारों और मास्टरमाइंड के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आतंकियों ने इस बार ऐसे लोगों को निशाना बनाया जो पूरी तरह से निर्दोष थे, उनका कसूर मात्र इतना था कि वे हिंदू थे। आतंकियों ने लोगों का नाम और पहचान पूछकर उन्हें गोली मारी। यह हमला 2019 में पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद सबसे बड़ा है। नागरिकों की हत्या की अगर बात करें तो मुंबई हमले के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं।
पहलगाम आतंकवादी हमला।
हमले के वक्त सऊदी अरब में थे पीएम मोदी
इस भीषण आतंकवादी हमले की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब संसद के नेता यानी प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता यानी राहुल गांधी दोनों देश से बाहर थे। अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस भारत दौरे पर हैं। मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक तहव्वुर राणा NIA की हिरासत में है। ऐसे में यह हमला महज एक संयोग नहीं है। इस हमले की साजिश बहुत सोच-समझकर और बारीकी से की गई है। पीएम मोदी अपनी दो दिन की यात्रा पर सऊदी अरब के दौरे पर थे। वह अपना दौरा पूरा कर बुधवार रात वापस दिल्ली लौटने वाले थे लेकिन सऊदी अरब पहुंचने के बाद यह हमला हो गया। हमले की जानकारी जैसे ही उन्हें मिली वह गृह मंत्री अमित शाह से लगातार संपर्क में रहे। उन्होंने गृह मंत्री को तत्काल श्रीनगर जाने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री इस घटना से इतने आहत हुए कि सऊदी अरब सरकार द्वारा आयोजित रात्रिभोज में वह शामिल नहीं हुए। उन्होंने अपने दौरे में कटौती करते हुए भारत के लिए रवाना हो गए। प्रधानमंत्री बुधवार सुबह दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुंचे और एयरपोर्ट ही विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री के साथ बैठक कर घटना की जानकारी ली।
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अमेरिका के दौरे पर हैं राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अमेरिका के दौरे पर हैं। कांग्रेस सांसद को जब इस आतंकवादी हमले की जानकारी हुई तो उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर घटना की जानकारी ली। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘मैंने गृह मंत्री अमित शाह, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तारिक कर्रा से पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के संबंध में जानकारी ली।’खास बात यह है कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब दोनों बड़े नेता देश से बाहर थे। यही नहीं, अमेरिकी उप राष्ट्रपति वेंस के दौरे के दूसरे दिन हमला कर आतंकियों ने संदेश देने की कोशिश है कि कश्मीर में अमन-शांति नहीं है। यहां अभी भी दहशतगर्दी है। फरवरी 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब भारत आए थे तो सीएए के विरोध में दिल्ली में साजिश के तहत दंगे हुए। अब उप राष्ट्रपति आए हैं तो पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ।
आसिम मुनीर के जहरीले बोल
एक्सपर्ट इस हमले को संयोग नहीं मान रहे। उनका कहना है कि पहलगाम आतंकवादी हमला बहुत-सोच समझकर और साजिश के तहत किया गया है। जानकार कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के भाषण का जिक्र कर रहे हैं। प्रवासी पाकिस्तानी सम्मेलन को संबोधित करते हुए आसिम ने भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला। उन्होंने कहा कि 'पाकिस्तान की आने वाली पीढ़ियों को यह बताना होगा कि हिंदू और मुसलमान अलग हैं। हम हिंदुओं से अलग है। दोनों का खान-पान, रहन-सहन, धार्मिक रीति-रिवाज सबकुछ अलग है। इसी वजह से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत बना। हम दो मुल्क हैं।' मुनीर ने कश्मीर का भी राग अलापा। उन्होंने कहा कि कश्मीर पाकिस्तान के गले की नस है। दूसरा, मुंबई हमले का मास्टरमाइंड राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। एनआईए उससे पूछताछ कर रही है। राणा के प्रत्यर्पण से अंतरराष्ट्रीय स्तर पाकिस्तान की एक बार फिर बेइज्जती हुई है। वह शर्मसार हुआ है। इन सारी कड़ियों को एक साथ जोड़ने पर यह बात साफ जाहिर होती है कि वह किसी बड़े हमले की फिराक में था।
बेहद खूबसूरत है बैसारण घाटी, मनमोहते हैं नजारे
पहलगाम में जिस जगह हमला हुआ है, वह दुर्गम और पहाड़ी इलाका है। पहलगाम की बैसारण घाटी अपने हरी घास वाली मैदान के लिए जानी जाती है। यह हरा मैदान चारों तरफ से देवदार वाले जंगल से घिरा हुआ है। यह पूरा पर्वतीय जंगली इलाका है। यहां सड़क तक नहीं है। यहां पहुंचने के लिए या तो पैदल या घोड़ों-खच्चर से आना पड़ता है। यहां की खूबसूरती और प्राकृतिक छटा लोगों को मंत्रमुग्ध करती आई है। इसी नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां हर साल आते हैं। कश्मीर वादी में दहशतगर्दी कम होने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में काफी उछाल आया है। पर्यटकों के जत्थे का यहां आने का क्रम कभी टूटता नहीं है। इस बार भी पर्यटक अपनी छुट्टियां बिताने और मौज-मस्ती करने यहां आए थे लेकिन बदनसीब रहे कि ये आतंकियों की जाल में फंस गए और इन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। इस हमले के पीछे पाकिस्तान है, इसमें कोई शक नहीं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई और आतंकियों को कराची और मुजफ्फराबाद में बैठे उनके आकाओं से निर्देश मिले। रिपोर्टों में हमले के प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा गया कि हमले में चार से छह आतंकवादी शामिल थे। ये अपने साथ बॉडी कैम भी लेकर आए थे। इनका इरादा बड़ा हमला करने का था।
रिकॉर्ड संख्या में जम्मू-कश्मीर पहुंचे पर्यटक
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम लगने के बाद से पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। यह संख्या हर साल लगातार बढ़ती गई है। हाल के वर्षों में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक कश्मीर पहुंचे हैं। पर्यटकों की बढ़ती तादाद से जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोग का कारोबार कई गुना बढ़ा है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। आमदनी बढ़ने से स्थानीय लोग काफी खुश हैं। जम्मू और कश्मीर में हाल के वर्षों में पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 में जम्मू-कश्मीर ने रिकॉर्ड 2.35 करोड़ पर्यटकों का स्वागत किया, जिसमें से कश्मीर घाटी में लगभग 34.98 लाख पर्यटक पहुंचे। इनमें 5.12 लाख अमरनाथ यात्री भी शामिल थे। पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर में लगभग 15.3 करोड़ पर्यटक आए। माता वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा जैसे धार्मिक स्थलों ने पर्यटन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 2021 से 2024 के बीच, जम्मू क्षेत्र ने कुल पर्यटकों का लगभग 87% आकर्षित किया, जबकि कश्मीर घाटी में केवल 13% पर्यटक आए।
पाकिस्तान के मसंबों को लगा तगड़ा झटका
इस हमले की एक बड़ी वजह जम्मू-कश्मीर का शांति और विकास की तरफ तेजी से आगे बढ़ना भी है। सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विकास के साथ जोड़ा और आतंकवाद पर करारा प्रहार किया। अनुच्छेद 370 खत्म करते हुए सरकार ने अलगाववाद और विभाजनकारी ताकतों पर नकेल कसा। आतंकी संगठनों के सभी बड़े कमांडर मारे गए, इससे उनकी कमर टूट गई। आतंकवाद काफी हद तक कमजोर पड़ा और विकास परियोजनाओं का लाभ आम कश्मीरी युवकों तक पहुंचने लगा। इससे बड़ी संख्या में युवा अलगाववाद का रास्ता छोड़ विकास की मुख्य धारा में शामिल हुए। इससे पाकिस्तान के मंसूबों को तगड़ा झटका लगा। वह देख रहा है कि कश्मीर का मसला उसके हाथ से फिसल रहा है और भारत अब पीओके खाली करने की बात कर रहा है। इस हताशा में आकर उसने यह हमला कराया है। हमलों के जरिए वह कश्मीर मुद्दे को चर्चा में बनाए रखना चाहता है।
