'दिल्ली की वो सड़क, जो खामोश नहीं रही' : 300 साल पुराना जंतर-मंतर कैसे बना जन-आंदोलनों का केंद्र?

Jantar Mantar History : वर्तमान में जिस सड़क को विरोध-प्रदर्शनों के लिए जाना जाता है, उसके निकट स्थित जंतर-मंतर का निर्माण वर्ष 1731 में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने कराया था। यह देश में उनके द्वारा निर्मित पांच वेधशालाओं में से एक है,

Jantar Mantar History : कभी तारों और ग्रहों की गति का अध्ययन करने के लिए बनाई गई वेधशाला जंतर-मंतर और उसके बगल की सड़क आज लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। जंतर-मंतर ने अपने लगभग तीन सौ वर्षों के इतिहास में कई रूप देखे हैं। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के जारी आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर ऐतिहासिक जंतर-मंतर का नाम राजधानी के प्रमुख प्रदर्शन स्थल से कैसे जुड़ गया।

Jantar Mantar History

जंतर-मंतर का सफर

वर्तमान में जिस सड़क को विरोध-प्रदर्शनों के लिए जाना जाता है, उसके निकट स्थित जंतर-मंतर का निर्माण वर्ष 1731 में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने कराया था। यह देश में उनके द्वारा निर्मित पांच वेधशालाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य खगोलीय पिंडों की गति का अध्ययन और खगोलीय गणनाओं को अधिक सटीक बनाना था।

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