Israel vs Iran: इंतकाम में जलता तेहरान, हमले बढ़ायेगा इजरायल?

Iran-Israel War: इजरायल के ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के बाद अब तेहरान जवाबी हमले कर रहा है। शनिवार सुबह ईरान ने इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन दागे, जिसमें कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई। बता दें, IDF के हमलों की आधिकारिक जिम्मेदारी लेते हुए इजरायली सरकार ने बताया था कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ उन्होंने ऑपरेशन राइजिंग लॉयन शुरू कर दिया है। दूसरी ओर ईरान का दावा है कि दोनों मुल्कों के बीच कई दशकों से चल रही रंजिश और छद्म युद्ध के बाद ये जंग की सबसे बड़ी और सीधी इजरायली कार्रवाई है।

Iran-Israel War: मध्य पूर्व एशिया के इतिहास में बीता शुक्रवार (13 जून 2025) काली स्याही से लिखा जायेगा। तेल अवीव और तेहरान की अदावत ने सामरिक लक्ष्मण रेखा पार कर दी। इन हालातों के मद्देनजर दोनों के दरम्यां बनी जहरीली दुश्मनी अब खतरनाक दौर की ओर बढ़ रही है। संघर्ष के बीच चरम पर पहुंचे तनाव ने ना सिर्फ ग्लोबल बिरादरी को हैरानगी में डाला बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्टॉक मार्केट को भी झकझोर कर रख दिया। इस क्रम में IDF ने तड़के सुबह ईरान के खिलाफ जंगी मोर्चा खोलते हुए अपने जेट्स को तेहरान की ओर रवाना कर दिया। इस हवाई कार्रवाई में राजधानी तेहरान और उत्तर-पश्चिमी सूबे हब तबरीज समेत करीब एक दर्जन से ज्यादा ईरानी ठिकानों को इजरायली जेट्स ने निशाना बनाया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि IDF के हमलों की चपेट में उनके न्यूक्लियर ठिकाने, एयर डिफेंस बैट्रियां, ऑडिनेंस डिपो, IRGC कोर्प्स कमांडर, उनके घर और उनके ऑफिस आये। आईआरजीसी ने ये खुलासा किया कि उनके कई जंगी सिपहसालार इस दौरान मारे गए, जिसके बाद आयतुल्लाहिल अज़्मा सैयद अली ख़ामेनई की सिफारिश पर आनन फानन में मारे गए ईरानी कमांडरों के ओहदो पर फौरी नई बहाली कर दी गयी।

Iran-Israel War

ये जंग की सबसे बड़ी और सीधी इजरायली कार्रवाई है: ईरान

हर हद तक जाने को तैयार दोनों मुल्क

IDF के हमलों की आधिकारिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्राइली सरकार ने बताया कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ उन्होंने ऑप्रेशन राइजिंग लॉयन शुरू कर दिया है। दूसरी ओर ईरान का दावा है कि दोनों मुल्कों के बीच कई दशकों से चल रही रंजिश और छद्म युद्ध के बाद ये जंग की सबसे बड़ी और सीधी इस्राइली कार्रवाई है। बारीकी से देखा जाए तो ये दांव चलकर इजरायली वजीर-ए-आजम बेंजामिन नेतन्याहू एक ही बार में दो मकसद हासिल करने की जुगत में है। पहला ये कि तेल अवीव नहीं चाहता कि तेहरान किसी भी कीमत पर परमाणु ताकत हासिल करे। ईरान को न्यूक्लियर जंगी तकनीक हासिल करने से रोकने के लिए नेतन्याहू किसी भी हद तक जा सकते है। इस राह में रोड़े अटकाने के लिए वो जरूरत पड़ने पर IDF की ग्राउंड फोर्सेस को ईरानी सरजमीं पर मोबालाइज़ करने से नहीं चूकेगें। दूसरा ये कि तेल अवीव को पूरा भरोसा है कि मौजूदा लगातार बढ़ते जंगी तनाव के बीच ट्रंप इजरायली हितों पर केंद्रित परमाणु समझौते पर तेहरान को रजामंद कर लेगें। कथित परमाणु समझौते की ड्राफ्टिंग में यूरेनियम संवर्धन रोकने और इसके भंडार को हटाने से जुड़ी शर्तें साफतौर पर शामिल रहेगी। भले ही नेतन्याहू अपने मंसूबे पूरे करने में कामयाब रहे, लेकिन आखिर में उन्हें दीर्घकालिक तौर पर क्षेत्रीय अस्थिरता और ईरानी प्रॉक्सियों (हमास, हिज्बुल्लाह और हूती) से जूझना पड़ेगा।

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