Explainer: लूथरा भाइयों के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस ही क्यों; किन-किन रंगों के और कब नोटिस जारी करता है इंटरपोल?
- Authored by: शिव शुक्ला
- Updated Dec 9, 2025, 09:25 PM IST
गोवा में हुए भीषण अग्निकांड में 25 लोगों की मौत के बाद फरार लूथरा भाइयों के खिलाफ इंटरपोल ने ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। हम आज विस्तार से बताएंगे कि इंटरपोल क्या है और यह कैसे काम करता है। इसके अलावा, इंटरपोल के जरिए कौन-कौन से नोटिस जारी किए जाते हैं और इन नोटिस का मतलब क्या है....
'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइट क्लब के मालिकों के खिलाफ इंटरपोल ने जारी किया नोटिस। (फोटो: canva)
गोवा में हुए भीषण अग्निकांड में 25 लोगों की मौत के बाद गोवा सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने मौतों के लिए जिम्मेदार क्लब मालिकों की खोज तेज कर दी है। जब पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि रोमियो लेन के दोनों मालिक सौरभ और गौरव लूथरा हादसे के कुछ घंटो बाद ही देश छोड़कर थाईलैंड के फुकेट भाग गए थे। जिसके बाद दोनों को पकड़ कर न्याय के कटघरे में लाने के लिए भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने इंटरपोल मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद इंटरपोल ने गौरव और सौरभ लूथरा के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के जारी होने के बाद अब दोनों के बारे में इंटरपोल में शामिल सभी देशों को सूचित किया गया है, साथ ही उनसे कहा गया है कि वे या तो दोनों को गिरफ्तार कर लें या हिरासत में ले लें। ऐसे में हम आज विस्तार से बताएंगे कि इंटरपोल क्या है और यह कैसे काम करता है। इसके अलावा, इंटरपोल के जरिए कौन-कौन से नोटिस जारी किए जाते हैं और इन नोटिस का मतलब क्या है....
सबसे पहले तो जानें इंटरपोल क्या है?
इंटरपोल यानी इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग नेटवर्क है। इसकी स्थापना 1923 में की गई थी। इस नेटवर्क में 190 से भी ज्यादा देश शामिल हैं। इसका मुख्यालय फ्रांस के ल्योन में है। इसके अलावा, इंटरपोल में शामिल सभी देशों में भी इंटरपोल का एक ऑफिस होता है, जिसे नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB) कहा जाता है। यही दफ्तर स्थानीय पुलिस को बाकी देशों के NCB से कनेक्ट करता है और सूचना आदान–प्रदान की प्रक्रिया संभालता है। भारत में यह प्रक्रिया सीबीआई देखती है।
इंटरपोल (फोटो- Interpol)
अब बात इंटरपोल के काम करने के तरीके की
वर्तमान में करीब 196 देशों में फैले अपने नेटवर्क के जरिए इंटरपोल काम करता है। बता दें कि इंटरपोल किसी देश की पुलिस की जगह नहीं लेता और न ही खुद किसी अपराधी को गिरफ्तार करता है। इसका काम अन्तराष्ट्रीय अपराध, अपराध करके देश से भागने वाले भगोड़ों, अंतरराष्ट्रीय तस्करी, आतंकवाद और साइबर अपराध जैसे मामलों में सूचनाएं साझा करना है। ऐसे मामलों के लिए इंटरपोल कलर-कोडेड नोटिस जारी करता है। ये नोटिस एक प्रकार के अलर्ट होते हैं, जिन्हें सभी सदस्य देशों को भेजा जाता है। इन नोटिस में संदिग्ध व्यक्ति के बारे में विस्तृत जानकारी होती है। जैसे उसकी पहचान, फोटो, नागरिकता, संदिग्ध कौन-कौन सी भाषाएं बोल लेता है, उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि आदि।
इंटरपोल दो प्रमुख तरह की नोटिस जारी करता है। पहली वांछित या ट्रैकिंग नोटिस-इसमें व्यक्ति की सभी पहचान जानकारी होती है। यदि वह किसी सदस्य देश में घुसता है तो तुरंत लोकेशन साझा की जाती है। दूसरी सूचना मांगने वाला नोटिस। दूसरे तरह की नोटिस में केवल संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी देकर बाकी देशों से उसके लोकेशन या गतिविधि के बारे में अपडेट मांगा जाता है।
कब जारी होता है इंटरपोल नोटिस?
किसी अपराध के संबंध में आमतौर पर इंटरपोल नोटिस जारी नहीं होता। यह केवल उसी सूरत में जारी होता है जब उस देश जहां अपराध हुआ हो उसे यह संभावना हो कि अपराधी उसके सीमा क्षेत्र से फरार हो गया है और किसी अन्य देश में पहुंच गया है, तब संबंधित देश इंटरपोल से आग्रह करता है कि अपराधी के खिलाफ नोटिस जारी किया जाए। इसके बाद इंटरपोल मुख्यालय को अपराधी से संबंधित सारी जानकारियां साझा की जाती हैं, जिन्हें इंटरपोल अपने नोटिस में शामिल करता है। ऐसे में अगर सदस्य देश सहयोग के लिए सहमत हो जाए, तो संदिग्ध व्यक्ति जैसे ही उसकी सीमा में प्रवेश करता है तुरंत ही उसे पकड़ा जा सकता है। या फिर स्थानीय पुलिस उसकी निगरानी शुरू कर देती है। गौरतलब है कि कुछ देश ऐसे भी हैं, जो इंटरपोल के सदस्य होने के बाद भी संदिग्ध के बारे में जानकारी देने में आनाकानी करते हैं, ऐसे देशों को उच्च जोखिम वाली कैटेगिरी में रखा जाता है।
गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामला। फोटो- PTI
इसके अलावा यह भी बता दें कि इंटरपोल नोटिस सीधे तौर पर गिरफ्तारी का आदेश नहीं होते हैं। यह केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचना होती है, जिससे सदस्य देश सतर्क हो जाएं। संदिग्ध की गिरफ्तारी और उसका प्रत्यर्पण उस देश के कानून और संविधान के साथ ही कई देशों की संधियों पर निर्भर होता है।
कलर-कोडेड नोटिस सिस्टम का उपयोग करता है इंटरपोल
इंटरपोल अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए सदस्य देशों को अलर्ट भेजने के लिए एक खास कलर-कोडेड नोटिस सिस्टम का उपयोग करता है। इंटरपोल कुल आठ प्रमुख नोटिस जारी करता है, जिनमें से हर रंग का नोटिस एक अलग उद्देश्य पूरा करता है।- रेड नोटिस
रेड नोटिस किसी भगोड़े या वांछित अपराधी की लोकेशन पता लगाने और आवश्यकता पड़ने पर उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए जारी किया जाता है।
- येलो नोटिस
- ब्लैक नोटिस
यदि किसी देश में कोई अज्ञात शव मिलता है और उसकी पहचान नहीं हो पाती, तो वह इंटरपोल से ब्लैक नोटिस जारी करने का अनुरोध करता है।
- ग्रीन नोटिस
ग्रीन नोटिस उन व्यक्तियों के खिलाफ जारी किया जाता है जिनके व्यवहार से किसी देश या समाज की सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसमें अपराधियों के आपराधिक इतिहास और संभावित भविष्य के खतरे की जानकारी दी जाती है।
- ऑरेंज नोटिस
ऑरेंज नोटिस सार्वजनिक तौर पर गंभीर और त्वरित खतरे से आगाह करने के लिए जारी होते हैं। जैसे खतरनाक हथियार, विस्फोटक उपकरण या ऐसी सामग्री जो सार्वजनिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती हो।
- पर्पल नोटिस
यह नोटिस अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली नई तकनीकों, उपकरणों या तौर-तरीकों की जानकारी साझा करने के लिए होता है।
- ब्लू कॉर्नर नोटिस
ब्लू नोटिस किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जारी होता है जिसकी गतिविधियां संदिग्ध हों, लेकिन उसके खिलाफ गिरफ्तारी का सीधे-सीधे आदेश न हो। गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में भी लूथरा ब्रदर्स के खिलाफ यही नोटिस जारी किया गया है।
- इंटरपोल-यूएन स्पेशल नोटिस
यह नोटिस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकियों और संगठनों के खिलाफ जारी किया जाता है।
गौरव और सौरभ लूथरा के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस ही क्यों?
आमतौर पर जब किसी को तुरंत गिरफ्तार करना हो, और उसके खिलाफ वारंट हो तब रेड नोटिस जारी किया जाता है। लेकिन इस मामले में भारत ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया है, ऐसे में ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। इसके जरिए भारत पहले, लूथरा बंधुओं से जुड़ी हुई जानकारी जैसे उनका ठिकाना, उन्होंने थाईलैंड तक कैसे यात्रा की आदि जानना चाह रहा है। इन सब सूचनाओं के बाद उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की कार्रवाई हो सकती है।

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क्या भारत-थाईलैंड के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि है?
बता दें कि भारत और थाईलैंड के बीच 2015 से औपचारिक प्रत्यर्पण संधि लागू है। यह संधि दोनों देशों को एक-दूसरे की जमीन पर छिपे अपराधियों को कानूनी प्रक्रियाओं के तहत वापस भेजने की अनुमति देती है। पूर्व में भी बैंकॉक से कई भारतीय भगोड़ों को भारत लाया गया है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही गौरव और सौरभ लूथरा को भारत वापस लाया जा सकता है।प्रत्यर्पण की प्रक्रिया क्या है?
बता दें कि थाईलैंड से किसी अपराधी का भारत प्रत्यर्पण कराने के लिए सबसे पहले अपराध के आधार पर FIR और दर्ज होती है। इसके बाद स्थानीय अदालत उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करती है। फिर यह वारंट विदेश मंत्रालय के माध्यम से थाईलैंड में अधिकारियों को भेजा जाता है। इस वारंट के आधार पर वहां की सरकार अपने स्थानीय कानूनों के तहत आरोपी को हिरासत में लेती है। फिर दस्तावेजों की जांच पूरी होने पर आरोपी को भारत वापस भेज दिया जाता है।