Har Ghar Tiranga: ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के लिए क्यों बदला गया फ्लैग कोड? इन 2 नियमों में हुआ संशोधन

मोदी सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के लिए आखिर भारतीय फ्लैग कोड में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? पहले तिरंगे के कपड़े और उसे फहराने के समय को लेकर क्या नियम थे और अब क्या बदल गया? जानिए पूरी कहानी।

भारत का राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' सिर्फ देश की आन-बान-शान का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष और खादी की विरासत से भी जुड़ा है। लेकिन ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से पहले सरकार ने भारतीय ध्वज संहिता (Indian Flag Code) में कई अहम बदलाव किए। आखिर फ्लैग कोड बदलने की जरूरत क्यों पड़ी, इसमें किन नियमों को बदला गया और इन बदलावों पर सवाल क्यों उठे? आइए समझते हैं पूरी कहानी।

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‘हर घर तिरंगा’ के लिए क्यों बदली गई भारतीय ध्वज संहिता?

क्या है ‘हर घर तिरंगा’ अभियान?

‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत वर्ष 2022 में 'आजादी का अमृत महोत्सव' के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य लोगों को अपने घरों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित करना और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करते हुए देशभक्ति की भावना को मजबूत करना था। सरकार चाहती थी कि तिरंगा सिर्फ सरकारी कार्यालयों या खास मौकों तक ही सीमित न रहे, बल्कि आम नागरिक भी अपने घरों पर सम्मान के साथ तिरंगा फहरा सकें। इसी व्यापक जनभागीदारी को आसान बनाने के लिए फ्लैग कोड में कई बड़े बदलाव किए गए, ताकि तिरंगा फहराने की प्रक्रिया सरल हो सके। लेकिन इन संशोधनों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी हुई।

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