चीन बॉर्डर के करीब नई इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा: क्यों इसे माना जा रहा भारत का स्ट्रैटेजिक गेमचेंजर? | EXPLAINER

चीन के साथ एलएसी के इतने करीब स्थित होने के कारण ईएलएफ की लोकेशन बेहद अहम है। यह हाईवे सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-130जे सुपर हरक्यूलिस जैसे भारी-भरकम विमानों को संभालने के लिए बनाया गया है। इन विमानों का इस्तेमाल सीमा के पास सैनिकों की तुरंत तैनाती और रसद प्रबंधन के लिए किया जाता है।

Emergency Landing Facility Near China Border: 14 फरवरी को भारत ने इतिहास रचा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सी-130जे विमान में सवार होकर असम के मोरान स्थित आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ELF) पर उतरे। 4.2 किलोमीटर लंबी यह पट्टी चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से कुछ सौ किलोमीटर दूर है। चाबुआ हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाले पीएम मोदी राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के एक हिस्से पर उतरे। प्रधानमंत्री मोदी असम के एक दिवसीय दौरे पर पहु्ंचे थे। भारत की ये उपलब्धि कई मायनों में अहम है, खास तौर पर चीन के इरादों से निपटने में इस तरह की हवाई पट्टी एक गेम चेंजर का काम करेगी। भारत ने एक हाईवे को लड़ाकू विमानों के लिए रनवे में कैसे बदल दिया? इसका भारत के लिए क्या महत्व है और ये कैसे बन सकता है गेमचेंजर? आइए विस्तार से जानते हैं।

ELF Assam

असम के डिब्रूगढ़ में निर्मित ELF बनेगा गेमचेंजर

भारत ने कैसे एक हाईवे को रनवे में बदला

इस काम को राष्ट्रीय राजमार्ग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) ने अंजाम दिया। एनएचआईडीसीएल ने भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर डिब्रूगढ़ जिले में एनएच-127 पर स्थित 4.2 किलोमीटर लंबी पट्टी को लड़ाकू विमानों और अन्य विमानों के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) में बदल दिया है। यह ईएलएफ ऊपरी असम में डिब्रूगढ़-मोरान राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है। पूर्वोत्तर भारत में यह पहला ईएलएफ है और चाबुआ वायुसेना स्टेशन के नजदीक स्थित है।

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