US Pilot Rescue News: लगभग 48 घंटों तक एक घायल अमेरिकी एयरफोर्स का अफसर दक्षिण-पश्चिमी ईरान की एक संकरी पहाड़ी दर्रे में छिपा रहा, खोजी टीमों से बचता रहा, जबकि हेलीकॉप्टर ऊपर चक्कर लगा रहे थे और ड्रोन बीहड़ इलाके की निगरानी कर रहे थे। एफ-15ई स्ट्राइक ईगल विमान (F-15E Strike Eagle) में वेपन सिस्टम विशेषज्ञ के रूप में तैनात यह अधिकारी शुक्रवार को विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद इजेक्ट हो गया था। हालांकि उसके पायलट को तुरंत बचा लिया गया, लेकिन दूसरा पायलट पहाड़ों में लापता हो गया। इसके बाद अमेरिका ने उच्च जोखिम वाला बचाव अभियान शुरू किया।
कैसे चलाया गया अमेरिकी पायलट का बचाव अभियान? (AI Image)
ऊंची जगह पर पहुंचने में कामयाब रहा पायलट
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि उसका ये अफसर लैंडिंग के बाद ऊंची जगह पर पहुंचने में कामयाब रहा और उसने अपने जिंदा होने का संकेत देने के लिए एक आपातकालीन बीकन (Emergency Beacon) सक्रिय किया। जैसे-जैसे वह पकड़े जाने से बचने के लिए इलाके में और अंदर जाता गया, कम्युनिकेशन रुक-रुक कर होता रहा। इन 48 घंटों में पायलट पहाड़ी दर्रों में छुपा रहा और ईरानी सैनिकों और लोगों को लगातार चकमा देता रहा।
ईरानी सेना और मिलिशिया तलाश में जुटे
इस बीच इस अफसर ने एक संक्षिप्त संदेश भेजा: "ईश्वर महान है।" अधिकारियों ने कहा कि इस मैसेज ने शुरू में वाशिंगटन में चिंता पैदा कर दी कि यह एक जाल हो सकता है। इससे खुफिया टीमों को आगे बढ़ने से पहले संकेत की पुष्टि करनी पड़ी। इस बीच, ईरानी सेना ने मिलिशिया के साथ मिलकर इस पायलट की तलाश शुरू कर दी। सरकारी मीडिया के जरिए सूचना फैलाई कि अमेरिकी पायलट की सूचना देने पर भारी भरकम इनाम दिया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने वाशिंगटन जर्नल को बताया, यह सबसे खराब स्थिति थी, जिसमें एक अमेरिकी एयरफोर्स के अफसर के जीवित पकड़े जाने और प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना थी।
एक जटिल बचाव अभियान
बचाव अभियान जल्दी ही एक बड़े पैमाने के सैन्य अभियान में बदल गया, जिसमें लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और निगरानी विमानों सहित लगभग 100 विशेष अभियान कर्मी शामिल थे। हालांकि, शुरुआत में रेस्क्यू के दौरान कई मुश्किलें आईं। दो हेलीकॉप्टरों पर छोटे हथियारों से गोलीबारी हुई और चालक दल के सदस्यों को नुकसान पहुंचा और घायल होने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा फॉपवर्ड बेस स्थापित करने का प्रयास कर रहे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दुर्गम भूभाग में फंस गए, जिसके कारण वैकल्पिक योजनाओं पर काम करना पड़ा।
अमेरिका ने चार बी-1 बमवर्षक विमानों को तैनात किया, जिन्होंने पास आ रहे लोगों को रोकने के लिए लगभग 100 सटीक निर्देशित गोला-बारूद गिराए। जबकि एमक्यू-9 रीपर ड्रोन ने पायलट के करीब जा रहे संदिग्ध लड़ाकों को निशाना बनाया। केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने पायलट की स्थिति का सटीक पता लगाने में मदद की और रियल टाइम अपडेट दिए। अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने एक भ्रामक अभियान भी चलाया, जिसमें पायलट के ठिकाने के बारे में ईरानी सेना को गुमराह करने के लिए झूठी जानकारी फैलाई गई।
फिर चलाया गया अंतिम बचाव अभियान
कामयाबी रविवार की सुबह मिली, जब अमेरिकी कमांडो घायल अधिकारी तक ईरानी क्षेत्र में लगभग 200 मील अंदर पहुंच गए। जैसे ही विमान ऊपर से गरजते हुए दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने लगे, बचाव दल ने पायलट को निकाला और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। अधिकारियों ने बताया कि इजेक्शन के दौरान अफसर को चोटें आईं, लेकिन छिपने के दौरान वे लगातार चल-फिर रहे थे।
जाने से पहले अमेरिकी सेना ने कई ऐसे विमानों को नष्ट कर दिया ताकि कोई सबूत पीछे न छूट जाए। इनमें ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर शामिल थे। इसका मकसद ये था कि संवेदनशील उपकरण ईरान के हाथ न लगें। आधी रात के कुछ ही समय बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए लिखा: "हमने उसे ढूंढ़ लिया!" बाद में उन्होंने इस मिशन को अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक बताया।
