तिब्बत से निकलकर भारत के रास्ते पाकिस्तान को जाने वाली सिंधु नदी, पाकिस्तान की राष्ट्रीय नदी है। सिंधु नदी पाकिस्तान के लिए वरदान है और अकेले यह नदी पाकिस्तान के लोगों का प्यास तो बुझाती ही है, साथ ही खेती से लेकर मछली पालन तक में अहम योगदान देती है। इसी सिंधु नदी से पाकिस्तना छह नहर निकालने की तैयारी में था, अरबों डॉलर खर्च करने की तैयारी कर रहा था, लेकिन अब भारत के कारण इस परियोजना पर तो ब्रेक लगेगा ही, साथ ही खेती से लेकर पीने के पानी तक पाकिस्तान से छिन जाएगा। समझिए कैसे आतंकियों को पालने के कारण अब भूखा पाकिस्तान प्यासा मर जाएगा।
पाकिस्तान में आने वाला है पानी का संकट
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पाकिस्तान में सूखा ही रह जाएगा दक्षिण पंजाब
पाकिस्तान ने हाल ही में सिंधु नदी नहर परियोजना की घोषणा की थी। इस परियोजना के जरिए पाकिस्तानी सरकार ने ग्रीन पाकिस्तान इनिशिएटिव के तहत 3.3 अरब डॉलर की लागत से छह नहरों का निर्माण करने की योजना बनाई है, जिससे दक्षिण पंजाब में 12 लाख एकड़ बंजर भूमि को सिंचित किया जाना था। सिंधु नदी के जरिए जो पानी पाकिस्तान को मिल रहा है, वो सिंधु नदी समझौते के कारण ही मिल रहा है, अब भारत ने जब वो समझौता तोड़ दिया तो सिंधु नदी के पानी में कमी होना तय है, ऐसे में जब नदी में पानी होगा ही नहीं तो नहर कहां से निकलेगी।
पाकिस्तान की उपजाऊ जमीन हो जाएगी बंजर
पाकिस्तान की कृषि का लगभग 80-90% हिस्सा सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी से सींचा जाता है। अगर ये पानी नहीं मिला, तो ज़मीन को सिंचाई नहीं मिलेगी और खेती नहीं हो पाएगी। पाकिस्तान के ज्यादातर इलाकों में बहुत कम वर्षा होती है, खासकर सिंध और बलोचिस्तान में। इसलिए बारिश से खेती करना संभव नहीं है – नदी का पानी ही एकमात्र सहारा है। ऐसे में अगर भारत, सिंधु नदी का पानी रोकने में सफल रहता है तो ये इलाके बंजर हो जाएंगे। सिंधु नदी का पानी समुद्र तक पहुंचता है और वहां सिंधु डेल्टा बनाता है। अगर पानी कम हो गया, तो ये डेल्टा समुद्री पानी के घुसने से बर्बाद हो सकता है और जमीन खारी होकर बेकार हो जाती है।
सिंधु जल संधि स्थगित होने से पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा
सिंधु नदी से पाकिस्तान को फायदा
सिंधु नदी पाकिस्तान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है और इससे पाकिस्तान को कई तरह के फायदे होते हैं:
1. कृषि
- सिंधु नदी पाकिस्तान की कृषि का आधार है।
- पाकिस्तान की करीब 90% सिंचाई सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों (झेलम, चिनाब, रावी, सतलुज, और ब्यास) से होती है।
- पंजाब और सिंध प्रांत में सिंधु की वजह से गेहूं, चावल, कपास, और गन्ना जैसे प्रमुख फसलें उगाई जाती हैं।
- सिंधु नदी पर कई बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बने हैं जैसे कि टर्बेला डैम और मंगला डैम।
- ये डैम पाकिस्तान को सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल बिजली प्रदान करते हैं।
- सिंधु नदी का पानी घरों, उद्योगों और शहरों को पीने और दैनिक उपयोग के लिए दिया जाता है।
- नदी में मछली पालन एक अहम व्यवसाय है।
- बहुत से लोग मछली पकड़ने, नाव चलाने, और उससे जुड़े व्यवसायों में लगे हैं।
- हालांकि सिंधु नदी का उपयोग परिवहन के लिए उतना नहीं होता जितना कुछ अन्य देशों में नदियों का होता है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में यह स्थानीय परिवहन में मदद करती है।
- सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण संधि है और यह पाकिस्तान को कुछ नदियों पर विशेष अधिकार देती है।
अगर भारत ने पानी रोका तो बर्बाद हो जाएगा पाकिस्तान
अगर सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान को न मिले, तो वह सिर्फ कृषि संकट नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक संकट बन जाएगा। पाकिस्तान की खेती का 90% हिस्सा सिंधु प्रणाली पर निर्भर है। सिंध, पंजाब और बलोचिस्तान जैसे क्षेत्रों में गेहूं, चावल, कपास, गन्ना जैसी फसलें उगती हैं — ये सब सूख सकती हैं। इससे भूखमरी, भारी आर्थिक नुकसान, और ग्रामीण बेरोजगारी हो सकती है। कई शहरों और गांवों को पीने का पानी सिंधु या उसकी सहायक नदियों से मिलता है। पानी कम होते ही लोगों की प्यास बुझाना मुश्किल हो जाएगा, खासकर गर्म इलाकों में। टरबेला और मंगला जैसे बड़े डैम, जो बिजली बनाते हैं, वो पानी की कमी से सूख सकते हैं। इससे बिजली की भारी किल्लत हो सकती है और लोड शेडिंग बढ़ेगी।
भारत कैसे रोक सकता है सिंधु नदी का जल
भारत कुछ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स बना सकता है (जैसे किशनगंगा, रतले डैम), जो संधि के तहत वैध हैं — पर ये पानी को स्थायी रूप से नहीं रोकते, बस उसे समय पर रोक कर बिजली बनाते हैं और फिर छोड़ देते हैं। भारत अब प्रयास कर रहा है कि रावी, ब्यास, सतलुज का पूरा पानी खुद इस्तेमाल करे ताकि ये पानी पाकिस्तान न जाए। ये संधि के तहत पूरी तरह वैध है।
सिंधु जल संधि
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का एक्शन
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की आपात बैठक हुई, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जानकारी दी गई। विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, और यह तब तक बहाल नहीं होगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करना बंद नहीं कर देता। इसके अलावा, अटारी चेक पोस्ट को बंद किया जा रहा है, और 1 मई तक वैध दस्तावेजों वाले पाकिस्तानी नागरिकों को वापस लौटने की अनुमति दी जाएगी। एसवीईएस योजना के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत यात्रा की अनुमति नहीं होगी और पहले जारी वीजा रद्द किए जाएंगे। इसके अलावा, भारत ने पाकिस्तानी उच्चायोग के सैन्य सलाहकारों को 'अवांछित व्यक्ति' घोषित किया है, जिन्हें एक सप्ताह में भारत छोड़ना होगा। दोनों देशों के उच्चायोगों में कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 की जाएगी, जो 1 मई से लागू होगा।
पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत
पहलगाम आतंकी हमले में शामिल पांच आतंकवादियों की पहचान कर ली गई है। इनमें से तीन पाकिस्तानी नागरिक और दो जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं।
1. पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान
- आसिफ फौजी (उपनाम: मूसा)
- सुलेमान शाह (उपनाम: यूनुस)
- अबू तल्हा (उपनाम: आसिफ)
- अदिल गुरी (अनंतनाग के बिजबेहरा का निवासी, जो 2018 में पाकिस्तान गया था)
- अहसन (पुलवामा का निवासी, जो 2018 में पाकिस्तान गया था)
पाकिस्तान में ली थी आतंकियों ने ट्रेनिंग
जांचकर्ताओं के अनुसार, ये कश्मीरी आतंकवादी हाल ही में पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर भारत में घुसपैठ करने के लिए आए थे। फौजी और शाह पहले भी जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हमलों, जैसे पुंछ हमले में शामिल थे और वे कुछ समय से राज्य में सक्रिय थे।
