पाकिस्तान एक ओर तो दुनिया में शांतिदूत होने का ढ़ोंग रचता फिर रहा है और दूसरी ओर अपनी धरती पर आतंकियों को पनाह भी दे रहा है, इसकी बानगी इसी से मिलती है कि आज लश्कर ए तैयबा के कुख्यात आतंकी हाफिज सईद का करीबी और लश्कर का बड़ा कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद अगर पिछले दो-तीन सालों के पन्ने पलटें तो पाएंगे कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण भी आतंकियों को मौत से बचा नहीं पा रहा है। 2022 से करीब 26 आतंकियों को नर्क पहुंचाया जा चुका है।पाकिस्तान में एक के बाद एक आतंकियों की रहस्यमयी हत्याओं से आतंक के आका भी खौफ में आ गए हैं।
पाकिस्तान में बीते कुछ सालों में जिन आतंकियों को मौत के घाट उतारा गया है,उनमें सबसे लेटेस्ट नाम लश्कर के कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी का है। यूसुफ हाफिज सईद का भी करीबी है। पिछली हत्याओं की तरह ही युसुफ को भी मौत के घाट उतारा गया है। ऐसे में यह जानना बेहद अहम है कि हालिया सालों में भारत के कितने मोस्ट वांटेड दुश्मनों को आतंकिस्तान में मौत के घाट उतार दिया गया है। इन आतंकियों को कब और कैसे मारा गया...आइये जानते हैं...
2026
- 16 अप्रैल 2026
- 30-31 मार्च 2026
- 21 मार्च 2026
- 30 अप्रैल 2025
- 31 मार्च 2025
- 16 मार्च 2025
- 15 मार्च 2025
- 7 मार्च, 2025
- 17 फरवरी, 2025
- 22 जनवरी 2025
2024
- मार्च 2024
- 15 अप्रैल 2024
2023
- हंजला अदनान
- मोहम्मद मुजम्मिल
- तारिक रहीम
- अकरम खान
- ख्वाजा शाहिद
- मोहम्मद सलीम
- दाऊद मलिक
- मुल्ला बाहौर उर्फ होर्मुज
- शाहिद लतीफ
- अबु कासिम
- सरदार हुसैन
- सैयद नूर शालोबर
- खालिद रजा
- बशीर अहमद पीर
- परमजीत सिंह पंजवड़
- एजाज अहमद अहंगर
- सैयद खालिद रजा
2022 में मिस्त्री जहूर इब्राहिम
जहूर मिस्त्री जो 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को हाईजैक करने वाले पांच हाईजैकर्स में से एक था और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य था। 1 मार्च, 2022 को कराची में कुछ अज्ञात मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावरों ने बहुत करीब से गोली चलाई और फिर वहां से फरार हो गए।पाकिस्तान में कौन बना 'धुरंधर' जो आतंकियों को सुला रहा मौत की नींद
पाकिस्तान में लगातार हो रही टारगेटेड हत्याओं ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, आखिर भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को कौन निशाना बना रहा है? केंद्रीय एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, बीते कुछ समय में कई बड़े आतंकी और उनके सहयोगी अज्ञात हमलावरों के हाथों मारे गए हैं। ज्यादातर घटनाओं में हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आते हैं और अपने निशाने को बेहद करीब से गोली मारकर मौके से फरार हो जाते हैं। हर हमले में एक जैसा पैटर्न भी देखने को मिला है जैसे अचानक हमला, प्वाइंट-ब्लैंक रेंज से फायरिंग और फिर तेजी से फरार हो जाना। इन अज्ञात 'धुरधंरों' के निशाने पर आमतौर पर लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे भारत विरोधी संगठनों से जुड़े लोग रहते हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई आतंकी जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में हुए हमलों में वांछित रहे हैं। हमलावर भीड़भाड़ वाले इलाकों या खुले स्थानों पर वारदात को अंजाम देते हैं, जिससे उनकी पहचान करना और पकड़ पाना मुश्किल हो जाता है।आईएसआई का संरक्षण भी नहीं बचा पा रहा
सूत्र बताते हैं कि आईएसआई इन आतंकियों को सुरक्षा देने की कोशिश कर रही है, इसके बावजूद वे हमलों का शिकार हो रहे हैं। बीते सालों में लगातार जैश-ए-मोहम्मद,डी-कंपनी,लश्कर-ए-तैयबा,लश्कर-ए-जब्बर और लश्कर-ए-जांगवी जैसे संगठनों से जुड़े लोगों की हत्या की खबरें सामने आई हैं। पाकिस्तान ने इन हत्याओं को लेकर कई बार भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर आरोप लगाए हैं, लेकिन कभी इसकी पुष्टि नहीं हुई वहीं पाकिस्तान पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई संभावनाएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों की एक राय यह है कि आईएसआई 'यूज एंड थ्रो'नीति के तहत ऐसे आतंकियों को खत्म करवा रही हो जो अब उसके काम के नहीं रहे। वहीं,आतंकी संगठनों के बीच आपसी वर्चस्व की लड़ाई भी इन हत्याओं की वजह हो सकती है।
विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि आतंकवाद से जुड़ी छवि के कारण पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना रहता है। ऐसे में यह भी संभव है कि अपनी छवि सुधारने या दबाव कम करने के लिए कुछ कार्रवाइयां भीतर ही भीतर की जा रही हों।